Monica Gupta

Writer, Author, Cartoonist, Social Worker, Blogger and a renowned YouTuber

  • About Me
  • Blog
  • Contact
  • Home
  • Blog
  • Articles
    • Poems
    • Stories
  • Blogging
    • Blogging Tips
  • Cartoons
  • Audios
  • Videos
  • Kids n Teens
  • Contact
You are here: Home / Blog

February 13, 2018 By Monica Gupta Leave a Comment

How to Improve Yourself – खुद को बेहतर कैसे बनाएं – Make Yourself a Better Person

How to Improve Yourself

How to Improve Yourself – खुद को बेहतर कैसे बनाएं – Make Yourself a Better Person – Monica Gupta – Personality development पर हम  बहुत बार बात करते हैं.. बहुत बातों की तो जानकारी हमें होती है जैसे कि दूसरे के कैसे बात करें , अपनी बॉडी लेग्वेज क्या हो.. दूसरों की सुननी चाहिए. आई कोंटेक्ट बना कर रखना चाहिए  पर क्या कभी हमने personal growth  कैसे हो इस बारे में विचार किया है… ये भी एक तरह से personal development की एक स्टेज है कि हमारी ग्रोथ कैसे हो… किन बातों का ख्याल रखें

Know yourself

हम अपने बारे में कितना जानते हैं ??  अपने बारे में क्या ?? तो सबसे पहले बात आती है हमें अपने बारे में जानकारी होना…’’क्या जानकारी कि हमारी कमजोरी क्या है हमारी ताकत क्या है… जो कमी है उसे दूर करना और जो ताकत है उसे हथियार बनाना.. सबसे पहले अपने बारे में जानिए … मुश्किल है पर एक बार आपने अपनी ताकत अपनी कमजोरी को जान लिया तो आप मे बहुत जबरदस्त पॉजिटिव बदलाव आ जाएगा…

Goal Setting

एक goal तो होता ही है हम सभी की जिंदगी में.. अगर नही है तो बनाईए.. जैसा कि मान लीजिए मेरा ये goal है इस महीने मैंनें किसी से झगडा नही करना… goal बनाना है और उस पर अडिग भी रहना है… Baby Steps लीजिए.. दो दिन करके देखिए

Planning और Organizing

पर कैसे… किस समय गुस्सा आता है… उस पर काम करना है कि कैसे और बेहतर करु.. यानि गुस्सा न आए… खुश कैसे रहू इस पर काम करना है… यानि प्लान भी बनाना है और उसे सही रुप भी देना है

Get better every day

हर रोज इस पर काम करना है कैसे… अच्छी किताबे पढनी है अच्छी संगत में रहना है.. किसी की बुराई नही करनी..

Get out of your comfort zone

थोडा सा कम्फर्ट जोन से बाहर आ जाईए.. हमे आसान लगता है कि बच्चे की पिटाई करो पर जब बात आती है कि गुस्सा मत करो सब्र करो तो मुश्किल लगता है कि कैसे करेंगें… जबकि एक बार हम अपने कम्फर्ट जोन से बाहर आ गए और हमने खुद पर कंट्रोल कर लिया तो सब अच्छा लगने लगेगा… घर में शांति भी रहेगी और प्यार भी रहेगा..

हम अपनी क्षमता पहचान लेंगें

थोडी ही हिम्मत करेंगें और थोडी सी मेहनत करेंगें तो हम अपनी अपनी क्षमता potential को पहचान लेंगें.. और फिर देखिए कितना अच्छा अहसास होगा.. एक बच्चा है वो कई बार हकलाता है तो उसकी मम्मी क्या करती है कि उसे बार बार बुलवाती है.. अखबार पढवाती है उसकी आवाज रिकार्ड करवाती है और फिर वो बिल्कुल ठीक हो गया..  कैसे किया बच्चा इस डर से बाहर निकला कि नही हो सकता.. मम्मी ने मेहनत करवाई और आज वो दूसरे बच्चों की तरह है… और एक उदाहरण है… तो अपनी क्षमता पहचानी .. कब जब डर का सामना किया…

