Monica Gupta

Writer, Author, Cartoonist, Social Worker, Blogger and a renowned YouTuber

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May 10, 2017 By Monica Gupta Leave a Comment

Blood Donation Awareness Video – रक्तदान – करके देखो अच्छा लगता है – Donate Blood –

Blood Donation Awareness Video

Blood Donation Awareness Video – रक्तदान – करके देखो अच्छा लगता है – Donate Blood – Monica Gupta – Misconceptions about Blood Donation – कुछ दिन पहले मैं blood donation  पर सर्च कर रही थी तभी मैने देखा किसी ने मेरा लिखा आर्टिकल अपने नाम से डाल रखा है पहले तो मुझे अच्छा नही लगा पर जब मैने उसने लिखें कमेंट पढे तो बहुत सारे कमेंट थे किसी ने बहुत अच्छा लिखा है किसी ने लिखा कि मैं भी जरुर ब्लड डोनेट करुगां …

Blood Donation Awareness Video – रक्तदान – करके देखो अच्छा लगता है

तो मुझे सच में बुरा नही लगा सोचा कि एक noble cause है अगर जागरुकता ऐसे आती है तो ऐसे ही सही … वैसे जागरुकता है नही लोगों में रक्तदान के प्रति…बहुत तरह की बाते देखने सुनने को मिल जाती है …

क्योकि इस field  से जुडी हूं तो बहुत बातें हैं बहुत बातों में  एक बात मुझे हमेशा याद रहती है जो मैने बहुत समय पहले net  पर पढी थी  खबर पढी कि अहमदाबाद के रोहित उपाध्याय  ने 100 बार रक्तदान किया..

माँ तो माँ होती है – एक छोटी सी कहानी

शायद आपको इस खबर में कोई नयापन न लगे पर अगर मैं आपको कहूं कि वो रिक्शा चलातें है तो भी शायद कुछ हट कर न  लगे लेकिन अगर मैं आपको ये बताऊ कि वो मरना चाहते थे इसलिए रक्तदान करने गया था तो शायद आप भी चौंक़ जाएगें.

असल में, अहमदाबाद के राहुल उपाध्याय ओटो रिक्शा चलाते हैं वो अपनी जिंदगी से बहुत परेशान  हो गए थे और सुसाईड करना चाहते थे उन्हें लगता था कि रक्तदान करने पर आदमी मर जाता है इसलिए रक्तदान करने गए थे पर रक्तदान करके जब यह पता चला कि  उन्हें तो कुछ हुआ नही और उन्होनें किसी की जिंदगी बचाई है तो उनकी सोच बदल गई और लगातार रक्तदान करने लगे…उनकी देखा देखी बहुत ओटो वाले भी आगे आए … कहने का मतलब यही है कि मन से कंफ्यूजन निकाल दीजिए पूछिए और अपने डाउट दूर कीजिए … और रक्तदान करके देखिए … अच्छा नही बहुत अच्छा लगेगा … आप किसी के नजरों में हीरो बन जाएगें … जरुर सोचिएगा … कल फिर

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रक्तदान महादान

May 9, 2017 By Monica Gupta Leave a Comment

महिला सशक्तिकरण में शिक्षा की भूमिका

Importance of Mothers in Life

महिला सशक्तिकरण में शिक्षा की भूमिका क्या है ?? Mahila Sashaktikaran me Shiksha ki Bhumika. क्या नारी सशक्तिकरण वास्तव में हो रहा है या महिला सशक्तिकरण में शिक्षा की भूमिका क्या है ?? स्त्री शिक्षा ka mahatva …बेटियां शुभकामनाएं हैं  बेटी एक वरदान हैं.

महिला सशक्तिकरण में शिक्षा की भूमिका

कल मैं एक आर्टिकल पढ रही थी कि दुनिया की top most working ladies  अपने दिन की शुरुआत कैसे करती हैं कोई जिम जाती हैं, बच्चों को उठाती हैं  वर्क आउट करती हैं कोई सुबह 7 बजे आफिस ही पहुंच जाती हैं…

मैने लेख पढने के बाद जब अपनी एक दो जानकारों से पूछा तो उनका जवाब था कि उठते ही मोबाईल चैक करती हैं कि कौन कौन से मैसेज आए किसने लाईक किया किसने किसको कमेंट किया…

अगर कुछ बनना है तो काम तो करना ही पडेगा …

महिला सशक्तिकरण के उपाय

वैसे  महिलाओं को आगे लाने के लिए बढावा देने के लिए समय समय पर हमारे देश में अभियान चलते रहते हैं इन्ही अभियानों से से एक है कुछ समय पहले एक अभियान चला था Selfie With Daughter..

