Monica Gupta

Writer, Author, Cartoonist, Social Worker, Blogger and a renowned YouTuber

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January 30, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

बापू

बापू गांधी ( मोनिका गुप्ता)

 बापू और उनका हे राम

गाँधी बापू को सादर नमन

आज सुबह किसी ने सोशल नेट वर्किंग साईट फेसबुक पर “हे राम” लिखा हुआ था. कुछ देर बाद देखा तो उसमे दो लाईक थे. काफी देर बाद जब न्यूज फीड मे दुबारा देखा तो उसके किसी मित्र मे पूछा कि क्या हुआ!!! आज हे राम वाली क्या बात हो गई ?? इस पर उसे बताना पडा कि आज महात्मा गांधी जी की पुण्यतिथि है. उनके आखिरी शब्द थे ” हे राम” इसलिए लिखा है. उसके बाद ना कोई लाईक ना कोई कमेंट.

वाकई समय बहुत बलवान है. एक समय ऐसा रहा होगा जब आज के दिन लाखो, करोडों आखे नम हुई होंगी. एक आज का समय है, हे राम का मतलब समझाना पड रहा है.जो भी है महात्मा गांघी जी नाम इतिहास के पन्नो पर अव्वल है और रहेगा!!

वैसे अब तो ये भी बहस का मुद्दा है कि मरते समय उनके आखिरी शब्द हे राम नही  थे … !!! क्या होगा आगे आगे !!! गहन सोच का विषय है.!! खैर बापू आज धरती पर आए तो उनके मुख से शायद हाय राम ही निकलेगा … !!!

बापू गांधी ( मोनिका गुप्ता)

बापू गांधी ( मोनिका गुप्ता)

January 30, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

अपना कौन- एक अनोखा अनुभव

अपना कौन- एक अनोखा अनुभव

कौन अपना कौन पराया इसका तो कई बार Idea ही नही होता …

कुछ दिनों से मन में एक उथल पुथल सी चल रही थी और मैं एक topic  पर बहुत कुछ लिखना चाह रही थी.असल में हुआ ये Idea  company वालों की negligence  या लापरवाही के चलते मेरे बार बार बताने पर भी जब कोई हल नही निकला तो हार कर दस साल से चला आ रहा  phone नम्बर  छोडना पडा और दूसरी कम्पनी का नया नम्बर लेना पडा.

दिक्कत तब शुरु हुई जब बेहद करीबी और खास लोग जो एक bell पर फोन pick लेते उन्होनें फोन नही उठाया या किसी ने अगर उठा भी लिया तो वो पहचाने ही नही ( जिन पर मुझे पूरा विश्वास था) पूछ्ते आप कौन ?? कुछ के लिए मैं एक सस्पैंस ही बन गई कि आवाज तो सुनी सुनी सी लग रही है पर पर पर  याद नही आ रहा …कुछ एक से मैनें भी पंगा लिया कि बूझों तो जाने…या पहचान कौन … हालाकिं मेरे बताने पर या याद आने पर या दिमाग पर जोर देने पर  ohh … sorry sorry  भी करते नजर आए …

 

 phone call photo

खैर इस बात का मुझे गुस्सा आईडिया पर तो था ही कि अगर वो गडबड न करते तो आज मेरा फोन नम्बर मेरा ही होता और सब यथावत चलता रहता पर अब गुस्सा इस बात का भी था कि पता चल गया कि कौन कौन मुझे पहचानता है यानि कि कोई नही ह हा हा ( ये हंसी दुख भरी है) खैर इसी विषय पर उथल पुथल मची ही हुई थी कि मैं इस बारे में जरुर लिखूगी और टाईटल भी सोच लिया था कि अचानक मुझे एक जानकार भावना  को फोन करना पडा शायद मैं पांच छ साल बाद फोन कर रही थी उन्हें.. कोई जानकारी लेनी थी पर मैं मानसिक रुप से तैयार थी कि मुझे बताना ही पडेगा कि मैं कौन बोल रही हूं.. मैने फोन मिलाया और क्योकि मैं खुद ही इतने साल बाद फोन कर रही थी सोचा कि उनका नम्बर कही बदल न गया हो तो पहले पूछ लूं कि आप भावना बोल रही हैं,, जैसे ही मैने फोन मिलाया और पूछा  ” हैलो भावना … तो वो बोली हां मैं ही हूं आप कैसी है मोनिका जी … !!! अरे !! मेरे हाथ से मोबाईल गिरते गिरते बचा.