Self-Growth

और जब ये सब हो रहा है… आप ने जो सोचा आप उसमे स्फलता पा रहे हो उसका रिजल्ट अच्छा मिल रहा है तो आपकी सेल्फ ग्रोथ हो रही है.. personal growth हो रही है फिर वो कहते हैं ना , the sky is the limit.. आप और कुछ करिए और आगे उसे भी एचिव कीजिए !! अच्छे इंसान बन जाएगें और प्रेरणा भी

बस जरुरत इस बात की है कि हार नही माननी.. खुश रहिए और बैलेंस बना कर चलिए लगे रहिए एक न एक दिन जरुर सफलता हासिल होगी.. अपने माईंस पोईट पता होना ही सबसे बडा प्लस पोईंट होता है…

How to Improve Yourself – खुद को बेहतर कैसे बनाएं – Make Yourself a Better Person – Monica Gupta

February 12, 2018 By Monica Gupta Leave a Comment

Raising a Son and a Daughter – Differences between Raising a Son and a Daughter – Gender Inequality in India – Monica Gupta – 

Raising a Son and a Daughter

Raising a Son and a Daughter – Differences between Raising a Son and a Daughter – Gender Inequality in India – Monica Gupta – Differences between Raising a Son and a Daughter – A lot of writers are writing more about something we have noticed in raising a son and a daughter… sexism hurts everyone. कल एक जानकार के घर गई हुई थी. उनकी बेटी 5 क्लास में है वो वही बैठी होमवर्क कर रही थी.. और बेटा 8 क्लास में है वो वही बैठा हमारी बातें सुन रहा था…

Raising a Son and a Daughter – Differences between Raising a Son and a Daughter – Gender Inequality in India

उसने अपनी बेटी को दो बार आवाज देकर बोला मीनू पानी ले आओ आंटी के लिए… उसी बीच में उनका बेटा भी बोला हां , मेरे लिए भी पानी ले आना… मेरी जानकार भी हंसने लगी कि अपने पापा जैसा हुक्म चलाता है… वो पढाई में जुटी हुई थी.. वो जैसे ही उठने को हुई  मैंने मना किया कि नही चाहिए आप पढो, पर मेरा ध्यान इस बात पर था कि बजाय अपने बेटे को पानी लाने के लिए कहने के वो उसे स्पोर्ट कर रही हैं…

हम अकसर कहते तो हैं कि दूसरे बच्चों से तुलना नही करनी चाहिए पर ये अंतर या भेदभाव जो हम कर रहे हैं उसका क्या…

बच्चों की परवरिश में बचपन से ही माता पिता को इस बात का ख्याल रखना बहुत जरुरी होना चाहिए… वैसे कई बार अगर पिता अपनी बेटी को बोल्ड बनाने की कोशिश करते हैं मम्मी ही टोक देती हैं कि क्या कर रहे हो लडकी है… तो इस चीज से बाहर निकल ही होगा.. या फिर अगर मम्मी पापा दोनों बेटा बेटी में फर्क नही करते तो कई बार घर के बडे बुजुर्ग लडकी का वास्ता देकर चुप करवा देते हैं.. सोच बदलनी होगी..  male dominate सोसाईटी की सोच से बाहर निकलना होगा…

बचपन से ही अगर ये भेद भाव हम उनके मन में डाल देंगें तो बडे होते होते तो उनकी सोच वैसी ही हो जाएगी. बडे होकर एक बहुत बडी दीवार बन जाएगी..

मैं कुछ उदाहरण बताती हूं जो आमतौर पर देखने में आते हैं..

एक तो यही कि घर के काम बेटे से करवाने में शर्म लगती है… जबकि ये सोच सही नही है

बेटी होने पर नजरें झुक जाती है.. और जहां दो या तीन बेटिया हो जाएं तो खुद को ही कोसने लगती हैं.. ये तभी हुआ है जब हम भेदभाव करते है.. अभी दो दिन पहले ही खबर देखी कि 6 महीने की बच्ची सडक पर पडी मिली. और ये भेदभाव ही वजह है.. और ये खबरें आम है..