फिर एक खबर पढने को मिली  हरियाणा में स्वतंत्रता दिवस पर हर गांव की जो सबसे ज्यादा पढी लिखी लडकी होगी वो अपने अपने  गांव में ध्वजारोहण करेगी.और सुमन ने देश का ध्वज फहराया

एक दूसरी खबर ने और भी ज्यादा आत्मविश्वास भरा कि गांव की सबसे पढी लिखी लडकी सुशीला को एक दिन का सरपंच बनाया …

मेरी भी बात हुई और उसने बताया कि कितना गर्व का पल था वो और इस मुहीम ने लडकी की पढाई को एक नया रुप दिया है … और आज एक और खबर पढने को मिली जिसने एक बार फिर मन में आत्मविश्वास  भर दिया ..

 

 

खबर रांची के पूर्वी सिंहभूम के दुरकु गांव की है वहां उच्च विद्यालय हाई स्कूल की  एक प्रतिभाशाली लडकी प्रियंका मुरमू  जोकि 14 साल की है एक दिन के लिए स्कूल की मानद प्राचार्य बनाया गया.. ‘बालिका सशक्तिकरण’ को लेकर हाई स्कूल में नया प्रयोग किया गया ..

अपने अनुभव को बयां करते हुए प्रियंका मुरमू ने कहा कि वह अपने अकादमिक लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कड़ी मेहनत करेगी और एक दिन वास्तव में इस पद तक पहुंचेगी …

सफल कैसे बने महिलाएं – सफल महिलाओं की 11 habbits – Monica Gupta

सफल कैसे बने महिलाएं – सफल महिलाओं की 11 habbits – successful ladies ki habit जिंदगी में हम सभी सफल होना चाह्ते हैं पर हमें ये नही पता होता कि सफल किस तरह read more at monicagupta.info

 

सांझा प्रयास करने से ही होंगें सिर्फ सरकार लागू कर दे इससे कुछ नही होगा और अच्छे और बेहतर भविष्य के लिए लडकियों को भी आगे आने होगा क्योकि गर्ल है तो कल है….कॉमन बात है पढाई

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आपको इस बारे में कुछ और भी पता हो तो जरुर बताईएगा ……

बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना , बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ इन हिंदी , बेटी स्पेशल स्टेटस, बेटियां शुभकामनाएं हैं , बेटी एक वरदान, शिक्षा का महत्व और बेटी पढाओ अभियान , जीवन में शिक्षा का महत्व, गर्ल है तो कल है , बालिका सशक्तिकरण , महिला सशक्तिकरण में शिक्षा की भूमिका, महिला सशक्तिकरण के उपाय, नारी सशक्तिकरण का महत्व, क्या नारी सशक्तिकरण वास्तव में हो रहा है, महिला सशक्तिकरण की अवधारणा , महिला सशक्तिकरण लेख , Beti bachao beti Padao (BBBP) Yojana (save daughter, educate daughter) to save and empower the girl child is making waves all over the nation. मातृ सैल्फी विद डॉटर कान्टैस्ट

 

May 8, 2017 By Monica Gupta Leave a Comment

माँ तो माँ होती है – एक छोटी सी कहानी

इंसान और भगवान

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माँ तो माँ होती है – एक छोटी सी कहानी

कई बार कुछ ऐसा पढने को मिल जाता है कि पढने के बाद बस विचार शून्य यानि  हो जाता है …नेट पर कुछ सर्च कर रही थी तभी ध्यान एक कहानी पर गया … कहानी बहुत छोटी सी पर बहुत गहरा असर छोड गई.

