Monica Gupta

Writer, Author, Cartoonist, Social Worker, Blogger and a renowned YouTuber

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June 25, 2017 By Monica Gupta Leave a Comment

अच्छे दिन आने वाले हैं – खुशखबरी पर एक कहानी

अच्छे दिन आने वाले हैं

अच्छे दिन आने वाले हैं – खुशखबरी पर एक कहानी – acche din aane wale hai – कई बार हम बात करते हैं खुशखबर की पर क्या वो वाकई में खुशखबरी होती है  क्या वो वाकई में अच्छे दिन आने वाले हैं का संकेत देती है…

अच्छे दिन आने वाले हैं – खुशखबरी पर एक कहानी

मैं सोच ही रही थी कि आज किस बारे में बात करुं तभी बाहर से जोर जोर loudspeaker से आवाज आने लगी … खुश खबरी … आपको ये जानकर खुशी होगी कि आपके शहर में खुल गया है … और बहुत जोर जोर से आवाज आने लगी … ऐसा लगा मानो वो वही रुक गया … मैं सोचने लगी कि इतनी जोर जोर से बजाते हैं आखिर ऐसे मे खुशी किसे होगी … तभी अचानक मुझे याद आ गई एक कहानी जो मैंने कुछ समय पहले लिखी थी … कहानी का नाम भी है खुश खबरी

 

खुश खबरी

अच्छे दिन आ गए … ये कहानी है बहुत साधारण परिवार की. जिसे हम गरीब भी कह सकते है  कुछ ही देर पहले रमेश घर से गया था और आधे ही घंटे में बहुत खुशी खुशी लौट आया..पत्नी हैरान … अरे इतनी जल्दी ???

और पानी देते हुए पूछने लगी कि क्या कहीं नौकरी की बात बनी। पति के चेहरे पर खुशी देखकर उसे लग रहा था कि  कोई ना कोई खुशखबरी है जरूर…।

रमेश ने गिलास एक तरफ रखते हुए उसे अपने पास बैठाया और प्यार से बोला कि अब तो समझो अपने दिन फिर गए हैं। अच्छे दिन आ गए हैं।

रूपी चहकती हुई बोली… कहां बात बनी… कितनी तनख्वाह मिलेगी…। कोई नौकरी नही थी बहुत समय से वो खाली बैठा था …  रमेश ने उसके बालों में हाथ फेरते हुए कहा कि अब तो समझो… रानी बन कर ही राज करोगी… राज…।

जब वो घर से निकला ही था तो सामने से राज पण्डित आ रहे थे। उन से दो चार बात हुईं और वो उसे उनके घर ले गए। जन्मपत्री देखकर उन्होंने बताया है कि बस अब राजयोग बनने ही वाला है।

बस थोड़ी सी दक्षिणा और पूजा का इंतजाम करना है फिर देखना… लक्ष्मी की बरसात होगी… बरसात…। बरसात…। लक्ष्मी की… हूंह… । रूपी… के पास बोलने को कुछ नहीं था, वो चुपचाप उठी और बर्तन मांजने लगी।

क्या ये वाकई में  खुश खबर ही है ???

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June 24, 2017 By Monica Gupta Leave a Comment

हिंदी की बाल साहित्यकार – बाल साहित्य की विधाएँ

अच्छे दिन आने वाले हैं

 हिंदी की बाल साहित्यकार – बाल साहित्य की विधाएँ – बाल साहित्य लेखन हमेशा से बहुत आकर्षित करता है.. सबसे अच्छी बात ये लगती है कि बाल लेखन के समय मन भी बच्चा बन जाता है …

 हिंदी की बाल साहित्यकार – बाल साहित्य की विधाएँ –

देखा जाए तो लगभग 27 साल से सक्रिय हूं । दिल्ली सिटी केबल से अपने कार्य की शुरुआत की.  राष्ट्रीय समाचार पत्र-पत्रिकाओं के साथ-साथ लोटपोट, चंपक, बालहंस, बालभारती, नैशनल बुक ट्रस्ट की न्यूज़ बुलेटिन आदि में इनके लेख, कहानी एवं प्रेरक प्रसंग नियमित रूप से छपते रहे हैं।

इसके साथ-साथ इन्होंने जयपुर और हिसार आकाशवाणी के कई प्रोग्राम में भी भाग  लिया और एकंरिंग  भी की । आकाशवाणी रोहतक से इनके द्वारा लिखित नाटक एवं झलकियां प्रसारित होती रही हैं। बाल नाटक बहुत लिखे जोकि आकाशवाणी में भी प्ररसारित हुुुए 

 अभी तक 8 किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं। दो किताबों को बाल साहित्य सम्मान मिला है हरियाणा साहित्य अकादमी की ओर से … 

 हिंदी की बाल साहित्यकार – बाल साहित्य की विधाएँ –

‘मैं हूं मणि’ को 2009 में हरियाणा साहित्य अकादमी की तरफ से बाल साहित्य पुरस्कार मिला।बच्चों की कहानियों  का सकंलन है.