बेटे को स्कूटर , कार सीखा देंगे बेटी को नही सीखाएंगे कि इसने कौन सा बाहर जाना है..

अकसर बेटे के लिए बोलेंगें ये है मेरा शेर बेटा… और बेटी ने कितना भी बहादुरी का काम क्यो न किया हो उसे शेर बच्चा नही बोलेगें… वो गुडिया ही है… और फिर बेटा बहुत चुटकी लेता है कि दीदी तो छुई मुई है… दीदी से कुछ नही हो सकता…

स्कूल की पिकनिक होगी तो भी बेटे को तुरंत पैसे निकाल कर दे देंगें और बेटी को साफ मना कर देंगें कि नही जाना…

बेटा किसी बात पर रोएगा तो झट से बोल देंगें क्या लडकी ही तरह रो रहे हो… जब हम खुद ही कमजोर बना कर रखेंगें तो लडकी को बोल्ड कैसे बनाएंगें..

बेटी को पढाई तो करवा देंगें पर जब नौकरी की बात आएगी तो नही … नौकरी नही करनी बस घर के काम सीख…

20 22 की होते ही बोझ समझने लगते हैं… बस कैसे भी करके विदा करो लोग क्या कहेंगें… पता नही क्या कमी है कि शादी नही हो रही…

अगर घर में बेटा एक बेटी है या बेटियां ही हैं उन्हें बचपन से ही बोल्ड बनाना चाहिए… लिंग भेद नही करना चाहिए.. दोनो को समान रुप से प्यार और समान अधिकार देने चाहिए ये तभी होगा जब माता पिता अंतर नही करना सीखाएगें.. समान समझेंगें … !! तभी हमारा समाज एक अच्छा समाज बनेगा… शुरुआत अपने घर से करनी होगी…

Raising a Son and a Daughter – Differences between Raising a Son and a Daughter – Gender Inequality in India – Monica Gupta –

February 11, 2018 By Monica Gupta Leave a Comment

Mahashivratri Katha – Learn from Lord Shiva – कहानी महाशिवरात्रि की – महाशिवरात्रि विशेष – Shivaratri Special – Monica Gupta

Mahashivratri Katha

Mahashivratri Katha – Learn from Lord Shiva – महाशिवरात्रि विशेष – Shivaratri Special – Monica Gupta – कुछ कहानियां बहुत रोचक होती हैं तो कुछ प्रेरक.. और अगर कहानी भगवान से जुडी हो तो बहुत कुछ सीखते भी हैं.. कल मैंनें महाशिवरात्रि की बहुत ही अच्छी कहानी नेट पर पढी.. सोचा बहुत अच्छी है ये जरुर आपसे शेयर करती हूं…

Mahashivratri Katha – Learn from Lord Shiva – कहानी महाशिवरात्रि की – महाशिवरात्रि विशेष – Shivaratri Special –

महाशिवरात्रि’ की बात करुं इस बारे में भिन्न – भिन्न मत हैं, कुछ विद्वानों का मत है कि आज के ही दिन शिवजी और माता पार्वती विवाह-हुआ था जबकि कुछ विद्वान् ऐसा मानते हैं कि आज के ही दिन शिवजी ने ‘कालकूट’ नाम का विष पिया था जो सागर मंथन के समय समुद्र से निकला था | ज्ञात है कि यह समुद्रमंथन देवताओं और असुरों ने अमृत-प्राप्ति के लिए किया था |

एक शिकारी की कथा भी इस त्यौहार के साथ जुड़ी हुई है कहते हैं कि एक बार पार्वती ने भगवान शिवशंकर से पूछा, ‘ऐसा कौन सा श्रेष्ठ तथा सरल व्रत-पूजन है, जिससे मनुष्य आपकी कृपा आपका आशीर्वाद सहज ही प्राप्त कर लें ??