कहानी है एक वादक की वो हर रोज जंगल में जाकर मृदंग ड्रम  बजाता … जब वो ड्रम बजाता एक मेमना आ कर बैठ जाता … वादक हर रोज उसे देखता एक दिन उसने पूछ ही लिया कि तू यहां हर रोज आकर बैठता है मेरा गाना अच्छा लगता है या बजाना …

किसलिए आता है तू रोज …

 

 

मेमना बोला ये तो मैं नही जानता कि लय ताल गाना बजाना  क्या है…. मैं तो बस इतना जानता हूं कि जो आप ड्रम बजाते हो उस पर मेरी मां का चमडा लगा है जब आप बजाते हो उसकी थाप पडती है तो ऐसा लगता है कि मेरी मां मुझे पुकार रही है …

जीवन में माँ का महत्व – Monica Gupta

एक महीना हो गया पर दोनो बच्चों ने घर सम्भाल रखा है ऐसा लग रहा है मानो पिकनिक हो रही हो … इतने में उनका बेटा चाय ले आया और कुछ देर बाद में बहुत खुश होकर लौट रही थी और सोच रही थी कि अगर सब मिलकर काम करें एक दूसरे का ख्याल रखें तो कितना अच्छा हो read more at monicagupta.info

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जानिए  किसने क्या कहा …

जीवन में माँ का महत्व- माँ की ममता और माँ का महत्व जानिए – ईश्वर का दूसरा रुप है मां , भगवान हर जगह नही जा सकते इसलिए उन्होनें मां को बना दिया.
आसमान ने कहा…. “माँ एक इन्द्रधनुष है, जिसमें सभी रंग समाये हुए हैं
शायर ने कहा…. “माँ एक ऐसी गजल है, जो सबके दिल में उतरती चली जाती है
माली ने कहा…. “माँ एक दिलकश फूल है, जो पूरे गुलशन को मह्काता है।”
औलाद ने कहा…. “माँ ममता का अनमोल खजाना है, जो हर दिल पर कुर्बान है
वाल्मीकि जी ने कहा…. “माता और मात्ृ भूमि का स्थान स्वर्ग से भी ऊँचा है
वेद व्यास जी ने कहा…. “माता के समान कोई गुरु नही है
पैगम्बर मोहम्मद साहब ने कहा…. “माँ वह हस्ती है, जिसके क़दमों के नीचे जन्नत है

और मैंने कहा कि उसको नही देखा हमने मगर पर उसकी जरुरत क्या होगी … ए मां तेरी सूरत से अलग भगवान की मूरत क्या होगी …

May 7, 2017 By Monica Gupta 2 Comments

साहेब दास मानिकपुरी एक असाधारण शख्सियत

साहेब दास मानिकपुरी एक असाधारण शख्सियत

साहेब दास मानिकपुरी एक असाधारण शख्सियत- Saheb Das Manikpuri ek asadharan shakhsiyat – किसी का साधारण होना ही उसे असाधारण बना देता है .. और मैं आज ऐसी ही एक असाधारण प्रतिभा से आपको रुबरु करवा रही हूं जो बेहद साधारण कद काठी रंग रुप होते हुए भी फिल्मी दुनिया में अपनी आसाधारण छाप छोडने में सफल हो रहें हैं …

साहेब दास मानिकपुरी एक असाधारण शख्सियत

असल में, एक सीरियल देख रही थी May I Come in Madam उसमे एक हास्य पात्र हैं खिलौनी… जी, मैने कुछ गलत नही लिखा उनका नाम ही है खिलौनी … सीरियल में एक बहुत अच्छे और सच्चे दोस्त है हमेशा मदद के लिए भी तत्पर रहते हैं पर कुछ न कुछ गडबड हो ही जाती है और आप समझ ही सकते हैं कि अंत क्या होता होगा …

असल में, इस सीरियल के इलावा भी मैने उनके द्वारा किए गए बहुत सारे विज्ञापन देखे, सीरियल भी देखे, हर बार अपनी अलग पहचान और दर्शकों के दिल में अलग जगह बनाने में सफल रहे तो महसूस हुआ कि इनके बारे में और जाना जाए और मुझे बात करने का मौका मिला और खिलौनी जी उर्फ साहेब दास मानिकपुरी  जी से बात हुई और उन्होनें शूटिंग की अपनी भारी व्यस्तता के बावजूद् भी समय निकाला और शुरु हुआ बातों का सिलसिला…

बिल्कुल हंसते मुस्कुराते जैसा कि हमेशा हम अभिनय में देखते हैं … सबसे अच्छी बात मानिक जी में ये लगी कि वो बिल्कुल जमीन से जुडे कलाकार है … किसी भी तरह का अहम या धमंड उन्हें छू तक नही गया है जैसा कि इस industry में आमतौर पर देखने को मिलता है … और शायद यही साधारण बात उन्हें असाधारण बना रही थी …

 

(बालक साहेब उन की माता और भाई कुमार मानिकपुरी)

मानिक जी का जन्म 31 मार्च को रायपुर छत्तीसगढ़ के छोटे से गाँव भैंसा सकरी में हुआ . ये चार भाई बहन में सबसे छोटे और सबसे लाडले थे. बेशक शरारती थे पर किसी का नुकसान नही करते थे  . प्यार से इन्हें संजू नाम से बुलाया जाता.  पिता कोतवाल हुआ करते थे और मां घर का काम काज देखतीं.