 ‘काकी कहे कहानी’

 ‘काकी कहे कहानी’ बाल पुस्तक है जो ‘नैशनल बुक ट्रस्ट’ से प्रकाशित हुई है. काकी कहे कहानी  नेशनल बुक ट्रस्ट , इंडिया से प्रकाशित बाल कहानी है. काकी कहे कहानी का प्रकाशन 2011 में हुआ. ये एक ही  छोटी सी कहानी है जिसके मात्र 16 पेज है. कहानी आज के बच्चें की सोच पर आधारित है.

कहानी में काकी शहर में रहने वाले  बच्चें मोहित को  मजेदार मजेदार कहानियां  सुनाना चाहती है ऐसे में क्या मोहित कहानी सुनता है या अपनी मोबाईल और टीवी की दुनिया में ही खोया रहता है या पढाई के बेहद तनाव की वजह से वो कहानी नही सुन पाता … 

बाल पुस्तक ‘अब मुश्किल नहीं कुछ भी’

 एक अन्य बाल पुस्तक ‘अब मुश्किल नहीं कुछ भी’ को भी हरियाणा साहित्य अकादमी की तरफ से अनुदान मिला है।इसमे जानी मानी शख्सियत के साक्षात्कार हैं कि उनका बचपन कैसा था और आज कितनी जबरदस्त उपलब्धियां मिली हैं. अब मुश्किल नही कुछ भी   प्रेरणादायक बाल साहित्य है.सन 2008 में प्रकाशित पुस्तिका को हरियाणा साहित्य अकादमी की तरफ से  अनुदान मिला.

अब मुश्किल नही कुछ भी  …
यह किताब  बच्चों को प्रेरणा और सीख देने के लिए लिखी है पर मैने भी इन सभी शखिसयतो से मिलकर बहुत कुछ सीखा है।  इसमें मेहनत की पटकथा पर जीवन की सफलता की फिल्म रचने वाले दस व्यक्तित्वों की रोचक एवं प्रेरणास्पद कहानियां हैं।

लिम्का बुक आफ रिकार्डस की सम्पादिका श्रीमति विजया घोष, काटूर्निस्ट संकेत गोस्वामी, माऊंट ऐवेरेस्ट फतह करने वाली सुश्री ममता सोढा, भारतोलन मे अर्जुन एर्वाड विजेता श्रीमति भारती सिंह, जिला उपायुक्त और रक्त दान के क्षेत्र मे अलग पहचान बनाने वाले डा0 युद्धवीर सिंह ख्यालिया , निर्माता, निर्देशक सिनेमेटोग्राफर और गायक श्री मनमोहन सिंह, मैनेजेमैंट फंडा के गुरू और लेखन के प्रति समर्पित श्री नटराजन रघुरामन, सुप्रसिद्ध कवि, लेखक प्रोफेसर अशोक चक्रधर, मशहर टेलीविजन अदाकारा सुश्री नेहा शरद जोशी, एक पैर से मैराथान मे हिस्सा ले रहे जाने माने पहले भारतीय ब्लेड रनर  और जाबांज  मेजर देवेन्द्र पाल सिहं।

 ‘वो तीस दिन’ बाल उपन्यास

 ‘वो तीस दिन’ बाल उपन्यास ,नैशनल बुक ट्रस्ट के नेहरू बाल पुस्तकालय की ओर से 2014 में प्रकाशित हुआ है। इस किताब को हरियाणा साहित्य अकादमी की तरफ से  2016 का बाल साहित्य पुरस्कार मिला है.