ये कथा नेट से ली गई है …

उत्तर में शिवजी ने पार्वती को ‘शिवरात्रि’ के व्रत का विधान बताकर यह कथा सुनाई- ‘

एक गाँव में एक शिकारी रहता था। पशुओं की हत्या करके वह अपने परिवार  को पालता था। वह एक साहूकार का ऋणी था, पर उसका ऋण समय पर न चुका सका। गुस्से में साहूकार ने शिकारी को शिवमठ में बंदी बना लिया। संयोग से उस दिन शिवरात्रि थी।

शिकारी ध्यानमग्न होकर शिव संबंधी धार्मिक बातें सुनता रहा। चतुर्दशी को उसने शिवरात्रि की कथा भी सुनी। संध्या होते ही साहूकार ने उसे अपने पास बुलाया और ऋण चुकाने के विषय में बात की।

शिकारी अगले दिन सारा ऋण लौटा देने का वचन देकर बंधन से छूट गया। अपनी दिनचर्या की भाँति वह जंगल में शिकार के लिए निकला, लेकिन दिनभर बंदीगृह में रहने के कारण भूख-प्यास से व्याकुल था। शिकार करने के लिए वह एक तालाब के किनारे बेल वृक्ष पर पड़ाव बनाने लगा। बेल-वृक्ष के नीचे शिवलिंग था जो बिल्वपत्रों यानि  बेल पत्र से ढँका हुआ था। शिकारी को उसका पता न चला।

पड़ाव बनाते समय उसने जो टहनियाँ तोड़ीं, वे संयोग से शिवलिंग पर गिरीं। इस प्रकार दिनभर भूखे-प्यासे शिकारी का व्रत भी हो गया और शिवलिंग पर बेलपत्र भी चढ़ गए।

एक पहर रात्रि बीत जाने पर एक गर्भिणी मृगी तालाब पर पानी पीने पहुँची। शिकारी ने धनुष पर तीर चढ़ाकर ज्यों ही प्रत्यंचा खींची, मृगी बोली, ‘मैं मां बनने वाली हूं । तुम एक साथ दो जीवों की हत्या करोगे, जो ठीक नहीं है। मैं अपने बच्चे को जन्म देकर शीघ्र ही तुम्हारे सामने प्रस्तुत हो जाऊँगी, तब तुम मुझे मार लेना।’ शिकारी ने प्रत्यंचा ढीली कर दी और मृगी झाड़ियों में लुप्त हो गई।

कुछ ही देर बाद एक और मृगी उधर से निकली। शिकारी की प्रसन्नता का ठिकाना न रहा। समीप आने पर उसने धनुष पर बाण चढ़ाया। तब उसे देख मृगी ने विनम्रतापूर्वक निवेदन किया, ‘हे पारधी ! मैं थोड़ी देर पहले ही ऋतु से निवृत्त हुई हूँ। कामातुर विरहिणी हूँ। अपने प्रिय की खोज में भटक रही हूँ। मैं अपने पति से मिलकर शीघ्र ही तुम्हारे पास आ जाऊँगी।

‘शिकारी ने उसे भी जाने दिया। दो बार शिकार को खोकर उसका माथा ठनका। वह चिंता में पड़ गया। रात्रि का आखिरी पहर बीत रहा था। तभी एक अन्य मृगी अपने बच्चों के साथ उधर से निकली शिकारी के लिए यह स्वर्णिम अवसर था। उसने धनुष पर तीर चढ़ाने में देर न लगाई, वह तीर छोड़ने ही वाला था कि मृगी बोली, ‘हे पारधी! मैं इन बच्चों को पिता के हवाले करके लौट आऊँगी। इस समय मुझे मत मार।’

शिकारी हँसा और बोला, ‘सामने आए शिकार को छोड़ दूँ, मैं ऐसा मूर्ख नहीं। इससे पहले मैं दो बार अपना शिकार खो चुका हूँ। मेरे बच्चे भूख-प्यास से तड़प रहे होंगे।’उत्तर में मृगी ने फिर कहा, ‘जैसे तुम्हें अपने बच्चों की ममता सता रही है, ठीक वैसे ही मुझे भी, इसलिए सिर्फ बच्चों के नाम पर मैं थोड़ी देर के लिए जीवनदान माँग रही हूँ।