अपने बचपन को याद करते हुए मानिक जी बताते हैं कि स्कूल जाने के लिए नाला पार करना पडता था आमतौर पर बच्चे साईकिल पर स्कूल जाते हैं वो साईकिल को अपने हाथों में उठा कर स्कूल जाते क्योकि नाला जो पडता था रास्ते में .. इसलिए साईकिल हाथों में उठा कर जाना पडता ..

बचपन का एक बहुत खास दोस्त था …कल्लू कुत्ता… वो हमेशा साथ रहता और माता जी का भी बहुत ख्याल रखता .. उन्होनें बताया कि जब वो बहुत छोटे थे तब एक बार गलत इलाज के चलते उनकी माता जी की आखों की ज्योति चली गई थी पर माता जी फिर भी घर का काम करती और किसी को अहसास नही होने देती कि उन्हें दिखाई नही दे रहा ऐसे समय में कल्लू उनका बहुत ख्याल रखता था …

मानिक जी ने बताया कि उनका गाँव भैंसा सकरी गांव नही बल्कि एक परिवार था …गाँव वालो के दुख हो या सुख हों सब सांझे होते थे. बचपन की बात को याद करते हुए उन्होनें बताया कि गाँव में एक अंकल को अधरंग हो गया पर पूरे गांव ने उनके खाने का जिम्मा ले लिया एक डुगडुगी बजाते निकल जाते और गांव वाले उन्हें खाना खिलाते …

वही गाँव की एक बुआ पर जब बहुत मुसीबत आन पडी तब वो लोगो के घर पर काम करती और सभी उसकी बढ चढ कर मदद करते … ये सब बचपन से देखा इसलिए आज भी मन में हमेशा किसी की मदद करने की भावना रहती है …

फिर बात हुई अभिनय की तो उन्होनें बताया कि कोई खास शौक नही था छोटा मोटा रोल कर लेते थे बडे होने पर जब आईटीआई में दाखिला लेने की बात  आई तो उनके बडे भाई कुमार मानिकपुरी जी जोकि मुम्बई ही रहते हैं उन्होनें मुम्बई बुला लिया पढने के लिए और उनके कहने पर वो मुम्बई आ गए…

May I Come in Madam

भाई के बारे में उन्होने बताया कि कि वो जाने माने लेखक हैं. उन्होने “माणिक खंड” लिखा है और अभी हाल ही में उन्होंने “श्रीमद्भगवत गीता की दोहा चौपाई में सरल टीका” की है जिसका जल्द ही प्रकाशन होने वाला है. उन्होनें बताया कि भाई ने बुलाया तो पढाई करने के लिए ही था पर वहां पर उन्होनें थिएटर ज्वाइन कर लिया …

सबसे पहले  इस्कॉन थिएटर ज्वाइन किया जहाँ कुछ नाटक किये फिर पृथ्वी थिएटर ज्वाइन किया…  थिएटर के दौरान बहुत कुछ सीखा.

अपने सबसे पहले नाटक को याद करते हुए उन्होनें बताया कि नाटक कंस वध था जिसमें वो कृष्ण के दोस्त मनसुख बने थे… बहुत खुशी की बात यह हुई कि उन्हें अभिनय के लिए मनोज बाजपेयी से अवार्ड मिला … जोकि निसंदेह एक मील का पत्थर साबित हुआ…

वहीं जब पहली बार कैमरा फेस करने की बात पूछी तो उन्होनें बताया कि उनका पहला सीरियल सी आई डी था … बहुत नर्वस थे पर धबराहट तो आज भी कोई रोल करते हुए होती है पर सब हो जाता है … बताते बताते मुस्कुराने लगे ..

उनकी फिल्मों में कुछ हैं … फँस गए रे ओबामा , मर्दानी , जयंता भाई की लव स्टोरी , रमैया वस्ता वैया और हिस्स आदि  हैं और सीरियल में तोता वेड्स मैना , ऍफ़ आई आर , भाभी जी घर पर हैं, मे आई कम इन मैडम  हैं इतना ही नहीं  फिल्मों के साथ साथ ऐड फिल्म्स यानि विज्ञापन भी खूब किए चाहे स्वच्छता अभियान पर हो या आधार कार्ड पर या शिशु आहार पर विज्ञापन बहुत सराहे गए खासकर वो विज्ञापन जिसमें श्री अमिताभ बच्चन और कंगना रनावत हैं.

