Monica Gupta

Writer, Author, Cartoonist, Social Worker, Blogger and a renowned YouTuber

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July 11, 2015 By Monica Gupta

Sick Leave

thums up photo

Photo by Zappy’s

Sick Leave

बचपन मे क्लास english  की हो या हिंदी की एक पत्र यानि application  का हमें रट्टा लगा होता था और वो है Sick Leave. सविनय निवेदन है कि आज मुझे बुखार है मैं दो दिन स्कूल नही आ पाऊंगी. कृपया करके दो दिन का अवकाश प्रदान करॆं..

ये application हमारे दिल के इतना करीब है इतना करीब है कि आज भी हम सभी  कही न कही बहाना ही खोजते हैं बीमार होने का …अब देखिए ना बीमार होना यानि मुसीबतों का पहाड टूट पडना. लम्बी लाईन, फिर ढेर सारे टेस्ट और फिर महंगी दवाईयां और दवाई के आफ्टर ईफेक्टस … इतना सब कुछ होते हुए भी बीमार होना हमे प्रिय है … बेहद प्रिय है… अब देखिए ना…  बच्चा अगर बाहर नौकरी कर रहा है तो मां ये कहेगी कि अगर छुट्टी नही मिल रही तो मेरी बीमारी की छुट्टी का बहाना ले कर आजा, मेरे बच्चे… !!!

बाहर बरसात हुई मौसम चाऊ माऊ हुआ कि हमें और किसी की याद आए न आए छुट्टी की याद जरुर आती है और बहाना … अजी बहाना तैयार है कि सर …  कल बरसात मे भीगने के कारण सर्दी लग गई और बुखार भी हो गया. इसलिए आज आफिस  नही आ पाउगां… और फिर बच्चों को लेकर निकल जाते है long drive पर ….  अगर लिख कर दे रहे हैं तो अलग बात है पर अगर फोन करके बताना है तो एक दो फर्जी छीकें तो मारनी पडेगी और एक दो बार नाक से भी बोलना पडेगा अरे भई … आपकी नाक भी तो बंद है ना 🙂 🙂

और तो और आप जरा फेसबुक पर स्टेटस डाल कर तो देखिए कि आपकी  तबियत  ठीक नही है  कमेंटस की लाईन न लग जाए तो अपना नाम बदल लेना( अब भई मेरा नाम तो भला चंगा है)

तो हुआ ना  बीमारी का बहाना हमारे दिल के करीब …

वैसे बहुत देर हो गई कामवाली बाई अभी तक नही आई … सारी रसोई फैली पडी है .. अरे ये किसका मैसेज है मोबाईल पर … नहीईईईईईईईईईईई… काम वाली बाई का है लिखा है आज तबीयत ठीक नही लग रही… दो दिन काम पर नही आएगी रे बाबा … !!

हाय ये क्या ??? मुझे भी अचानक सिर दर्द हो गया ऐसा लग रहा है बुखार भी … अरे नही ये वाकई में  सचमुच वाला है .. 🙁

July 11, 2015 By Monica Gupta

Hike Salary of MLA

Hike Salary of MLA

cartoon aap salary by Monica Gupta

 

Hike Salary of MLA

सावधान .. अगर आप भी किसी विधायक के घर जा रहे हैं तो कृपया करके चाय वाय पी कर जाए अन्यथा … !!!! क्योकि  विधायकों का कहना है कि खर्च की तुलना में वेतनमान बेहद कम मिलता है, इसके अलावा महंगाई बहुत ज्यादा है। दिनभर मेल-मुलाकातों के दौरान चाय-पानी पर काफी खर्च आ जाता है। ऐसे में हमें बेहद दिक्कत पेश आती है। हम इमानदारी से काम करने वाले लोग हैं, इसलिए वेतनमान में इजाफा होना चाहिए। सूत्रों का कहना है कि आप सरकार वेतन बढ़ाने की मांग पर कार्रवाई कर सकती है।