हे पारधी! मेरा विश्वास कर मैं इन्हें इनके पिता के पास छोड़कर तुरंत लौटने की प्रतिज्ञा करती हूँ।’मृगी का दीन स्वर सुनकर शिकारी को उस पर दया आ गई। उसने उस मृगी को भी जाने दिया। शिकार के आभाव में बेलवृक्ष पर बैठा शिकारी बेलपत्र तोड़-तोड़कर नीचे फेंकता जा रहा था। पौ फटने को हुई तो एक हष्ट-पुष्ट मृग उसी रास्ते पर आया। शिकारी ने सोच लिया कि इसका शिकार वह अवश्व करेगा।

शिकारी की तनी प्रत्यंचा देखकर मृग विनीत स्वर में बोला,’ हे पारधी भाई! यदि तुमने मुझसे पूर्व आने वाली तीन मृगियों तथा छोटे-छोटे बच्चों को मार डाला है तो मुझे भी मारने में विलंब न करो, ताकि उनके वियोग में मुझे एक क्षण भी दुःख न सहना पड़े।

मैं उन मृगियों का पति हूँ। यदि तुमने उन्हें जीवनदान दिया है तो मुझे भी कुछ क्षण जीवनदान देने की कृपा करो। मैं उनसे मिलकर तुम्हारे सामने उपस्थित हो जाऊँगा।

‘मृग की बात सुनते ही शिकारी के सामने पूरी रात का घटना-चक्र घूम गया। उसने सारी कथा मृग को सुना दी। तब मृग ने कहा, ‘मेरी तीनों पत्नियाँ जिस प्रकार प्रतिज्ञाबद्ध होकर गई हैं, मेरी मृत्यु से अपने धर्म का पालन नहीं कर पाएँगी। अतः जैसे तुमने उन्हें विश्वासपात्र मानकर छोड़ा है, वैसे ही मुझे भी जाने दो। मैं उन सबके साथ तुम्हारे सामने शीघ्र ही उपस्थित होता हूँ।’

उपवास, रात्रि जागरण तथा शिवलिंग पर बेलपत्र चढ़ाने से शिकारी का हिंसक हृदय निर्मल हो गया था। उसमें भगवद् शक्ति का वास हो गया था। धनुष तथा बाण उसके हाथ से सहज ही छूट गए। भगवान शिव की अनुकम्पा से उसका हिंसक हृदय कारुणिक भावों से भर गया। वह अपने अतीत के कर्मों को याद करके पश्चाताप की ज्वाला में जलने लगा।

थोड़ी ही देर बाद मृग सपरिवार शिकारी के समक्ष उपस्थित हो गया, ताकि वह उनका शिकार कर सके, किंतु जंगली पशुओं की ऐसी सत्यता, सात्विकता एवं सामूहिक प्रेमभावना देखकर शिकारी को बड़ी ग्लानि हुई। उसके नेत्रों से आँसुओं की झड़ी लग गई। उस मृग परिवार को न मारकर शिकारी ने अपने कठोर हृदय को जीव हिंसा से हटा सदा के लिए कोमल एवं दयालु बना लिया।देव लोक से समस्त देव समाज भी इस घटना को देख रहा था। घटना की परिणति होते ही देवी-देवताओं ने पुष्प वर्षा की। तब शिकारी तथा मृग परिवार मोक्ष को प्राप्त हुए।’

 

 

 बेल पत्र से जुड़ी खास बातें, बिल्व पत्र शिवजी को विशेष प्रिय हैं… ये रोज शिवलिंग पर चढ़ाना चाहिए…

शिवकथा का संदेश यही है कि महादेव तो अनजाने में किए गए व्रत का भी फल दे देते हैं। पर वास्तव में महादेव शिकारी की दया भाव से प्रसन्न हुए। अपने परिवार के कष्ट का ध्यान होते हुए भी शिकारी ने मृग परिवार को जाने दिया।

इस कथा में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस कथा में ‘अनजाने में हुए पूजन’ पर विशेष बल दिया गया है। इसका अर्थ यह नहीं है कि शिव किसी भी प्रकार से किए गए पूजन को स्वीकार कर लेते हैं अथवाभोलेनाथ जाने या अनजाने में हुए पूजन में भेद नहीं कर सकते हैं।

