Monica Gupta

Writer, Author, Cartoonist, Social Worker, Blogger and a renowned YouTuber

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December 22, 2017 By Monica Gupta Leave a Comment

Stress Free Holidays – कैसे मनाएँ stress free Christmas – तनाव रहित छुट्टियां – Monica Gupta

Stress Free Holidays

Stress Free Holidays – कैसे मनाएँ stress free Christmas – तनाव रहित छुट्टियां – Monica Gupta – मेरी एक सहेली अमेरिका रहती है… मैंनें उसे फोन किया क्योकि Christmas आ रही है और वहां छुट्टियां भी हैं खूब हल्ला गुल्ला होगा.. पर फोन नो रिप्लाई रहा… फिर फोन किया फिर नो रिप्लाई था… तो यही सोचा कि बिजी होगी… तभी आज फोन आया तो मैं तो अपनी excitement मे बात कर रही थी पर उसकी आवाज बहुत चुप और सुस्त… पूछना स्वाभाविक था कि अरे भई क्या हुआ … सब ठीक तो है.. बोली कि हां .. तो फिर मैंनें पूछा तो बोली कुछ नही बस स्ट्रेस है… किस बात का तो वो बोली की Christmas है.. शापिंग है, बच्चों को बाहर धुमाने ले जाना है …फिर गिफ्टस भी देने हैं… पार्टी होगी, मेहमान आएगें  इन्हीं बातों का तनाव हो रहा है…

Stress Free Holidays – कैसे मनाएँ stress free Christmas – तनाव रहित छुट्टियां

खैर, उससे बात करके फोन तो रख दिया पर सोचने लगी कि हमारे यहां भी जब कोई त्योहार आता है छुट्टियां होती हैं तो ऐसा ही तनाव रहता है कि क्या क्या खरीददारी करें… क्या क्या उपहार एक दूसरे को दें और बच्चों को कहां धुमाने ले जाएं…

 

वहां तो Christmas बहुत धूमधाम से मनाया जाता है इसलिए शायद तनाव ज्यादा होना स्वाभाविक है वैसे जब मैंने ये पढा कि 62% लोग बच्चे या बडे इस तनाव से गुजरते हैं इस दौरान … बहुत हैरानी हुई

छुट्टियां यानि मौज मस्ती.. उसमे तनाव न आए पर हमारी छुट्टियां स्ट्रेस फ्री बनें उसके लिए कुछ बातों का ख्याल हम सभी को रखना चाहिए

बजट बना लेना चाहिए...  पहले पति पत्नी को फिर बच्चों को बता देना चाहिए कि इस बार इतना बजट है… और इस बजट में अच्छे से अच्छा करेंगें… parents  कहते हैं यहां जाएगे पर जाते नही

Focus on what’s most important. एक लिस्ट बना ली जाए और जिस की सबसे ज्यादा जरुरत है उसे ही अहमियत दी जाए…

दिखावा न करे . Be satisfied  हमारे पास जो है.. बहुत है… कई बार बजट नही होता और महंगे महंगे उपहार ले आते हैं… या जैसे अगर मान लीजिए क्रिसमिस है तो बहुत बडा क्रिसमिस ट्री न लगाएं क्योकि जितना बडा ट्री उतनी ज्यादा सजावट होगी…

उपहार पहले ही पैक करके नाम लिख कर रख देने चाहिए ताकि जिस समय देने हो दिक्कत न आए …

कुछ गिफ्ट एक्स्ट्रा भी खरीद कर रख लेने चाहिए कई बार कोई मेहमान ज्यादा आ गए तो बुरा न लगे.. ये सब स्ट्रेस से बचने के उपाय हैं..

कहीं बाहर जाना है तो उसकी पैकिंग भी पहले ही करके रख ली जाए .. और बहुत हल्की कम सामान हो ताकि आप जहां जा रहे हैं वहां एंजाय कर सकें

और अगर घर पर मेहमान आ रहे हैं तो पहले ही एक कमरा उनके लिए तैयार कर लिया जाए ताकि आपके साथ कोई सामान या चीजे मिक्स न हों.. या अलमारी उनके लिए कि वो उसमे अपना सामान रख सके..