मैने हैरानी से पूछा कि पहचान लिया ??? वो बोली और क्या …अरे !! पहचानूगी क्यों नही … !!मेरे दिल में एक खुशी की लहर दौड गई.. खैर  भावना से बात करके मैने फोन तो रख दिया पर इस बारे में लिखने का आईडिया ड्राप कर दिया क्योकि जो पहचानते है वो पहचानते हैं जो नही पहचानते  वो नही पहचानते. ..!!!

वैसे आपको भी अपनो की पहचान करनी है तो कभी दूसरे नम्बर से फोन करके देखिएगा जरुर… ह हा हा !!! True caller से बचते बचाते 🙂

वाकई आईडिया ने बदल दी दुनिया  😀

January 28, 2016 By Monica Gupta 1 Comment

डाइट प्लान

डाइट प्लान

ऐसा भी होता है .हम हमेशा अपनी  Diet यानि  खान पान को लेकर बेहद सजग रहते हैं कभी dietitian के पास जाकर  तो कभी  Gymnasium  जा कर कोशिश करते हैं कि वजन कम हो सभी अपने अपने तरीके हैं वजन कम करने के .

आज एक सहेली घर आई. मेरे बार बार पूछ्ने पर कि क्या लेंगी वो मना करती रही. मैनें पूछा कि  आप कुछ नही ले रहीं क्या  डाईटिंग कर रही हैं या आपका व्रत है  ?? इस पर वो हंसती हुई बोली अरेरेरे नही !! ये दोनों ही नहीं ..

असल में, आज रात को किसी शादी पर जाना है और जिस दिन उन्हें किसी शादी, ब्याह में जाना होता है वो दिन भर कुछ नही खाते ताकि शादी मे हर प्रकार के व्यंज़नों, स्वीट डिशों, , टिक्की पापडियों का भरपूर आनंद ले कर खा सकें !!

आखिर शगुन भी तो देते हैं. उसकी कीमत भी तो … अरेरे !!! मैं सोचने लगी कि ऐसा भी होता है !!

eating habbits photo

Photo by Fobonic365

January 28, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

आई लव यू- पति और पत्नी का प्यार

आई लव यू- पति और पत्नी का प्यार

 आई लव यू –  पति और पत्नी का प्यार – I Love You पति पत्नी का रिश्ता बेहद नाजुक होता है अक्सर कुछ लोग इस रिश्ते में मजाक उडाते दिख जाते हैं  कभी कभार हंसी मजाक तो अलग बात है पर सुखमय पारिवारिक जीवन बनाने के लिए इस  अनमोल रिश्तें को सहेज कर रखना चाहिए.

आई लव यू- पति और पत्नी का प्यार

आज सुबह फेसबुक पर किसी की पोस्ट देख कर बहुत बुरा लगा. एक महाशय ने अपनी पत्नी पर जम कर व्यंग्य किया हुआ था. एक तरफ तो यह बताया हुआ था कि वो डरते हैं दूसरी तरफ यह कि वो काश उसकी आवाज चली जाए ताकि वो शांति से रह सके क्योकि मैं उन्हे जानती हूं इसलिए मैने फोन करके पूछ ही लिया कि इतनी सीधी साधारण महिला के बारे मे आप ने ऐसा क्यू लिखा तो हसंते हुए बोले कि इसमे क्या है ये फेसबुक है इसमे सब चलता है और वो कौन सा फेसबुक पर है. उसे क्या पता चलेगा. वैसे एक बात तो है कि मैने कभी किसी भी महिला को अपने पति का मजाक बनाते नही देखा या पढा. पति पत्नी को मिल कर छोटा सा परिवार बनता है आपस मे आदर मान देने से प्यार बढेगा ही पर इस तरह से पब्लिक मे अपनी पत्नी का मजाक बनाएगे तो यह जरा भी अच्छी बात नही है !!

वही कुछ दिनों से एक फेसबुक मित्र को ब्लाक करने की सोच रही थी. असल में, जब भी वो लिखते हैं हमेशा महिलाओं का, अपनी पत्नी का मजाक ही उडाते. हो सकता है उन्हें ऐसा मजाक उडाना पसंद हो पर मुझे पसंद नही था. आज अचानक उनका प्रोफाईल न्यूज फीड में देखा. जिसमें उन्होंने लिखा था कि कुछ् दिन (आईसीयू )अस्पताल में रहने के बाद आज उनकी पत्नी वापिस आ गई है और आज पता चला की उनकी पत्नी की जिंदगी में कितनी बडी अहमियत है. उस के बिना वो कुछ भी नही हैं. वो दिन कैसे गुजरे सोच कर रुह कांप जाती है. जितना भी उन्होनें मजाक उडाया वो आज माफी मांगतें है. आई लव यू (सुमित्रा). ना जाने क्यू उस को पढ कर मेरी भी आखे नम हो गई.