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नई दिल्लीः घर चलाने के लिए आम आदमी पार्टी (आप) के कई विधायकों ने वेतन बढ़ाए जाने की मांग की है। विधायकों का कहना है कि उनको जो भी वेतनमान मिलता है वह उनके दफ्तर और उससे संबंधित व्यवस्थाओं में ही खर्च हो जाता है, ऐसे में वह अपना घर खर्च कहां से चलाएं। वेतन बढ़ाने के लिए कुछ इसी तरह के तर्क देकर आम आदमी पार्टी के बीस से अधिक विधायकों ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को पत्र लिखे हैं। इन विधायकों का कहना है कि खर्च की तुलना में वेतनमान बेहद कम मिलता है, इसके अलावा महंगाई बहुत ज्यादा है। दिनभर मेल-मुलाकातों के दौरान चाय-पानी पर काफी खर्च आ जाता है। ऐसे में हमें बेहद दिक्कत पेश आती है। हम इमानदारी से काम करने वाले लोग हैं, इसलिए वेतनमान में इजाफा होना चाहिए। सूत्रों का कहना है कि आप सरकार वेतन बढ़ाने की मांग पर कार्रवाई कर सकती है See more…

 

AAP MLAs demand a hike in their salaries from Arvind Kejriwal | Latest News & Updates at Daily News & Analysis

A delegation of 20 Aam Aadmi Party legislators on Friday met Delhi Chief Minister Arvind Kejriwal demanding a hike in their salaries. Taking a clue from Parliamentarians in Lok Sabha and Rajya Sabha seeking 100 percent hike in their salaries, the AAP MLAs also decided to approach both Delhi CM and his deputy Manish Sisodia for a similar raise.

While speaking to dna AAP MLA Nitn Tyagi said that a team of 20 legislators had approached the CM, all the legislators unanimously agree that salaries must be raised.

“We get 53,500 in hand and it might sound a lot but we are not able to save a penny for ourselves. In fact I personally have on many occasions used money from my personal savings to work for the people of my constituency,” Tyagi said.

He added that not only him but other MLAs as well end up paying for the office, salaries of helpers, stationeries and so on, and that most of the previously lawmakers would also own business so had not much to rely on government salary.

“This is not the case with us. In a day, dozens of people from my constituency come to meet me with their problems. The people have to be served water, tea or snacks. This is basic courtesy but given the current salary even being courteous is turning out to be expensive for us.” dnaindia.com

तो इसमे गलत ही क्या है अभी नही कर सकते इतना खर्चा इसलिए तो अपने घर के बाहर बोर्ड लगा दिया है  jee …

July 11, 2015 By Monica Gupta

Indian House wife

Indian House wife

मेरी एक सहेली हाऊस वाईफ है. आज सुबह उसके घर गई तो बच्चों के शोर से घर गूंज रहा था. बोली आज और कल ओवर टाईम करना है ?? मैने पूछा अरे !! कैसे कही ज्वाईन किया क्या तो हंस कर बोली नही री … आज इनकी और बच्चों की छुट्टी है ये सब मस्त है पूरा दिन धमा चौकडी मचाने वाले हैं जबकि उसका आज पूरा दिन रसोई मे बीतेने वाला है … बारी बारी करके सो कर उठेंगें …अलग अलग नाश्ते की फरमाईश होगी फिर बाजार भी शापिंग पर ले जाना होगा फिर बच्चों के दोस्त भी आएगें और इनके भी दो चार दोस्त तो आ ही जाएगें …

मौसम अच्छा है तो पकौडे शकौडे … फिर … मैने कहा … बस बस बस … ओह मैं तो सुनते सुनते ही थक गई इसे तो सारा दिन काम करना है पर वो बोली हां पर खुशी खुशी. एक दो दिन ही हो मिलते हैं बच्चों को मस्ती करने के नही तो सुबह से शाम तक स्कूल पढाई, टयूशन …ना आराम न नींद … !! मैने मुस्कुरा दी.. वाकई छ्ट्टी के दिन तो गृहणी की भूमिका डबल ट्रिपल ही होती है और  ये बात तो एक मां ही सोच सकती है …

मैं अक्सर फेसबुक य अन्य सोशल नेट वर्क साईट पर देखती हूं बहुत लोग हैप्पी संडे करके अपना स्टेटस डालते हैं अगर एक हाऊस वाईफ डाले तो … 🙂 

खैर !! जरुरी ये बात है हर काम खुशी खुशी किया जाए …कई महिलाए “रुस” जाती है मेरा मतलब मोदी जी की यात्रा वाला रुस नही बल्कि नाराज हो जाती है. इतना काम देख कर मुहं बना लेती है अरे भई   छुटी है  आप भी खुश रहो  इसलिए खूब खाओ और खिलाओ …. !!!!