हैल्पर

अगर घर पर काम ज्यादा होने वाला हो तो पहले से ही एक का अरेंज कर लीजिए और अगर वो नही है तो परिवार को पहले ही बोल दीजिए कि मुझे हैल्प चाहिए .. छोटे छोटे काम में मदद करवानी हैं..

जो डेली रुटीन है उससे हट कर अपनी फैमली को पूरा समय दे…

उनसे बात करना मिलकर खाना खाना और मिलकर बातें करना… एक बहुत अच्छा मौका होता है.. एक दूसरे को समझने का और आपसी प्यार बढाने का मिलजुल कर प्यार से मनाएंगे तो अच्छा है वरना एक बार किसी का भी मूड खराब हो गया तो सारी छुट्टिया वेस्ट समझो..

शांत रहे और कैरी ऑन

मैरी क्रिसमस

Stress Free Holidays – कैसे मनाएँ stress free Christmas – तनाव रहित छुट्टियां – Monica Gupta

December 21, 2017 By Monica Gupta Leave a Comment

How To be Happy In Old Age – बड़े बुजुर्ग सदा खुश कैसे रहें

How to be Happy in Old Age

How To be Happy In Old Age – बड़े बुजुर्ग सदा खुश कैसे रहें  –  समय के साथ बदलना क्या समझदारी है ?? हैं या नही .. यकीनन आपका जवाब होगा कि हां, पर कुछ लोग खासकर हमारे बड़े बुजुर्ग बदलना नही चाहते और इस वजह से रिश्ते भी खराब हो जाते हैं और एक पीढी का गेप आ जाता है… बहुत लोगो का मानना होता है कि कई बार बडे लोग थोडे अडियल हो जाते हैं और बदलना नही चाहते… पर जरुरी है बदलते समय के साथ खुद बदलना … बदलाव लाना सभी के लिए अच्छा है…  बडे लोग बडे लोग

चलिए आज बडे लोगो से ही बात करते हैं… कि अगर बड़े बुजुर्ग अपने अंदर बदलाव लाएंगें तो कितना अच्छा महसूस होगा…

How To be Happy In Old Age – बड़े बुजुर्ग सदा खुश कैसे रहें

पहली बात तो किसी बात पर Stuck नही हो जाईए

मैं आज के समय की ही बात करती हूं कि आजकल बच्चों और बडो को नेट का बहुत शौक है और कुछ बुजुर्ग .. अरे क्या बेकार की चीज है… फालतू है .. इसलिए खुद भी नही करते … बहुत समय पहले की बात है जब बैंक में कम्प्यूटर जरुरी हो गया था तो एक जानकार ने नौकरी ही छोड दी कि मुझसे ये चोंचले नही होते…

 

और अगर मैं  बुजुर्ग  महिलाओं  की बात करु तो ज्यादा झगडे किस बात पर होते हैं बहू सिर नही ढकती या साड़ी ही पहननी है … बहुत बार लडाई का कारण बनता है… और अगर अडिग नही होंगे थोडा छूट रखेंगें कि कोई बात नही …

थोडा बहुत सीख लेता हूं कम्प्यूटर और क्या हो गया कि बहू ने सूट पहन लिया …  तो Stuck नही होंगे तो रिश्ते सही रहेंगें…

उन बातों का सोचना बंद कर दीजिए जो आपके हाथ मे ही नही..

अब सरकार किसकी बन रही है… या महंगाई हो गई या पैट्रोल का रेट कहां जाएगा.. इन बातों को सोच सोच कर तनाव किसलिए लेना है ये हमारे हाथ मे है ही नही… तो चीजे हमारे बस में नही सोचना बंद कर दीजिए..  अपनी उम्र का हवाला देना कि अब मैं बूढी हो रही हूं क्या होगा… ये सोच बंद करके अच्छी तरह कैसे बिताएं ये सोचिए

Criticize करना शिकायत करना बंद कर दीजिए.. Criticism  आधे से ज्यादा लडाई झगडो में सुधार आ जाएगा जब हम…

कुछ नही रखा इन बातों में.. इससे रिश्ते खराब होते हैं और दूरिया भी बढती हैं…  जहां दो बडी लेडीज बैठी तो बस इधर उधर की करना… किसी की शादी किसी के बच्चे, मेरे बच्चे, मेरा लडका… बस यही तो इसे करना बंद कर देंगें तो बहुत फर्क पड जाएगा…