महिला को सम्मान मिलना चाहिए जिसकी वो सच्ची हकदार है. मजाक उडाकर उनकी भावनाओं को ठेस पहुंचाना किसी भी तरह से सही नही है.इसलिए फिलहाल ब्लाक करने का आईडिया ड्राप !

बहुत साधारण से शब्द है… आई लव यू. इन तीन शब्दो मे पूरी दुनिया समाई है. पर हम अक्सर बोलने मे बहुत कंजूसी दिखाते है . मै समझ गई आप यही सोच रहे है ना कि हम कंजूसी कहां दिखाते है बहुत इस्तेमाल करते है इन शब्दो का. हां, आप भी ठीक ही कह रहे है. अक्सर लडका लडकी से, आफिस का बास अपने सेकेटरी से या कोई पडोसन अपने पडोसी से वगैरहा वगैरहा.. !!

पर क्या आपने सुना है कि कोई पति अपनी  पत्नी से कहें..आई लव यू !!! अरे ये क्या .. आपने गर्दन क्यो हिला दी. अब क्या हुआ. आप यही सोच रहे है ना कि इसमे कहने की क्या बात है जब शादी  हुई है तो इस दिखावे का क्या अर्थ है.

हुंह ..!! पर बस यही तो बात है.!!

कुछ दिन पहले हमारी दूर की  जानकारी मे किसी की पत्नी का देहांत हो गया. जब भी वो हमारे घर आते अपनी पत्नी का बहुत मजाक बनाते पता नही कितने अजीबो गरीब नामो से उसे सम्बोधित करते.कई बार तो उनकी पत्नी का चेहरा भी तमतमा जाता पर मैने कभी उन्हे कुछ बोलते नही सुना. एक साधारण पत्नी की तरह वो मात्र मुस्कुरा कर रह जाती.

जब उनकी पत्नी का देहांत हुआ तो सभी ने यही कहा कि अब आपकी जिंदगी मे कुछ नही रह गया. सूनी हो गई आपकी जिंदगी. वो भी ऐसे मासूम बने बैठे थे मानो बहुत क्षति हो गई हो.अरे भई !!!

अब यह उदासी क्यो. जब वो जिंदा थी तब तो आपने कभी कद्र नही की. घंटो घंटो घर से बाहर रहा करते थे.कभी उसकी तबियत की, कभी उसका हाल चाल जानने की कोशिश नही की तो फिर अब इतनी रोनी सूरत किसलिए बना रखी है.दिखावा किसलिए किया जा रहा है.

आई लव यू- पति और पत्नी का प्यार

आई लव यू- पति और पत्नी का प्यार

वही दूसरी ओर किसी भी पार्टी मे देखिए … सब  पत्नी पर ही जोक करते हैं उन्हे बास,होम मिनीस्टर और भी ना जाने क्या क्या पदवी से नवाजते है.पत्नियां अपने अलग अलग उपनाम सुनकर कर भले ही वो मुस्कुरा दे पर अंदर अदर बहुत दुख होता है.

ऐसी बात मैने एक रिसर्च करने के बाद महसूस की. अलग अलग उम्र के अनेको पति और पत्नियो से  बात की और पतियो ने भी यह माना कि  अक्सर वो कुछ ज्यादा ही बोल जाते है पर यह भी एक तरह का प्यार ही है हां हो सकता है कई बार वो ज्यादा बोल जाते हों जोकि शायद उन्हे नही बोलना चाहिए.पत्नियो ने भी अपना आक्रोश जाहिर किया और कहा कि इस तरह की बात पर भी चर्चा होनी चाहिए कि किस बात के लिए उनका मजाक बनाया जाता है.

एक ग्रहणी तो बात करते करते रो ही पडी उसने बताया कि वो सारा काम अपनी तरफ से पूरी  मेहनत से करती है पर पता नही किसलिए हर समय उस पर व्यंग्य कसे जाते है बात बात मे दूसरो से तुलना की जाती है किसी अन्य का उदाहरण दिया जाता है .. कई बार तो खुद पर इतनी शर्म आती है कि लगता है कि मर ही जाउं और कह कर फफक कर रो पडी. वही एक अन्य पत्नी ने बताया कि पहले उसे बहुत बुरा लगता था पर अब वो भी बराबर का अपने पति का मजाक  उडाने लगी तो उन्हे इतना बुरा लगा कि अब तो उससे तालाक लेने का मन बना रहे हैं.!! लो कर लो बात !! पति पत्नी में अनबन

वाकई मे, यह बहुत गम्भीर विषय है. हंसना, बात करना अलग बात है पर बात इतनी बढ जाए कि आप बिना किसी की भावनाओ की परवाह किए बात बात पर मजाक ही  उडाए जाए. ये सही नही है.मजाक एक सीमा तक ही अच्छा लगता है इस बात का हमेशा सभी को  ख्याल रखना चाहिए !!