 

अपनी एक फिल्म “रायता”के बारे में उन्होनें बताया कि फिल्म में वो  इरफ़ान खान के साथ काम कर रहें हैं. ये फिल्म पानी की समस्या और भविष्य में उपजे संकट के बारे में है.   इसके अलावा एक फिल्म टाइपकास्ट है ये  बुंदेलखंड की कहानी है और इस फिल्म में  श्रेयस तलपड़े लीड रोल में हैं फिल्म भी  मज़ेदार है और रोल भी बताते हुए वो फिर मुस्कुरा दिए.

जैसाकि मैं शुरु में ही बात कर रही थी कि उनके भीतर असाधारण सी शख्सियत की छाप देखने को मिली … जिस सादगी से,  जिस ईमानदारी से उन्होनॆं अपनी बातें बताई बहुत प्रभावित कर गई …

अब मेरा प्रश्न था कि क्या ये फिल्मी सफर आसान रहा … इस पर उनका सीधा सा जवाब था नही … क्योकि साधारण शक्ल सूरत बहुत साधारण थी … बहुत बार रिजेक्ट भी हुआ पर जिस भी काम को किया उसे बहुत मेहनत और ईमानदारी से दिल लगा कर किया … चाहे वो हास्य पात्र खिलौनी हो या विज्ञापन का भ्रष्ट अधिकारी जो पान खाकर पीक भी करता है या फिर एक पात्र जो लोटा लेकर जंगल जाता है और वातावरण अस्वच्छ कर रहा है…

अब उनकी शूटिंग का समय भी हो गया था  तो जाते जाते मैने एक बात और पूछी कि जो अभिनय के क्षेत्र में आना चाहते हैं उनके लिए आपका क्या संदेश है ..

उन्होने कहा कि जो भी आए उसका स्वागत है अभिनय करें पर थियेटर करते हुए और आगे बढें इसी के साथ साथ Patience  भी रखनी होगी ये नही कि इस सोच से आएं कि आज आए और कल हीरो बन जाएगें  ..

काम की बारीकी को समझ कर पूरी तरह से समर्पित होकर ही काम करना. इसी के साथ साथ सच्चाई , ईमानदारी से काम करते रहना और दूसरों का आदर मान करना और मान सम्मान देना बहुत जरुरी है…

उनकी शूटिंग शुरु होने वाली थी जाते जाते उन्होनें बताया कि बेशक मेरे गॉड फादर तो मेरे भाई साहब हैं पर दर्शकों का जो लगतार प्यार मिल रहा है उसके लिए मैं दिल की गहराईयों से उनका धन्यवाद करता हूं और यही कामना है कि प्यार और विश्वास ऐसे ही बनाए रखिएगा …

 

और  जाते जाते एक डायलॉग may I come in … अबे यार साजन क्या कह रहा है बे … और मुस्कुराते मुस्कुराते बाय बोला .. हमारी भी ऐसे असाधारण कलाकार को ढेर सारी शुभकामनाएं …

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साहेब दास मानिकपुरी एक असाधारण शख्सियत

(तस्वीरें गूगल से साभार )

May 7, 2017 By Monica Gupta Leave a Comment

एक छोटी सी बात -वो लडकी

इंसान और भगवान

एक छोटी सी बात – वो लडकी –  ek chhoti si baat woh ladki – एक अनुभव ऐसा भी –  daily life  यानि रोजमर्रा की जिंदगी में बहुत बाते होती रहती है कई बातें , हमें तो  याद नही रहती पर दूसरे की जिंदगी में गहरा असर छोड जाती है ..chhoti si zindagi hai har baat mein khush raho..