Indian House wife

 lady working in kitchen photo

Photo by Internet Archive Book Images

July 10, 2015 By Monica Gupta

fake Degrees

fake Degreescartoon fake degree by monica gupta

कल्पना कीजिए कि आप अपना आप्रेशन करवाने जा रहे हो. सब कुछ डाक्टर को भगवान मानते हुए उस पर विश्वास रखते हुए और आप्रेशन टेबल पर आपको पता चले कि यह तो फर्जी डिग्री से डाक्टर बना है तो आपकी क्या हालत होगी … आज देश के भिन्न भिन्न राज्यों से जिस तरह से घोटाले सामने आ रहे हैं वो वाकई मे गम्भीर और चिंता जनक है.

कोई वाहन नया चलाना सीखता है तो उसके वाह्न पर L  लिख दिया जाता है और अगर कोई महानुभाव फर्जी डिग्री से बने तो उसके कपडे पर भी बडा सा L लिख दिया जाना चाहिए ताकि लोग सचेत हो जाए और अपने रिस्क पर ही जाए  …

वैसे जनता के साथ खिलवाड करके ऐसे लोगो को कैसा महसूस होता होगा…

अपने आप को धोखा देते ऐसे लोग कैसा महसूस करते होंगें … महसूस करते भी होंगें की सारी संवेदनाए मर चुकी होंगी …

बेहद शर्मनाक कृत्य है ये …

 

July 10, 2015 By Monica Gupta

Cartoon in Daink Bhasker

Db cartoon monica gupta

cartoon monica gupta in DB9indore city-pg13-0

Cartoon in Daink Bhasker    दैनिक भास्कर इंदौर से प्रकाशित व्यापम मुद्दे पर मेरा बनाया  कार्टून ….आज देश में सबसे ज्यादा सुर्खियों में है व्यापम मुद्दा जिसे अब तक का सबसे बडा खूनी घोटाला माना जा रहा है

cartoon vyapam by monica gupta

 

 

 

July 10, 2015 By Monica Gupta

Benefits of Eating with Hands

Benefits of Eating with Hands

Benefits of Eating with Hands

अक्सर शादी या अन्य समारोह में भीड बहुत होती है और उसका फायदा मिल जाता है.Benefits of Eating with Hands फायदा इस बात का मिलता है कि स्टाल वाली कुछ चीजों को हाथ से खाया जा सकता है मसलन, टिक्की … गरमागरम टिक्की, करारी सीधा तवे से उतरी हुई खाने का अपना ही मजा है इसकी दो वजह है एक तो टिक्की के साथ जो चमच्च मिलता है वो प्लास्टिक का होता है न जाने कब टूट जाए और दूसरा हाथ से खाएगें तो कितना गरम है अंदाजा लग जाएगा और मुंह नही जलेगा… अब इसके लिए जरुरी है भीड … ताकि सब अपने में मस्त हो और हम भी हाथ से खाने में पूरा एंजाय करें..

वैसे दक्षिण में तो ज्यादातर हाथ से ही खाया जाता है पर हमें अपने आस पास का माहौल देख कर हाथ से खाने का मन बनाना चाहिए अन्यथा हंसी के पात्र बनने में भी देर नही लगती.

 

Benefits of Eating with Hands

वैसे हाथों में है प्राण ऊर्जा- आयुर्वेद के अनुसार हमारे हाथों प्राणाधार एनर्जी होती है। इसका कारण है कि हम सब पांच तत्वों से बने हैं, जिन्हे जीवन ऊर्जा भी कहते हैं। ये पांचों तत्व हमारे हाथ में मौजूद हैं। हमारे हाथों का अंगूठा अग्नि का प्रतीक है। तर्जनी उंगली हवा की प्रतीक है। मध्यमा उंगली आकाश की प्रतीक है। अनामिका उंगली पृथ्वी की प्रतीक है और सबसे छोटी उंगली जल की प्रतीक है। इनमे से किसी भी एक तत्व का असंतुलन बीमारी का कारण बन सकता है।

जब हम हाथ से खाना खाते हैं तो हम उंगलियों और अंगूठे को मिलाकर खाना खाते हैं और इससे जो हस्त मुद्रा बनती है। उसमें शरीर को निरोग रखने की क्षमता होती है। इसलिए जब हम खाना खाते हैं तो इन सारे तत्वों को एक जुट करते हैं जिससे भोजन ज्यादा ऊर्जादायक बन जाता है और यह स्वास्थ्यप्रद बनकर हमारे प्राणाधार की एनर्जी को संतुलित रखता है

हाथ से खाने से ना सिर्फ एकाग्रता बढती है बल्कि पाचन भी सुपाच्य होता है.