आई लव यू- पति और पत्नी का प्यार

आई लव यू- पति और पत्नी का प्यार

पति पत्नी का रिश्ता बहुत नाजुक होता है इसलिए बहुत जरुरी है कि इसे सहेज कर प्यार से रखा जाए.समय समय पर जताए कि आपको उनकी कितनी फिक्र है. आप उनसे प्यार करते हैं.और उनकी भावनाओ को समझकर खास तौर पर दूसरो के सामने मजाक ना बनाया जाए!!

अपवाद हर क्षेत्र मे होते हैं. वैसे देखा जाए तो मजाक महिलाए भी कर सकती है पर वो जानती है कि किन किन  बातो से दुख होता है और क्या चीज बुरी लगती है इसलिए वो ऐसा मजाक बनाना ही नही चाहती और ऐसी बात भी नही है कि सभी पति ऐसे ही होते है पर अक्सर उनका कहना यही होता है कि क्या करें बस मित्र मंडली मे बैठे थे बस इसलिए बात चल पडी नही तो ऐसी मंशा नही थी उनकी …!!!

तो फिर क्या सोचा आपने!! तो कह रहे है ना आप अपनी जीवन साथी से कि “आई ….. “!!!

आई लव यू- पति और पत्नी का प्यार

आई लव यू- पति और पत्नी का प्यार

वैसे आप तो महिलाओं का मजाक नही उडाते होंगें अगर ऐसा है तो जरा नही बहुत सोचिए अन्यथा… !!!

 

Photo by Alexandre Moreau | Photography

January 24, 2016 By Monica Gupta Leave a Comment

Bravery Awards and speech of Modi ji

Bravery Awards and speech of Modi ji

Bravery Awards and speech of Modi ji

Republic Day गणतंत्र दिवस से पहले आज, मोदी जी ने  25 बहादुर बच्चों को वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया. ये सभी बच्चे गणतंत्र दिवस की परेड में शामिल होंगें.

मुझे गणतंत्र दिवस दो वजह से बेहद अच्छा लगता है एक तो  26 जनवरी को हमारे देश की झांकिया  दिखाई जाती हैं जोकि एक शानदार अनुभव होता है और दूसरा वीर बहादुर सम्मानित बच्चे… इन्हें देख कर न सिर्फ खुशी मिलती है बल्कि गर्व का अहसास होता है.  अक्सर यही दिन होता है जब एक बहुत पुरानी घटना मेरे दिमाग में घूम जाती है.

mqdefault ( तस्वीर गूगल सर्च से साभार )

बात सन 73 की हरियाणा के जीन्द की है. तब पापा की पोस्टिंग वहां थी और घर के पीछे रेस्ट हाऊस था. तब मैं पांचवी क्लास में थी. शाम को हमेशा की तरह हम रेस्ट हाऊस खेलने गए हुए थे. पार्क के बीचों बीच पानी का छोटा सा तालाब सा बना रखा था. हम खेल ही रहे थे कि अचानक आवाज आई बचाओ वो पानी में गिर गई. हमारे पडोस में रहने वाली लडकी  खेलते हुए पानी में गिर गई थी. हम सभी भागे मुझे पता नही क्या हुआ कि मैने हाथ लम्बा करके उसे हाथ पकडने का इशारा किया और जितना दूर तक अपने आप को खींच सकती थी लम्बा किया और उस लडकी को खींच लिया और पानी से बाहर निकाल कर उसे घास पर लिटा दिया और पता नही कैसे जाने अनजाने उसका पेट भी दबा दिया उसका सारा पानी निकल गया और वो खांसी करने लगी..

जो अभी तक माहौल में एक दम शांत था  अचानक उसकी खांसी से खिल उठा और सब खुशी से  चिल्लाने लगे चोची बच गई … बच गई… !!! हम उसे घर तक छोडने गए और सारे रास्ते बच्चे नारे लगाते गए मोनिका ने बचा लिया मोनिका ने बचा लिया. उसके पापा तिवारी अंकल को सारी बात बताई तो  बेहद खुश हुए और मुझे शाबाशी भी दी.