हमेशा कुछ भी सीखने को तैयार रहिए…

अब नई नई चीजे आ रही है तो हमें सीखना भी तो चाहिए.. जैसे मान लीजिए लिफ्ट है… डर लगता है एक बार खुद ओपरेट करके तो देखिए… और वटस अप है फेसबुक है.. क्या हुआ सीखना चाहिए … नौकरी छोड कर भी क्या फायदा हुआ कुछ नही … कोसना बंद कर दीजिए

Flexible रहना सीखना चाहिए…

हम सोचते हैं कि जैसा चलता आ रहा है चलता रहे पर हमें समय के साथ साथ  Flexible हो जाना चाहिए. अब जैसे हवा चलती है तो पेड की शाखाएं हिलने लगती है वो अडिग तो नही रहती कि नही हिलना.. और अगर अडिग रहेगी तो जल्द ही टूट जाएग़ी..

मेरी आंटी हैं उन्हें में बचपन से जानती हूं घर में प्याज भी नही आता बहुत सख्त थी इस मामले में कि नही आएगा खाना तो दूर की बात है पर  पर अब जब उनके बेटे की शादी हुई बहू आई और बच्चे हुए अब एक दिन मैं उनके घर गई तो वो खुद प्याज की परांठी बना रही थी.. बोली जब सभी को पसंद है तो क्या दिक्कत है… और उन्होनें मुझे भी खिलाई … बहुत ही अच्छा लगा…

बहस में नही पडना चाहिए..

बडे लोग बहुत अनुभवी होते हैं तो अपना बडप्पन दिखाना चाहिए… न कि व्यर्थ की बहस में पडना चाहिए आज का जो फैशन है कि क्या है ये कपडे “distressed jeans… whose various holes and patches somehow make them look chic  फटी जींस पहनना या महिलाओ का नौकरी पर जाना कि हमारे समय में तो ये नही होता था उन्हें घर से बाहर जाना ही नही चाहिए ज्यादा हवा लग गई है उन्हें… बेटा घर का काम कर रहा है बहू नौकरी पर जा रही है…

नेगेटिव लैंस हटा कर पोजीटिव रहना और सोचना चाहिए..

देखिए मैं तो एक बात जानती हूं कि जिंदगी में हम सभी ने बडे भी होना है  और बूढा भी…  जरुरत है मिलजुल कर रहने की…

एक कहानी सुनी थी कि एक गांव में आग लगी… सभी भाग गए बस दो लोग बचे रह गए एक अंधा और एक लग़ंडा.. तब लग़डे ने अंधे से कहा कि हम दोनो बच सकते है अगर तुम मुझे अपने कंधे पर बैठा को… अंधे मने लगंडे को कंधे पर बैठा लिया और दोनो बच गए… कहानी बहुत सार्थक संदेश देती है कि आज भी चारो तरफ आग लगी हुई है ईर्ष्या की अंशाति की, समाज बच सकता है

अगर अंधा लगडे को कंधे पर बैठा ले … अंधा कौन अंधी जवानी यानि यंग लोग और लग़डा बुढापा .. चरण हों युवक के और अनुभव की आख हो बुजुर्ग की हो तो समाज अशांति की आग से बच सकता है… तो मिलकर चलने की जरुरत है

जिंदगी इतनी भी complicated नही है…

How to be Happy in Old Age

December 19, 2017 By Monica Gupta Leave a Comment

How to Deal with an Angry Child – क्या करें जब बच्चे गुस्सा करें – Parenting Videos in Hindi

How to Deal with an Angry Child

How to Deal with an Angry Child – क्या करें जब बच्चे गुस्सा करें – Parenting Videos in Hindi – Anger यानि गुस्सा बहुत common emotion है अगर बच्चों की बात करें तो पेरेंटस तुरंत ये कह देते हैं बच्चों में बहुत गुस्सा भरा हुआ है… बच्चों का गुस्सा कैसे दूर करें.. बच्चे को कैसे सुधारें – पेरेंटिंग टिप्स – बच्चों की परवरिश – बच्चों की परवरिश कैसे करें – परवरिश के तरीके क्या होंं

How to Deal with an Angry Child – क्या करें जब बच्चे गुस्सा करें – Parenting Videos in Hindi

तो आज यही बात करते हैं बच्चों को जब गुस्सा आए तो क्या करना चाहिए ..