 

TV पर बच्चों को मोटिवेट करने के लिए ढेर सारे प्रोग्राम बनाएं

 

स्वच्छ्ता पर गाना भी फिल्माया और एक गाना खुद भी लिख कर बच्चोंं पर फिल्माया

 

 

 दैनिक नवज्योति, जयपुर से हर रविवार  लगभग 4 साल तक लागतार ‘दीदी की चिट्ठी’ के नाम से बच्चों के लिए लेख नियमित रूप से छ्पे हैं

इसके अतिरिक्त आजकल यूटयूब पर चैनल पर बच्चों की कहानियां व अन्य मोटिवेशनल विचार देकर प्रेरित करती हैं

 

 

 

 

 

नेशनल बुक ट्र्स्ट की वेबसाईट पर मेरी लिखी किताब का कवर पेज …

अब तक प्रकाशित 8 किताबें

 

सफर जारी है … शेष फिर

June 24, 2017 By Monica Gupta Leave a Comment

जिंदगी जिंदादिली का नाम है

 जिंदगी जिंदादिली का नाम है

जिंदगी जिंदादिली का नाम है… zindagi zindadili ka naam hai – सुख दुख आते जाते रहते है – जिंदगी चलती रहनी चाहिए – सोशल नेट वर्किंग साईट पर एक लडकी से जान पहचान हुई. कल उसका बर्थ डे था तो मैं जब फोन करके उसे विश किया तो उसने ज्यादा खुशी नही दिखाई …

 जिंदगी जिंदादिली का नाम है

मैंने पूछा कि पार्टी के लिए कहां जा रहे हो तो वो बोली कि वो अपना बर्थ डे कभी नही मनाती क्योकि 10 साल पहले उसके अंकल की death  हो गई थी … तब से उसका कोई  बर्थ डे कोई नही मनाता जब भी जन्मदिन आता है सब बस अंकल को ही याद करते हैं सब … उसकी उदासी देख कर मैंने  भी ज्यादा बात नही की और फोन रख दिया पर मुझे याद आई एक कहानी  जो मैंने net  पर पढी थी.

 

कुछ दिन पहले एक एक आदमी की इकलौती  बेटी बीमार पड़ गयी. बहुत कोशिश के बाद भी वो नहीं बच पाई. पिता गहरे शोक में डूब गया और खुद को दुनिया और दोस्तों से दूर कर लिया.

एक रात उसे  सपना आया की वो स्वर्ग में था जहाँ नन्ही परियो का जुलुस जा रहा था. वो सब जलती candle को हाथ में लिए सफ़ेद पोशाक में थी. उनमे से एक लड़की की मोमबत्ती बुझी हुई थी. व्यक्ति ने पास जाकर देखा तो वो उसकी बेटी थी.

उसने अपनी बेटी को दुलारा और पूछा की ‘बेटी तुम्हारी candle में रौशनी क्यों नहीं हैं?’लड़की बोली की ‘पापा ये लोग कई बार मेरी मोमबत्ती जलाते हैं लेकिन आपके आंसुओ से हर बार बुझ जाती हैं.” एकदम से उस आदमी की नीदं खुली और उसे सपने का मतलब समझ आ गया. तब से उसने दोस्तों से मिलना खुश रहना शुरू कर दिया ताकि उसके आंसुओ से उसकी बेटी की candle न बुझे.

कई बार हमारे आंसू और दुःख, हमारे न चाहते हुए भी अपनों को दुःख देते हैं. और वे भी दुखी हो जाते हैं.

 जिंदगी जिंदादिली का नाम है

मूव ऑन आगे बढो … हिम्मत रखो

सुख दुख आते जाते रहते है – जिंदगी चलती रहनी चाहिए

जिंदगी का सच , जिंदगी का कड़वा सच , छोटी छोटी खुशियाँ

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June 23, 2017 By Monica Gupta Leave a Comment

अच्छे स्वास्थ्य का महत्व समझना होगा

जीवन में माता पिता का महत्व

अच्छे स्वास्थ्य का महत्व समझना होगा –  अच्छा स्वास्थ्य महा वरदान – आप क्या कर रहे हो .  स्वास्थ्य ही जीवन है क्या वाकई हम जानते हैंं ? पहला सुख निरोगी काया है. अपनी बात कहने के लिए मैं दो उदाहरण देती हूं  अलग अलग बात के हमारे अलग अलग रिएक्शन होते हैं खुशी की बात पर खुश … उदासी की बात पर उदास और कभी कभी रोना भी आ जाता है पर आज दो बातों को लेकर समझ नही आ रहा कि क्या रिएक्श्न दूं … अगर आप बता सकते हैं जरुर बताईए

अच्छे स्वास्थ्य का महत्व समझना होगा

बात अभी सुबह की है मैं बाहर पौधो को पानी दे रही थी तो एक परिवार पैदल अटैची और बैग लिए जा रहा था दो बच्चे थे और शायद मम्मी और पापा … बच्चों के चेहरे की खुशी बता रही थी कि वो कहीं छुट्टियों में जा रहे हैं.