उस दिन के बाद बहुत सालों को मैने इस बात को याद रखा और सभी को बताती कि मैने  कैसे एक लडकी की जान बचाई थी.  तभी कुछ साल पहले वही तिवारी अंकल मुझे किसी जानकार के घर मिले. मैं शायद नही पहचान पाई पर उन्होने पहचान लिया और बताया कि जिसकी तुमने जान बचाई थी आजकल वो चंडीगढ हाईकोर्ट मे प्रैक्टिस कर रही है.

वही सारी बातें मेरे दिमाग में धूमने लगी कि मैने कैसे उसकी जान बचाई थी और फिर मैं इस बात के उदाहरण देने लगी और कई बार सोचती कि अब मैं  और ऐसा क्या करुं जो किसी की जान बचाऊं या मदद कर पाऊं… पर कुछ समझ नही आ रहा था..पर इतना पक्का था कि कुछ न कुछ करना जरुर है…

और तब कुछ दिनों बाद रक्तदान के क्षेत्र में काम कर रही संस्था आईएसबीटीआई से जुडी और मुझे एक शानदार मकसद मिला और वो मकसद था रक्तदान से किसी की जान बचाना … बेशक, किन्हीं कारणों से मैं रक्तदान नही कर पाई पर संजय जी ने मुझे मोटिवेट किया कि कोई बात नही लोगों को रक्तदान के प्रति जागरुक करों यही बहुत बडी बात है फिर मेरे पास एक दिन फेसबुक पर मैसेज आया कि किसी दिल्ली में एक बच्ची के दिल का आपरेशन है उसे रक्त चाहिए.

मैने इस बात को गम्भीरता से लिया और बहुत जगह फोन घुमाए और आखिर बच्ची के लिए रक्त का इंतजाम हो गया. वो पहला केस था जब मैने किसी की जान बचाने मे मदद की उस दिन के बाद से मैने धीरे धीरे नेटवर्क तैयार किया और फेसबुक और अन्य माध्यमों से जागरुक रक्तदाताओं से जुडने लगी और आज की तारीख में  पंजाब, राजस्थान महाराष्ट्र,हरियाणा, दिल्ली, गुजरात बहुत अच्छा नेट वर्क बहुत अच्छे लोग मिलें जिन तक मैं रक्तदान की जरुरत का संदेश पंहुचा देती हूं और मरीज की जान बच जाती है. अभी तक ईश्वर का आर्शीवाद रहा कि ऐसा कोई केस नही हुआ जहां मरीज की जिंदगी को कोई खतरा हुआ हो.

आज मोदी जी अपने भाषण में यही कुछ कह रहे थे कि एक बार जान बचाने का यह अर्थ नही कि बस हो गया हमें निरंतर कुछ न कुछ करते रहना है और मेरा प्रयास यही है कि मैं निरंतर कुछ न कुछ करती ही रहूंगी क्योकि अभी भी इस क्षेत्र में जागरुकता का बहुत अभाव है और भ्रांतियां भी बहुत हैं जिन्हे दूर करना बेहद जरुरी है…

सफर जारी है … प्रयास जारी है … और मैं मोदी जी का भाषण सुनने लगी…

Bravery Awards and speech of Modi ji

( तस्वीर गूगल सर्च से साभार )

January 24, 2016 By Monica Gupta 5 Comments

My Experience and Blogging

बच्चों की मनोरंजक कहानी – चॉकलेट की बेटी

My Experience and Blogging –  खासतौर पर लेखकों के लिए लेख – ब्लॉग क्यों जरुरी है…  आज जब हमारे सामने लेखन कौशल दिखाने के लिए इतना विशाल क्षेत्र है तो हमें जरुर कुछ लिखते रहना चाहिए …

My Experience and Blogging

कल एक जानकार parents अपने बच्चे को लेकर आए …वो 5 क्लास मे है उन्होने दिखाया कि उनके बच्चे ने दो कविताएं लिखी हैं कैसी हैं… मैने पढी. वाकई बच्चे के हिसाब से बहुत ही अच्छी लिखी थी तभी parents ने पूछा कि आप कितने साल से लिख रही हो ……मैने कहा कि officially 27 साल से और unofficially 37साल से … उन्हें समझ नही आया तब मैने जो उन्हें बताया आपसे भी share कर रही हूं

 

पहले समय में लोगों के पास घडी नही हुआ करती थी पर उनके पास समय ही समय था और…. आज…. घडी हर किसी के पास है पर समय नही … ऐसी busy लाईफ में आपने अपना कीमती समय  मेरे ब्लॉग को पढने के लिए निकाला  जिसके लिए मैं आपका  बहुत सारा thanks और स्वागत करती हूं…