 

खुद को Calm रखना है

सबसे पहले तो अपना behavior देखना है ..खुद को शांत रखना है.. बच्चा बहुत गुस्सा कर रहा है हित कर रहा है चिल्ला रहा है तो पेरेंटस को शांत रहना है…

Vocabulary अच्छी रखनी है.. और अच्छे शब्दों का यूज करना है.. जैसाकि बच्चे को गुस्सा आया तो बडे चिल्ला पडते हैं देख रही हूं बहुत बत्तमीज हो गया है… पागल बना दिया तूने मुझे… ये नही बोलना ..

इसी बीच में खुद से ये जानना है कि गुस्सा आ किसलिए रहा है… या बात नही मानी गई या भूख लगी है या तबियत ठीक नही है इस वजह से चिडचिडा हो गया है.. कोई मेहमान तो ऐसा नही आ गया जिसकी वजह से वो बोर महसूस कर रहा है..

बात की गहराई तक जाना है फिर पूछना है कि क्या हुआ..

वैसे ज्यादातर तो पेरेंटस को पता ही होता है पर कई बार नही समझ आ रहा तो पूछ लीजिए… पुलिस या सीआईडी की तरह नही … बल्कि एक अच्छी मम्मी या पापा की तरह..

उसे अपने पास बुला कर हग देना है और प्यार से सिर पर हाथ फेरते हुए उससे पूछना है कि हुआ क्या है बताओ तो सही… इससे हमारी बच्चों के प्रति बोंडिग हार्मोंस बनते हैं और बच्चा स्ट्रेस फ़्री होता है.. ये बहुत जरुरी होता है..

अगर पेरेंटस की गलती है तो बच्चे को सॉरी बोल दीजिए… बच्चों के आगे झुक कर हम छोटे नही हो जाएगे.. बल्कि हमारा प्यार और बढेगा… हम पेरेंटस प्रोमिस करते हैं और पूरा नही करते… शाम को जल्दी आने की बात करते हैं और जल्दी नही आते तो बच्चा गुस्सा भी न करे क्या…

बच्चों का ध्यान बटांना है.. उसे बाहर ले जाईए जिस जगह वो है वहां से कही और .. कई बार environment. बदलने से बहुत फर्क पडता है.. उसके बहुत तरीके हैं…

अच्छा बच्चों को लालच भी नही देना चलो आप चाकलेट ले लो, चलो मार्किट से ये खरीद लाओ.. फिर तो बच्चे को समझ आ ही जाएगा कि ऐसा करने से उसे सब कुछ मिल जाएगा तो कई बार जानबूझ कर भी वो एक्टिंग करेगा..

अलग अलग गेम्स बना सकते हैं… जब बच्चे को गुस्सा आए और वो घर पर हो तो कुछ Activities करवा सकते हैं

एक बाक्स बना लीजिए उसका नाम एंगर बॉक्स दे दीजिए और उसमे कुछ मजेदार बाते लिख कर रखिए उसका यूज तभी करना है जब बच्चा गुस्सा हो… अपने बेस्ट फ्रेंड को फोन करो.. आपका सबसे अच्छा कार्टून कौन सा है वो किसलिए अच्छा लगता है…  शीशे मे खुद को देखो और स्माईल करो या खुद को देखते हुए दस तक गिनती करो.. पानी पी कर आओ..

कई पेरेंट्स गुब्बारा भी फुलाने को कहते हैं कि गुस्सा आ रहा है तो गुबारा फुलाओ अब गुस्सा गुब्बारे में चला गया अब या तो गुब्बारा फोड दो या आराम से हवा निकाल दो और गुस्सा ठीक हो जाएगा..