और इसी के साथ साथ बचपन में जब हम बीमार पड जाते थे तो मम्मी अपने हाथ से खाना खिलाती थी और अगर और बचपन में जाए तो नानी दादी भी बच्चों के पीछे दौड दौड कर दाल चावल खिलाती थी … ये जो स्पर्श का अनुभव है ना … ये बहुत कामगर सिद्द होता है इससे आपसी प्रेम भी बढता है… कुछ दिन पहले मैं अपनी सहेली से बात कर रही थी  तो उसने बताया कि सबसे ज्यादा मजा करवा चौथ पर आता है जब हाथ मे मेहंदी लगा रखे होती है और पति अपने हाथों से खाना खिलाते है…

वैसे जैसे नियम कांटे छुरी से खाने के हैं इसके भी कुछ नियम होते हैं जैसे कि  सब्ज़ी खाते समय उसकी तरी को पूरी उंगलियों में नहीं लिपटने देना चाहिए और केवल उंगलितयों के पोरो का इस्तेमाल होना चाहिए ना कि पूरी की पूरी उउंगली तरी मे डूब जाए फिर यहां वहां लोगों को भी असुविधा हो…   खाते वक्त चपचप की आवाज भी न हो तो बेहतर है. इसके अलावा खाने के बाद भी हाथ धोने के लिए आमतौर पर प्रत्येक व्यक्ति को उंगलियां धोने  के लिए एक कटोरा  जिसमें गुनगुने पानी और कटा हुआ नींबू होता है दिया जाना चाहिए.

lady eating with hands photo

Photo by tanitta

बेशक हमें हाथ से खाते हुए शर्म आती हो पर बहुत विदेशी हमारे देश में आकर हाथ से खाना खाने मे गर्व महसूस करते हैं…

benefits of eating with hands hindi

हाथ (hands) से खाना खाना असल में भारत (India) में जितना कॉमन है उतना किसी और देश में नहीं है पश्चिम में लोग खाना खाने के लिए छुरी और कांटे का इस्तेमाल करते है कई जगह इसे भोजन सम्बन्धी शिष्टाचार से जोड़कर भी देखा जाता है और कुछ लोग मानते है कि हाथ से भोजन (eating with hands) करना सुरक्षित नहीं है लेकिन फिर भी कुछ भी कुछ जानकार ये मानते है कि हाथ से खाना खाने (eating with hands) का एक अलग ही मजा होता है और यह किसी भी छुरी या कांटे या किसी भी अन्य औजार से खाने में नहीं है साथ ही हाथ से खाना खाना स्वास्थ्यवर्धक (health beneficial) तो होता ही है और इसके कुछ और भावनात्मक पहलु भी है जिनपर हम थोडा गौर करते है | तो चलिए इस बारे में थोड़ी और बात करते है –

हाथ से खाने के स्वस्थ्य लाभ / benefits of eating with hands – पिछले कुछ दिनों में अमरीका के एक राज्य में कुछ लोगो के समूह ने छुरी और कांटे को छोड़कर हाथ से खाने की इच्छा जताई और इसके पीछे कई कारन है जिनमे से एक है कुछ जानकर मानते है कि हाथ से खाना खाते समय जो हाथ की अंगुलियाँ और अंगूठे की मुद्रा बनती है वो विशेष होती है और उसमे हमारे शरीर को स्वस्थ (healthy) रखने की क्षमता होती है वन्ही कुछ लोग यह भी मानते है कि जिस तरह हमारा शरीर पांच तत्वों (five elements) का बना होता है उसी तरह हमारे हाथ की पांच उंगलिया भी इसी तरह उन पांचो तत्वों की प्रतीक है इसलिए हाथ से खाना खाते (eating with hands) समय हम उन पांचो तत्वों को रोटी का कौर बनाते समय एकजुट करते है और इस से भोजन उर्जादायक बन जाता है और खाने में अतिरिक्त स्वाद भी आता है | Read more…

Benefits of Eating with Hands जो भी हो हाथ से खाने का अपना ही मजा है एक अलग  ही तरह की संतुष्टि मिलती है … तो शुरुआत हो जाए दाल चावल से … एक मेरी सहेली बता रही थी कि चाय को भी सुडप करने यानि आवाज करके पीने मे अलग ही मजा है … नही … ये नही … अभी इतना ही काफी है  😆

July 9, 2015 By Monica Gupta

कैसे कैसे अविभावक

कैसे कैसे अविभावक

indian traffic light and people photo

Photo by captain.orange

आज दोपहर कुछ बच्चे स्कूल से वापिस आ रहे थे. मौसम खराब था. रेड लाईट होने पर कुछ वाहन रुके. मेरे साथ एक स्कूटी भी रुकी जिसे शायद एक मम्मी चला रही थी और बच्चा पीछे बैठा था. फ्रूटी पीते पीते वो बता रहा था कि आज क्लास मे बहुत नकल चली . मम्मी ने पूछा तूने तो की नही होगी एक ही सत्यवादी हरिशचंद्र पैदा हुआ है हमारे खानदान मे.