My Experience and Blogging

My Experience and Blogging

वाकई, जिंदगी का एक एक पल बहुत कीमती होता है. जहां हम एक एक मिनट का हिसाब रखते हो ऐसे में दस साल पीछे रह जाना…. बहुत बहुत मायने रखता है…. जी हां दस साल पीछे  !! पर ये सच्चाई है…. एक कडवी सच्चाई जिससे मुझे दो चार होना पडा… और मैं जिंदगी की रेस में  दस  साल पीछे रह गई.  इस बात का दुख मुझे हमेशा रहेगा कि Writing  का 36- 37 साल का Experience  होते हुए भी मुझे आज 27 साल का Experience लिखना पडता है जिसका कारण है उन दिनों नए writers  के लिए कोई  platform  न होना या फिर lack of information  यानि मुझे जानकारी का अभाव होना.

बात उन दिनों  की है जब मैं स्कूल में थी और stories  पढना और लिखना बहुत अच्छा लगता था. लोटपोट और चंपक तो इतनी अच्छी लगती थी कि अगर मैं स्कूल जाने को तैयार होती और अखबार वाला मैगजीन दे जाता तो अचानक मेरे पेट में दर्द हो जाता. झूठमूठ का. स्कूल जाने से छुट्टी तो मिल जाती पर मम्मी से डांट भी पडती. कई बार तो मम्मी गुस्से में मुझे अलमारी के उपर ही बैठा देती पर मेरा ध्यान मैगजीन में ही रहता और मैं मम्मी को बोलती कि यहां मैगजीन भी पकडा दो और वहां आराम से मैगजीन पढती और उसे पढने के बाद नीचे कैसे आया जाए उसका बहाना सोचती.

कुल मिला कर story books पढने का बहुत शौक था  हमारे सिलेबस में english और हिंदी में  भी stories हुआ करती थी और तब मैं हमेशा सोचती कि अगर मुझे कहानी लिखनी होती तो मैं ऐसे लिखती कहानी वैसे लिखती.

ढेरों thoughts  मन में आते रहते जिंन्हे मेरा बालमन कभी कापी के आखिरी पन्ने पर, तो कभी रफ कापी पर लिख लेता पर जरा भी समझ नही थी कि कहानी प्रकाशित होने के लिए क्या करना चाहिए कहां भेजनी चाहिए किस तरह से करना चाहिए. हंसी आती है आज भी ये सोच कर जब मैं अपनी लिखी कहानी कई बार पोस्टकार्ड पर भी भेज देती थी.

My Experience and Blogging

My Experience and Blogging

कुल मिलाकर 1975 से 85 के दशक में मुझे कोई भी सशक्त मंच नही मिला और मेरा लेखन बस मुझ तक ही सीमित रह गया. अपनी समझ के अनुसार  रचनाएं लिखकर प्रकाशन के लिए भेजती रही पर ना किसी रचना को सम्भाला और न किसी का कोई रिकार्ड रखा और बस देखते ही देखते दिन, महीने और फिर साल गुजरते रहे. मेरी writing को कही कोई मौका नही मिला.

बहुत साल बाद 89 में अचानक, लोकल न्यूज पेपर में मेरी कहानी का छपना मेरे जिंदगी का mile stone था. मुझे नई दिशा मिली और फिर लेखनी चलती ही रही….

 

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अब… आपके मन में ये बात जरुर आ रही होगी कि ये सारी बात मैं आपसे किसलिए शेयर कर रही हूं. बात शेयर करने का एक बहुत बडा कारण है और वो है इंटरनेट….. एक समय था जब अपनी बात रखने के लिए कोई platform  नही हुआ करता था फिर आया इंटरनेट का जमाना …  और इसने अपनी ओर आकर्षित करना शुरु किया. नेट जहां मनोरंजन का साधन बना वही  ब्लाग अपना नाम अपनी पहचान और शौहरत पाने का एक सशक्त माध्यम बन कर उभरा.

blog photo

वैसे, पहले मुझे भी जानकारी नही थी कि ब्लाग है क्या ?? मैं भी कभी फेसबुक, कभी गूगल, कभी किसी की प्रोफाईल पर कमेंट कर दिया तो कभी किसी को हैप्पी बर्थ डे लिख दिया बस धंटों नेट पर यही करती रहती. जब blog का नाम सुना तब ज्यादा जानने की इच्छा हुई कि ब्लाग है क्या !!!