कुछ लोग कार्डस बना लेते हैं कि जब गुस्सा आ रहा हो एक कार्ड उठाओ उस पर कुछ भी मजेदार लिखा होगा…

कई बार कुछ पेरेंटस बच्चे को बोलते हैं कि कुछ भी लिखो या ड्राईंग करो और फिर जब हो जाती है तो उसे फाड दो…

Set a good example  role model प्रेरणास्रोत हमे खुद बनना है

बातें बहुत सारी हैं जरुरत इस बात की है कि Set a good example बच्चे को समझे और उसे समय दे पर सजा देना, गुस्सा करना, या टीवी बंद कर देना कि आज से नही देखोगे यही सजा है…

How to Deal with an Angry Child – क्या करें जब बच्चे गुस्सा करें – Parenting Videos in Hindi

December 18, 2017 By Monica Gupta Leave a Comment

Benefits of Being Silent – चुप रहने के फायदे – Personal Development Videos in Hindi

Benefits of Being Silent

Benefits of Being Silent – चुप रहने के फायदे – Personal Development Videos in Hindi – मेरी एक सहेली के अंकल कुछ समय से बहुत बीमार चल रहे थे… कल जब मैं मिलने गई तो मेरी सहेली ने बताया कि अंकल की एक बार तो तबियत बहुत बिगड गई थी पर हमने किसी को कुछ नही बताया और अंकल को भी यही कहा कि आप जल्दी ठीक हो जाएगें.. और देखो अब recover भी कर रहे हैं अगर बता देते तो शायद डर कर ही… और वहीं रिश्तेदार भी… मैंने भी हामी भरी…

Benefits of Being Silent – चुप रहने के फायदे – Personal Development Videos in Hindi

वैसे सही बात है बहुत अच्छा किया… कई मामलो में चुप रहना बहुत ही अच्छा होता है.. अगर चुप रह कर न बोल उनकी सेहत मे सुधार होता है उनका मनोबल बना रहता है तो अच्छा है न चुप रहना…

वैसे चुप रहने के और भी बहुत फायदे हैं…

सबसे पहले तो लडाई झग़डे से बचेगें…

चुप रहेंगें तो बात नही बढेगी मान लीजिए दो लोगो की लडाई हो रही है और एक चुप हो जाए बोले ही नही ?? तो क्या होगा झगडे से बचेगें और हमारे सम्बंध अच्छे बनेगें बात बिगडेगी नही…… हमारी रिलेशनशिप मजबूत होती है.. लडेंगे तो सम्बंध हमेशा के लिए खराब ही हो जाएगें..

हमारी सेहत के लिए भी चुप रहना बहुत अच्छा है…

एक रिसर्च से भी बात सामने आई है कि चुप रह कर हमारा दिमाग कई गुणा बेहतर काम करता है.. और बोलने से हमारी एनर्जी कितनी वेस्ट होती है और हमारा ब्लड प्रैशर भी बड जाता है, धडकन तेज हो जाती है हम इन सबसे बचेंगें..

उसी के साथ साथ हमारी सुनने की आदत इम्प्रूव होगी…

हम जब बोलते हैं तो बोलते ही रहते हैं.. जबकि हमारी कम्यूनिकेशन स्किल में जरुरी होता है  सुनना… सुनना बहुत जरुरी होता है… तो हम सुनेगें भी तो दूसरे पर अच्छा असर होगा कि देखो ये मेरी बात बहुत ध्यान से सुनता है… लोग हमें पसद करेंगें.

हम अपने लक्ष्य को पा सकते हैं अपने सपने तक भी पहुंच सकते हैं..

ज्यादा बोल कर हम अपने लक्ष्य की ओर केंद्रित नही हो पाते कैसे ?? मेरी एक जानकार ने सभी को बोल दिया कि देख लेना मेरी बेटी तो डाक्टर बनेगी… उनकी बेटी जहां भी जाती सभी ये बोलते आ गई डाक्टर साहिबा… उस लडकी के मन में बहुत ज्यादा प्रैशर हो गया कि एग्जाम तो क्लीयर करना ही पडेगा अगर नही किया तो लोग क्या कहेंगें .. अब उसके मन में तनाव ज्यादा था और वो चाह कर भी कन्संट्रेट नही कर पाई और वो एग्जाम क्लीयर नही कर पाई और वही उसकी कजिन पास हो गई… उसने कोई हल्ला नही मचाया किसी को नही बताया तो अगर वो चुप ही रहती कुछ न बोलती तो शायद उनकी लडकी भी पास हो जाती … वो कहते भी है न मेहनत इतनी खामोशी से करो कि सफलता शोर मचा दे…

क्रिएट्विटी भी आती है चुप रह कर… मान लो कुछ समझ नही आ रहा तो बजाय इधर उधर बोलने के चुपचाप बैठ जाने से बहुत फर्क पडता है… .. जितना हम शांत होकर चुपचाप से अपने आप से बैठ कर सोचेगें उतने ही आईडियाज भी आएगें… और नए नए आईडिया भी आते हैं .. वो कहते भी हैं कि लीव मी एलोन..