जाते जाते अचानक वो बिल्कुल घर के सामने रुके आदमी बोला कि मैं कुछ भूल गया … तुम चलो धीरे धीरे मैं आता हूं … महिला ने कहा कि वो यही रुक कर इंतजार कर लेते हैं पर वो बोले कि कोई नही तुम चलो मैं अभी आया … जब मैंने अगले ही पल देखा तो वो दीवार के साथ लग कर सिग्रेट पी रहा था…

 

अब बताईए इस बात पर मेरा क्या रिएक्शन होना चाहिए झूठ बोल कर अपने परिवार को भेजा पर नुकसान किसका .. ??

आप क्या कर रहे हो

अब एक बात और सुनिए कि घर के सामने पार्क है और दो दिन से बहुत रौनक थी पार्क में बहुत लोग आ रहे थे कि योग दिवस है … फोटो भी करवाई … पर आज वो पार्क सूनसान पडा था.. इक्का दुक्का लोग ही थे …

अब ऐसे में क्या प्रतिक्रिया होनी चाहिए … लोगो की ऐसी सोच देख कर हंसी भी आ रही है और मन भी उदास हो जाता है कि इतने लापरवाह किसलिए हैं हम …

अपनी सेहत का ख्याल किसलिए नही रखते … हम अपने स्वास्थय की महत्ता समझते किसलिए नही हैं.. अगर सिग्रेट बुरी है तो बुरी है अगर योग करना व्यायाम करना अच्छा है तो अच्छा है रोज करना चाहिए किसी खास दिन की इंतजार नही करनी चाहिए……

यही बात थी कि मुझे समझ नही आ रहा कि कि क्या रिएक्शन होना चाहिए … समझ आ रही है तो बस एक बात कि अपना ख्याल रखिए अपनी सेहत का ख्याल रखिए …

पहला सुख निरोगी काया है … इसको समझिए

कैसे हो आप , आप क्या कर रहे हो.

स्वास्थ्य ka mahatva , अच्छे स्वास्थ्य का महत्व, स्वास्थ्य ही जीवन है, आप क्या कर रहे हो ,

June 22, 2017 By Monica Gupta Leave a Comment

नेशनल बुक ट्र्स्ट से प्रकाशित बाल उपन्यास वो तीस दिन

नेशनल बुक ट्र्स्ट से प्रकाशित बाल उपन्यास वो तीस दिन

नेशनल बुक ट्र्स्ट से प्रकाशित बाल उपन्यास वो तीस दिन – नेशनल बुक ट्र्स्ट में किताब छपना तो अपने में ही गर्व की बात है पर उससे भी ज्यादा खुशी आज ये देख कर हुई कि मेरी लिखी किताब “वो तीस दिन” जिसे हाल ही में हरियाणा साहित्य अकादमी की ओर से बाल साहित्य सम्मान भी मिला है उस किताब का कवर पेज नेशनल बुक ट्र्स्ट की वेवसाईट के कवर पर है..

नेशनल बुक ट्र्स्ट से प्रकाशित बाल उपन्यास वो तीस दिन

नेशनल बुक ट्र्स्ट से प्रकाशित बाल उपन्यास की पहली आवृति “वो तीस दिन” 2014 में प्रकाशित हुआ था और अब नए सिरे से 2017 में प्रकाशित हुआ है…

 

बाल साहित्य में एक और उपलब्धि – बाल साहित्य सम्मान – Monica Gupta

बाल साहित्य में एक और उपलब्धि -हरियाणा साहित्य अकादमी की ओर से 2015 का “बाल साहित्य पुरस्कार” मेरी किताब “वो तीस दिन” को मिला नेशनल बुक ट्र्स्ट से प्रकाशित read more at monicagupta.info

बाल उपन्यास की मुख्य पात्रा है कक्षा दस ने पढने वाली मणि. जोकि किसी भी बच्चे की तरह बेहद शरारती चुलबुली है पर कक्षा दस की परीक्षा खत्म होने के बाद नतीजा आने से पहले तीस दिनों में ऐसा क्या होता है कि मणि के एक जबरदस्त बदलाव आ जाता है…

कहानी बेहद रोचक, मनोरंजक और शिक्षाप्रद है. और नेशनल बुक ट्र्स्ट की साईट पर ऑनलाईन भी उपलब्ध है..