सर्च करना शुरु कर दिया. बहुत सर्च करने के बाद जब blog की  importance और इसके ढेरों  benefits  का पता चला तो मैं हैरान  ही रह गई और बिना समय एक पल गवाएं मैने नवम्बर 2012 में ब्लाग बना लिया. आज जो आप ब्लॉग पढ रहे हैं इसमें मेरी हजार से ज्यादा पोस्ट publish हो चुकी हैं जिसमे cartoons, कहानी, कविता, Zee news खबरे,  Social Work,अनुभव, Videoवीडियों, ऑडियों  Audio,समाचार पत्रों में प्रकाशित news paper cuttings आदि सब  इसमें शामिल हैं.

Blogging एक ऐसा सशक्त माध्यम बन कर उभरा है जिसमें हम अपनी कला को न सिर्फ सहेज कर रख सकते हैं बल्कि अपनी knowledge और Experince  पूरी दुनिया के साथ शेयर कर सकतें हैं

काश….. net की….. blog की सुविधा  70 टीज  80 मे होती तो शायद आज मैं भी यह कह सकती कि मेरे लेखन का 35 -36 साल का अनुभव है लेकिन ऐसा हुआ नही और, इसकी वजह से मैं, दस मिनट नही….. दस हफ्ते नही…….यहां तक की दस महीने भी नही बल्कि दस साल पूरे दस साल पीछे हूं और हमेशा रहूंगी….!!!

मुझे मालूम है कि ये सिर्फ मेरे साथ ही नही बल्कि मेरे जैसे कितने उदाहरण होंगें जो सिर्फ जानकारी की कमी की वजह से अपने सपनों को साकार नही कर पा रहे होंगें.

क्योकि कुछ कर दिखाने का talent तो हर किसी मे होता है…. talent आप मे भी है भले ही आप इस बात को न माने….. अब देखिए …मेरी एक friend खाना बहुत अच्छा बनाती है वो उसका टेलेंट हैं मेरी एक जानकार अम्मा जी के पास कहानियों का,प्रेरक प्रसंगों का खजाना है ये उनका टेलेंट हैं.. रश्मि आफिस में काम करती है पर अपने बच्चों की देखभाल पेरेंटिंग  के लिए पूरा समय निकालती है ये उसका टेलेंट है.

एक अन्य जानकार रीतू ने blog बनाने की इच्छा जाहिर की पर उन्होनें यह भी बताया कि किसी भी तरह का टेंलंट तो उनके पास नही है पर बस कुछ करना चाहती है और यह बात उन्होनें जिस आत्मविश्वास के साथ कही  मेरे विचार से अपने भीतर इच्छा शक्ति का होना ही सबसे बडा टेलेंट हैं इससे बढकर और क्या टेलेंट होगा मेरे विचार से आप भी मेरी इस बात से सहमत होंगें.

वही दीपक का maths बहुत अच्छा है ये उसका टेलेंट है. शबनम का बहुत छोटा सा किचन गार्डन है जिसमे उसने इतनी सब्जियां लगाई हुई हैं कि पूरे साल बाजार से नही खरीदती. कनु फिटनेस , diet  का बहुत ख्याल रखती हैं और क्या खाना चाहिए क्या नही…. उसे सब पता है उसके परिवार में आज तक कोई भी बीमार नही पडा अब आप इसे क्या कहेंगें …. भई मेरे पास तो ऐसा हुनर नही है हम तो अंट शंट खाते भी खूब है और अपने बढते वजन से परेशान भी रहते हैं.

वही गोल्ड मैडेलिस्ट स्नेहा ने एम.ए एम फिल की हुई है उसकी पूरी अलमारी मैडल और ट्राफी से भरी हुई है पर शादी होने के बाद बस घर सम्भाल रही है मन तो करता है कुछ काम करने का…. पर नौकरी की इजाजत नही है… सारा दिन कभी किसी से गप्पे मारना, कभी शापिंग, कभी फेसबुक तो  कभी टवीटर पर घंटों समय बीता रही है जबकि वो घर बैठे ही blog  आय का साधन बना सकती है… क्योकि ब्लागिंग को ना सिर्फ लोग करियर बनाने लगें हैं बल्कि ये इंकम जरनेट करने का भी एक बहुत अच्छा सोर्स बन चुका है…पर बात फिर  वही …जानकारी के अभाव की आती है…. स्नेहा को पता ही नही कि जो टाईम वो सिर्फ पास कर रही है उसका कितना सही utilize हो सकता है.

हैरानी है कि Facebook, गूगल Google plus, टवीटर की तो हमे जानकारी है पर blog क्या है…. इसके क्या benefits  हैं इसकी जरा भी जानकारी नही… हम जानते ही नही है कि ब्लागिंग हमारी जिंदगी को बदल सकता है… नई पहचान देकर हमें बुलंदियों तक ले जा सकता है.