समझदार भी बनते हैं…

देखिए अगर हम किसी से बहस किए जा रहे हैं चुप नही हो रहे हो क्या होगा मजाक का कारण बनेगें और बात भी खराब  होगी और वहीं अगर हम चुप हो जाएगें तो लोग यही कहेंगे कि अच्छा किया … कोई फायदा नही था बहस करने का .. और

चुप रहकर हमें सोचने का भी मौका मिलता है..

कई बार बेवजह हम बोले ही चले जाते हैं जबकि चुप रह कर हम खुद से आंकलन कर सकते हैं कि क्या सही क्या गलत था… smile और Silence  दो powerful tools है  Smile से बहुत problems solve हो जाती हैं और and  silence से बहुत problems को avoid  कर सकते हैं

Benefits of Being Silent – चुप रहने के फायदे – Personal Development Videos in Hindi

December 16, 2017 By Monica Gupta Leave a Comment

How to Get Motivated to be Healthy – कैसे रखें अपनी सेहत का ख्याल

How to Get Motivated to be Healthy

How to Get Motivated to be Healthy – कैसे रखें अपनी सेहत का ख्याल – बहुत मन करता है कि मैं भी फिट रहूं पर हो नही पाता… मैं फिट रहना चहती हूं पर पर पर जब खाने की बात आती है तो कंट्रोल नही होता…बहाने बनाना.. हम सभी फिट रहना चाह्ते है पर कितना भी कर ले रह नही पाते कोई न कोई बहाना सामने आ जाता है.. बस अगले महीने से, बस सर्दी निकल जाए, बस एक शादी निबट जाए ..

How to Get Motivated to be Healthy – कैसे रखें अपनी सेहत का ख्याल

मैंने मशीन भी खरीद कर रखी है पर अभी करना शुरु नही किया..

अगर आप भी ऐसा ही सोचते हैं तो बहुत सारी बातें ऐसी कर सकते हैं जिसे मन में रख कर हम खुद को मोटिवेट कर सकते हैं कि नही हमने फिट रहना है और बिल्कुल रहना है फिर किंतु परन्तु नही चलेगा..

तो क्या हैं वो बातें .. सबसे पहली तो ये बताईए कि आपको वाव और अमेजिंग शब्द कैसे लगते हैं .. अच्छे हैं न.. और अगर यही शब्द आपके ऊपर इस्तेमाल किए जाएं तो कैसा लगेगा… वाव .. आप तो एक दम फिट लग रहे हो अमेजिंग .. कैसे किया ये … तो ?? यही कोम्प्लीमेंत मिलने वाले हैं आपको…

इसके लिए आपको खुद से लडना होगा… लडना मतलब आपका मन बोलेगा बस आज नही कल से सैर शुरु करते हैं आज नही … तो उसे गुस्सा भी करना है और लडाई भी .. मैं कुछ नही सुनना चाहता … चलो उठो… बस … ब्लाब्ला

अपने आपको समझाना है कि जितना जरुरी कम है उतनी ही जरुरी सेहत है.. अगर सेहत ही सही नही होगी तो काम नही कर पाऊंगा इसलिए करना ही है

एक बात और कह कर मन को समझा सकते हैं कि बंद नही करना कुछ भी .. अक्सर ये सोच कर दर जाते हैं कि हमारा खाना पीना सब बंद हो जाएगा.. बस उबला ही खाना पडेगा… तो ऐसा नही है… हर रोज 5 किलोमीटर घूमना पडेगा… तो ऐसा नही है… आज दस मिनट फिर 15 मिनट .. बस ऐसे धीरे धीरे शुरु करना है… रही बात खाना छोडने की तो ऐसा भी नही है… कुछ नही छूटेगा