बाल साहित्य में एक और उपलब्धि – बाल साहित्य सम्मान

वो तीस दिन

एक झलक कहानी की

मै हूँ मणि। आज मेरी दसवीं क्लास की बोर्ड़ परीक्षा का आखिरी दिन है। हे भगवान! कितनी टेन्शन थी ना………। आज पता है मैं घर जाकर सबसे पहले क्या करूंगी। शर्त लगा लो आप लोग बता ही नहीं सकते। मैं सबसे पहले टेलिविज़न चलाऊंगी और दो महीने से जो पिक्चरें मैंने नहीं देखी वो देखूंगी और अपने मोबार्इल पर आए मैसेज पढूंगी। पता है पिछले दो महीनों से मम्मी-पापा ने मुझे कुछ भी नहीं करने दिया बस…………..पढ़ार्इ………..पढ़ार्इ………पढ़ार्इ……… इस करके………. आज मैं ढे़र सारी मनमानी करने वाली हूं।
उफ……….शुक्र है………. आज आखिरी पेपर उम्मीद के अनुसार ठीक ही हो गया अब तो जल्दी थी घर पहुंचने की।

मैं रास्ते में जा रही थी कि मेरे सामने वाली सड़क पर एक स्मार्ट सी युवती, छोटे-छोटे बालों वाली, आंखों में धूप का चश्मा लगाए, बैग कन्धे पर लटकाए सड़क पार कर रही थी कि शायद उसका पांव फिसल गया या पता नहीं………..क्या हुआ………पर वो बहुत बुरी तरह से गिर गर्इ।

पता नहीं उसे देखकर मेरी बहुत बुरी तरह हंसी निकल गर्इ और मैं ठहाका लगाती ताली बजाक

हिंदी बाल साहित्य लेखक – हरियाणा साहित्य अकादमी पुरस्कार

June 22, 2017 By Monica Gupta Leave a Comment

मेरे मन की बात ये है

 जिंदगी जिंदादिली का नाम है

मेरे मन की बात ये है … कोई मन की बात कहता या सुनता है तो जहन में मोदी जी का नाम आना स्वाभाविक है. कल योग  दिवस के दौरान बरसात हुई तो मोदी जी ने कहा कि योग के फायदे तो जानता हूं पर योग मैट का फायदा आज पता चला कि बारिश आ जाए तो छ्तरी बन सकता है … सुनकर हंसी आ गई … वाकई …

मेरे मन की बात ये है

लगातार हो रही बारिश को लेकर भी पीएम नरेंद्र मोदी ने चुटकी ली कि बारिश आ जाए तो योग मैट का कैसे प्रयोग हो लोगों ने बता दिया है. 

वैसे एक बात तो माननी पडेगी कि मोदी जी निसंदेह अन्य नेताओ से अलग है… उसका कारण ये है कि नेताओ ने प्रोजेक्ट तो बडे बडे चलाए पर जमीनी स्तर पर खुद उतर कर काम नही किया वहीं मोदी जी ने न सिर्फ स्वच्छता अभियान के दौरान झाडू पकडी वही सेहत को लेकर भी जागरुक बनाने का भरसक प्रयास किया …

जिसका जीता जागता उदाहरण है योग दिवस … वो अलग बात है कि लोगो में जगरुकता किसी भी क्षेत्र में नही आ रही … पता नही वो सचेत नही है या सोच ये है कि हम तो किसी अन्य पार्टी से हैं तो हम किसलिए उनका समर्थन करें …

पर कार्य तो किया है चाहे वो नोट बंदी का हो, लाल बत्ती कल्चर का बंद करना  हो  , स्वच्छता का मामला हो या सेहत से जुडा … !!बेशक बहुत बातें नापसंद भी हैं … !! पर पर पर …

जिस नेता की जो बात अच्छी लगे उसका समर्थन जरुर करना चाहिए क्योकि ऐसा करने से हमारा देश आगे बढता है और हमारा नाम होता है !! चाहे वो केजरीवाल जी हों, राहुल बाबा हों या कोई अन्य नेता …

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