कुछ दिनों से यही बात मन में चल रही थी सोच रही थी कि क्यूं मैं दस साल पीछे रह गई … क्यों मुझे किसी बात की जानकारी नही मिली… फिर सोचा कि मन उदास करके या दुखी रह कर वो बीता समय तो वापिस नही लाया जा सकता तो क्यो ना मैं नेट के माध्यम से अपनी बात share  करुं और आप सभी को blog की सारी जानकारी विस्तार से दूं. मेरे बीते दस सालो की तो भरपाई कभी हो ही नही पाएगी पर…. आपको…. जानकारी के अभाव में पीछे नही रहने दूंगी.

जिंदगी बेहद कीमती है और इसका पल पल मायने रखता है. इसलिए आप भी अपने भीतर दबी इच्छाओं को…. अपनी क्षमताओं को बाहर निकाले और ब्लाग बना कर उसे नया आसमान दें.

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और खासतौर पर महिलाएं… प्लीज…. अपने आप को किसी से कम नही समझिए और ये भी नही सोचिए कि अब तो बच्चें बडे हो गए अब क्या करना… बस ठीक है कट रही है जिंदगी…जो जैसा चल रहा है…यही चलता रहेगा… पर अब समय आ गया है कि आप अपनी सोच बदले और नए जमाने के साथ कदम मिलाकर चले….   आप सोच भी नही सकतीं  कि आपके अनुभव, आपके ज्ञान से से ना सिर्फ किसी को प्रेरणा मिल सकती है बल्कि किसी की जिंदगी में बदलाव भी आ सकता है… और आपको जो नई दिशा के साथ साथ भरपूर मनोबल मिलेगा उसकी तो आपने कल्पना भी नही कर सकती.

और अगर आप लेखक हैं तो फायदे ही फायदे हैं. सम्पादक की तरफ से रचना का धन्यवाद सहित वापिस आना कितना कष्टदायी और दुखदाई होता है मेरे से बेहतर और कौन जान सकता है…. कल ही मेरी कहानी सरिता पत्रिका से धन्यवाद सहित वापिस आई है …  कल्पना कीजिए कि अगर रचनाए ऐसे ही वापिस आती रहती तो शायद लिखने का हौंसला भी टूट जाता .. अब रचना धन्यवाद सहित अगर वापिस आती है तो ब्लॉग जिंदाबाद…!!!

अगर हम ब्लाग पर लिख कर अपनी रचनाए डालते रहेंगें तो न सिर्फ हमारा मनोबल बढेगा बल्कि लेखन में भी सुधार होता जाएगा हमें हमारी कमियां पता चलती रहेंगीं और एक ना एक दिन  हमारे ब्लाग को देख कर हमारे लेखन को देख कर सम्पादक खुद ही हमारे लेख लेना चाहेंगें…

 

blog photo

बातें तो बहुत हैं बताने को पर समय को ध्यान मे रखते हुए मैं बस इतना ही कहना चाहूगी कि ये तो है मेरा अनुभव जो मैने आपसे शेयर किया…इतनी बाते आपसे शेयर करने का बस एक ही कारण है कि मैं आपको प्रेरित करती रहू… टोकती रहूं ताकि आप बैठे न रहें कुछ करें.

वो कहते भी है न कि

काम करो ऐसा कि पहचान बन जाए ,
हर कदम चलो ऐसा कि निशान बन जाए ,
जिँदगी तो सभी… जिँदगी तो सभी …..काट लेते है यहाँ
जिँदगी जियो ऐसे कि मिसाल बन जाए

दस साल पीछे रहने का दर्द जो मैने झेला है उससे आपको बिल्कुल नही गुजरने दूंगी ……. आप अपने भीतर टटोलिए तो सही…अपनी क्षमताओं को पहचान तो दीजिए…

Blogging Tips in Hindi

मंजिल मिले या न मिले ये तो अलग बात है हम कोशिश भी न करें ये तो गलत बात है…

तो अगर आपके मन में…. अभी कुछ बातें चल रही हो… और आप जानना चाहते हैं तो मुझसे कभी भी सम्पर्क करके जानकारी ले सकते हैं या  SetUpMyBlog  पर क्लिक कर सकते हैं

अगली मुलाकात में….. ब्लॉग के बारे में ढेर सारी जानकारी होगी …

तब तक के लिए…  बिना time waste किए जुट जाईए अपनी खूबियों को पहचानने में..  😎

मोनिका गुप्ता

मोनिका गुप्ता

 

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