मन पक्का हो गया तो हम ये अकेले भी कर सकते है या दो चार दोस्त मिलकर भी शुरु कर सकते हैं… अगर हम अकेले हैं तो सुबह उठने का मन नही कर रहा तो नही उठते पर दोस्तों के जाना होग अतो बाहर खडे होकर आवाज ही लगाते रहेंगें जब तक हमा बाहर नही आ जाएगें फिर थोडी शर्म और थोडा काम्पीटीशन भी होता है कि देखो इसकी विल पार कितनी स्ट्रांग है … जो कहा वो कर के दिखाया…

एक आप कोंट्रेक्ट भी साईन कर सकते है इसे और मजेदार बनाने के लिए कि अगर 4 महीने में इतना कर दिखाया तो छुट्टियों में वहां चलेगें या .. ये करेंगें… कुछ भी ऐसा जिसकी आपको बहुत इच्छा हो..

वैसे एक बात और हो सकती है और वो ये कि आपको शोशल मीडिया का बहुत क्रेज होगा… होता ही है … तो आप अपना  चैलेंज सोशल मीडिया पर शेयर कीजिए कि दो या तीन महीने में तीन किलो वेट कम करके दिखाऊंगा.. नियमित धूमने जाऊंगा और हर रोज फोटो भी अपलोड करुंगा

और अगर इसे नही करना चाह्ते तो आप हर सुबह बाहर जाईए और उगते हुए सूरज की फोटो लीजिए और उसे डाल दीजिए .. इतना खूबसूरत नजारा.. आपकी सैर भी भी जाएगी और आपको कमेंट भी खूब मिलेगें

इसमे अपना सर्कल ऐसा रखना है जो पोजीटिव सोच के हो… आप सुस्त हो और दूसरा आपसे भी ज्यादा सुस्त .. आप उसे सुबह फोन करके बोलेगे कि चल उठ सुबह हो गई सैर करने चल .. वो बोले कि सो जा कल चलेगें…

सर्कल ऐसा हो जो आपको चीयर्स करे…

How to Get Motivated to be Healthy

कैसे रखें अपनी सेहत का ख्याल

December 15, 2017 By Monica Gupta Leave a Comment

How to Deal with Disrespectful Teenagers – क्या करें जब बच्चे respect ना करें – Monica Gupta

How to Deal with Disrespectful Teenagers

How to Deal with Disrespectful Teenagers – क्या करें जब बच्चे respect ना करें – Monica Gupta… आप मे जरा भी समझ नही है.. आप तो कुछ भी नही समझते ?? अरे ये मैं नही बोल रही … ये बात सुनने में आती है जब बच्चे थोडे बडे हो जाते हैं यानि टीन एज में आ जाते हैं और पेरेंट्स की टेंशन बहुत ज्यादा बढ जाती है कि इतना ख्याल रखते हैं इतना प्यार देते हैं और फिर भी … बच्चे अपने मम्मी  papa से ऐसा ट्रीट करते हैं ऐसा तो कोई अपने नौकर से भी नही करता…

How to Deal with Disrespectful Teenagers – क्या करें जब बच्चे respect ना करें

कल ही एक मैसेज आया उसमे एक मम्मी ने लिखा कि मुझे बताईए कि क्या करना चाहिए मेरी बेटी 14 साल की है ज्यादातर अपने कमरे में ही रहना पसंद करती है.. हमसे ज्यादा बात नही करती पर जब उसके दोस्त आ जाते हैं तो खूब अच्छे से हंस बोल कर बात  करती है… पर हमसे ना ज्यादा बात करती है और अगर बात करनी भी हो तो मुंह बन जाता है…

हम बहुत अच्छे पेरेट्स हैं और हर बात का ख्याल रखते हैं फिर बच्चे ऐसा किसलिए बिहेव करते हैं… इसका असर उसके छोटे भाई पर भी हो रहा है वो देख कर बिगड न जाए यही डर लगता है तो क्या करें…

ये प्रोब्लम तो घर घर की है… बच्चे बडे होने लगते हैं तो इस तरह की बात बहुत बार देखने सुनने में आती है तो क्या करना चाहिए ?? चलिए आज इसी बारे में बात करते हैं कि पैरेंटस कैसे डील करें जब बच्चे उनसे Disrespect या rude behave करते हैं…