एक छोटी सी बात – वो लडकी

आज मार्किट में एक लडकी ने आवाज दी तो मैने मुड कर देखा एक छोटी सी लडकी भागी आ रही थी मुस्कुराते हुए नमस्ते बोली तभी उसकी मम्मी दिखाई दी  बोली इसने दूर से आपको देख लिया था और आपसे मिलने के लिए मेरी उंगली छुडा कर भागी…

मुझे याद तो नही आया पर मैने पूछा कैसी हो आप ?? इस पर उसकी मम्मी बोली अब ये बिल्कुल ठीक है अब तो हर रोज स्कूल जाती है  और आपको बहुत याद करती है … बाते करते करते इस लडकी ने बोला की अब सूई से डर नही लगता बडे होकर ब्लड भी डोनेट करुगी जैसे ही उसने ब्लड डोनेशन का बोला मुझे याद आ गया कि ये कौन हैं … दो चार मिनट बात कर बाय बोल कर आगे चले गए … वो जा रहे थे और मुझे याद आई वो बात जब मैं इस लडकी से पहली बार मिली थी …

हुआ ये था कि कुछ समय पहले मेरी सहेली मणि को ब्लड टेस्ट के लिए एक लैब में जाना था … वो  मुझे अपने साथ ले गई … हम मणि के नम्बर की वेट कर रहे थे … मणि से पहले एक बहुत छोटी सी लडकी थी … ये लडकी वो ही थी जो आज मिली … लडकी को सूई से बहुत डर लग रहा था … करवाना नही चाह रही थी उसी में समय लग रहा था… उसकी मम्मी जिस तरह से उसे समझा  रही थी लग रहा था लग रहा है .. मैं उसकी फीलिंग्स  समझ गई और उसकी मम्मी की भी …

 

 

मैं लडकी के सामने गई उस समय लैब वाले  इंजेक्शन की तैयारी कर रहे थे. मैने बिन जाने पहचाने पूछा कि आप कौन सी क्लास में हो वो अपनी मम्मी का चेहरा देखने लगी … मम्मी ने इशारा किया तो वो बोली 2 क्लास में फिर मैने जब स्कूल पूछा और उसने नाम बताया तो मैने कहा कि अरे दीपिका भी उसी क्लास में पढती है क्या आप उसे जानते हो  ??

वो बोली दीपिका नही तो दीपांशी तो है मैने कहा कि हो सकता है कि घर पर उसे दीपिका कहते हो … उसके बाल बहुत लम्बे हैं और बहुत मोटी है … हमेशा अपने पास चाकलेट रखती है कहते कहते मैने उसके हाथ में छोटी सी चाकलेट थमा दी … इस पर वो बोली नही उसके तो बहुत छोटे बाल हैं और बातो बातों में डाक्टर सूई लगा चुके थे.

वो कुर्सी से उठ चुकी थी और उसकी मम्मी ने मुझे बताया कि इसे बहुत दिनों से बुखार चल रहा था इसलिए डाक्टर ने ब्लड टेस्ट  के लिए लिखा था पर उसे सूई से बहुत डर लग रहा था रात भर  ये सोई नही कि सूई लगेगी पर आपकी बातों की वजह से इतना आराम से सूई लगवा ली … कुछ हुआ तो नही ना … और वो चुपचाप कुर्सी से उतर गई …

मैने उसका गाल थपथपाया और बोला कि ये सूई से डरते नही है आप तो बहुत बहादुर बच्चे हो और बडे होकर ब्ळड भी तो डोनेट करना है … बेशक मैने ये बात नोर्मली कही थी पर उसके मन में कितनी गहराई तक है … आज उसे देखा तो याद आ गया …  ऐसी ही कोई बात आपके साथ भी हुई हो तो जरुर शेयर करना … कल फिर मिलूगी …

 

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May 6, 2017 By Monica Gupta Leave a Comment

सुप्रीम कोर्ट का आदेश और जल्लाद इन इंडिया

सुप्रीम कोर्ट का आदेश और जल्लाद इन इंडिया

सुप्रीम कोर्ट का आदेश और जल्लाद इन इंडिया –  supreme court ने  आदेश दिया फांसी की प्रक्रिया कैसे होगी क्योकि तिहाड़ जेल में एक भी जल्लाद नहीं, निर्भया के दोषियों को कैसे होगी फांसी

सुप्रीम कोर्ट का आदेश और जल्लाद इन इंडिया –

Search of Hangman in delhi nirbhaya case – www.bhaskar.com

इस सजा के बाद तिहाड़ के अफसरों के सामने एक सवाल यह है कि इस फैसले को अमल में कैसे लाया जाएगा, क्योंकि दिल्ली की जेलों में एक भी जल्लाद नहीं है। बता दें कि 16 दिसंबर, 2012 की रात दिल्ली में 6 आरोपियों ने चलती बस में निर्भया के साथ गैंगरेप किया था।

See more…

 

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