बच्चे का क्या जवाब था ये तो पता नही क्योकि हरी लाईट हो गई थी पर चंद मिनट की यह बात बहुत कुछ सोचने पर मजबूर कर गई. मम्मी को बजाय कटाक्ष के उसकी प्रशंसा करनी चाहिए थी ताकि उसका मनोबल और मजबूत होता पर अफसोस जब पेरेंटस ही ऐसी बाते बोलेगें तो …. ????

इसी बात को अगर दूसरे  तरीके से कहा जाता तो अलग ही असर होता … आज जिस तरह से हमारी शिक्षा का स्तर गिरता जा रहा है ये बात  पेरेंटस को बहुत सोचने की है ….

July 9, 2015 By Monica Gupta

मुद्दे ही मुद्दे

मुद्दे ही मुद्दे

इतने सालों से सोनी चैनल पर CID चला आ रहा है हमें शायद हमें इसलिए अच्छा लगता  है कि आज क्राईम हुआ सीआईडी आई और देखते ही देखते जांच हुई और अगले ही पल रिपोर्ट सामने और फिर कैदी सलाखों के पीछे. पर हकीकत ये नही है हकीकत वो है जो हम आप हर रोज देखते है… आज मर्डर हुआ कम से कम दस दिन जांच मे लगेगें और इस बीच आरोपी पर क्या यातना बीतेगी उसकी कोई चिंता नही.

हमारे देश मे जांच टेस्ट  सैंटर इतने कम है कि रिपोर्ट  आते आते मामला ही ठंडा पड जाता है..

दूसरा नुक्स है हमारी कछुए की चाल चलती न्याय प्रणाली .. बीस बीस साल हो जाते हैं तारीख पर तारीख … बस …

तीसरा हमारी जुगाड संस्कृति … रिश्वत का कितना भी विरोध करें हम जुगाड हमेशा से ही हमे प्रिय रहा है..

चौथी बात है मीडिया … तेज और तेज खबर दिखाने के चक्कर में  भिन्नभिन्नाती मक्खियों की उपाधि मिल जाती है… पता नही वो क्यो भूल जाती है कि जरुरत उनसे ज्यादा जनता को है लेकिन मारी मारी भागी भागी दौडती भागती रहती है …

फिर बात आती है महिला सुरक्षा की … मुद्दे बहुत है जिन पर हमें,  मीडिया को, नेता को, सरकार को, प्रशासन  को उठाना चाहिए क्योंकि इन्हें दूर किए बदला  आना सम्भव नही ….

man thinking photo

Photo by taufiq @ eyecreation

 

 

July 9, 2015 By Monica Gupta

Clean India

clean india by monica gupta

Clean India

बात ज्यादा पुरानी भी नही है जब स्वच्छ भारत अभियान शुरु हुआ था. शुरुआती दौर अच्छा था … सब सडको पर आते थे फोटू करवाते … कुछ तो और भी महान थे कूडा खुद ही लेकर आते सडक पर गिराते फोटू करवाते ,मीडिया को बुलवाते और हो जाता स्वच्छ अभियान … निसंदेह अभियान अच्छा था पर कम जागरुकता और ढुल मुल प्रशासन का रवैया और बात बात पर आखं दिखा कर हडताल करवाने वाले स्वच्छ भारत के जमादार …

आज आलम ये है कि स्वच्छता अभियान मे सफाई करते करते अभियान ही साफ हो कर रह गया …

 

Clean India

 

July 9, 2015 By Monica Gupta

Samsun – Glimpses – Hamse Achha Kaun

Samsun – Glimpses – Hamse Achha Kaun इसके अंर्तगत ढेरों कार्यक्रम बनाए गए और बच्चों को अपनी प्रतिभा निखारने का पूरा मौका दिया गया. जब बच्चे टीवी पर आते और उनके मित्र और अविभावक उन्हे देखते तो उनकी अपनी खुद की पहचान बनती चली गई ….   🙂

 

https://monicagupta.info – Monica Gupta – Glimpses of TV programs by Samsun Creations under talent search & promotion program of DOST at Sirsa, Haryana.

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