शांत रहिए…पेरेंट्स हैं तो पैशेंस रखिए… Calmly Handle the situation

जब पेरेंट्स की बात नही मानी जाती तो उन्हें बहुत गुस्सा आ जाता है पर एक बात नही भूलनी चाहिए कि बच्चे ऐसा जानबूझ कर नही करते ये उनमें जो biological और  psychological changes हो रहे हैं उसकी वजह से ये सब हो रहा है.. इसलिए जब बच्चा सामने बोले पलट कर बोले  बहुत harsh और rude भी हो ऐसे शांत रहिए… क्योकि हमारा बोलना  ही friction यानि मन मुटाव की वजह बनता है…

 Ignore and Wait

बहुत बातें Ignore भी करनी चाहिए… मान लीजिए हम आवाज लगाए जा रहे हैं और वो आराम से मोबाईल पर कुछ किए जा रहा है तो हमें बहुत गुस्सा आता है या कभी आखे दिखाना कभी कंधे हिलाना … कहना न मानना… तो हमें इग्नोर कर देना है… हां अगर ये बात बहुत बड रही है फिर तो हमें कुछ कदम उठाने पडेगें पर रोजमर्रा में इस तरह की छोटी छोटी बातें इग्नोर कर देनी चाहिए…

अपने नियम बना लेने चाहिए

कि घर में सभी ने, सभी से आराम से बात आदर से बात करनी है… जब भी बच्चा rude होता है तो हम उससे दुगुना rude हो जाते हैं तो हमें नियम बना लेने चाहिए…  क्योकि वो भी अच्छे से बात नही करेगा और  पेरेंट्स भी अच्छे से बात नही करेगें तो नही तो तनाव ही होगा … इसलिए अपने नियम बना लेने चाहिए…

 हम पेरेंट्स लेकचर देने लगते हैं… पेरेंटस को जब गुस्सा आता है वो बहुत कुछ बोल जाते हैं… जैसे बहुत बत्तमीज हो गए हो तुम अक्ल नही है बोलने की…

ये बोलने की बजाय पेरेंट्स बोले कि आप जिस तरह से बोले मुझे अच्छा नही लगा.. मुझे दुख हुआ.. आपको ऐसे बात नही करनी चाहिए थी…

Appreciate कीजिए

जब भी पेरेंट्स को लगे कि आज तो बच्चे ने बहुत अच्छी से बात की.. मन खुश हो गया..चेहरे पर स्माईल आ गई तो उसकी प्रशंसा कीजिए.. कि आज आपसे बात करके बहुत अच्छा लगा… इस बात का भी ध्यान रखना है कि वो प्रशंसा झूठी न हो… अगर वो अपनी उपलब्धि दिखाता है कि देखो मुझे ये मिला तो सिर्फ बधाई नही देनी विस्तार से पूछना है कि ये कैसे मिला और फिर प्रशंसा करनी है…

माहौल हलका बना लीजिए

कई बार जब नाराजगी बहुत बढ जाती है तो हल्के गुदगुदाते शब्दों से माहौल को हलका कर दीजिए… देखिए गुस्सा तो हर कोई करता है पर आप उसी माहौल को हलका कर दीजिए argument को हटाने का अच्छा तरीका है कि माहौल को हल्का बना लिया जाए…

रोल मॉडल बनिए…

एक दूसरे से बुराई भी करते हैं लडते झग़ते तो सारे हैं पर आप एक रोल मॉडल बनिए… बच्चे की भावनाएं समझिए और उन्हें प्यार दीजिए..

खुद ही सोचिए कि मैं इस तरह बच्चे से बात करती हूं तो क्या हो सकता है परिणाम.. यकीन अगर अच्छा नही है तो अपना रवैया बदल दीजिए.. room बंद कर लेता है .. कही  गया है और फोन स्वीच ऑफ कर लेता है .. तो क्या होगा…

अपने प्यार से दिल जीतिए.. अगर फिर भी लगता है कि बात नही बन रही मिल बैठ कर बात करने पर भी बच्चा समझ ही नही रहा तो तो counselors से या टीचर से या बच्चे के दोस्त के पेरेंटस से बात की जा सकती है..

How to Deal with Disrespectful Teenagers – क्या करें जब बच्चे respect ना करें

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