वास्तव में वह शिकारी शिव पूजन नहीं कर रहा था। इसका अर्थ यह भी हुआ कि वह किसी तरह के किसी फल की कामना भी नहीं कर रहा था। उसने मृग परिवार को समय एवं जीवन दान दिया जो कि शिव पूजन के समान है। शिव का अर्थ ही कल्याण होता है। उन निरीह प्राणियों का कल्याण करने के कारण ही वह शिव तत्व को जान पाया तथा उसका शिव से साक्षात्कार हुआ।

Mahashivratri Katha – Learn from Lord Shiva – कहानी महाशिवरात्रि की – महाशिवरात्रि विशेष – Shivaratri Special – Monica Gupta

February 10, 2018 By Monica Gupta Leave a Comment

Parenting Challenges – Be Smart to Raise Your Kids Smart – Parenting Tips in Hindi – Monica Gupta

Parenting Challenges

Parenting Challenges – Be Smart to Raise Your Kids Smart – Parenting Tips in Hindi – Monica Gupta – Most Common Parenting Problems या challenges- Parenting  कैसा अनुभव है ?? जब मैं ये बात कुछ पेरेंटस से पूछ्ती हूं तो कुछ का जवाब होता है वाव बहुत ही अच्छा खूबसूरत और बहुत सारे Parenting का कहना होता है.. हे भगवान !! बच्चे सुनते ही नही… दुखी कर देते हैं…

Parenting Challenges – Be Smart to Raise Your Kids Smart – Parenting Tips in Hindi –

देखिए Parenting एक तरह का चैलेंज है… और इसे जितने patience से patiently डील करेंगें  cool  रहेंगें बच्चा उतना ही समझदार बनेगा..

चलिए आज कुछ बहुत प्रोब्लम या चैलेंज जिनसे लगभग हर माता पिता फेस करते हैं और उनके सोल्यूशन क्या हैं…

1.बच्चा जिद्दी है कहना नही मानता –  tantrums नखरे

मान लीजिए आप मार्किट गए हैं और बच्चा सडक पर लेट कर जिद करने लगा कि उसे  खिलौना चाहिए ही चाहिए ??

जब ऐसी situation आ जाए तो सबसे पहले खुद को एक दम कूल रखना है.. patience रखनी हैं…

पहले बच्चे को बोलिए अगर वो इस तरह से रोएगा तो उसे कुछ नही मिलेगा.. पहले उठो और मेरे पास आओ और प्यार से बताओ…  उस समय लेक्चर नही देना.. एक बार तो आपको उस जगह से निकल जाना चाहिए फिर घर आकर जब बच्चे का मूड अच्छा हो तब उसे समझाना चाहिए… कि ये तरीका सही नही है.. मान जीजिए उसके पास वैसे बहुत खिलौने हैं तो बोलिए ये तो हैं पर अगर वो फिर भी जिद करे तो बोलिए कि पहले ये खिलौना किसी किसी को दो तभी नया लेकर आएगें… पेरेंटस ही कई बार बचने के लिए मांग पूरी कर देते हैं तो एक रुल बना लेना चाहिए कि जो भी चाहिए आराम से मागोगें तो और उसकी जरुरत होगी तो जरुर मिलेगा..

कई बार बच्चे की हर बात मान ली जाती है इसलिए वो बात बात पर जिद करता है तो बच्चे को इस बात को समझा देना चाहिए कि आपकी हर बात नही मानी जाएगी..

2 भाई बहन की आपस में लड़ाई..

मान लीजिए एक परिवार है और भाई बहन हैं आठ दस साल के और लड़ाई हो रही है… क्या करना चाहिए कि

सबसे पहले तो खुद शांत रहें वजह जाने की बात है क्या… छोटी छोटी लड़ाई हो तो बीच में आने की भी जरुरत नही बच्चे खुद कर लेते हैं सुलह..

फिर किसी एक का पक्ष न लें और जज बन कर फैसला भी न सुना दें.. पर अगर आना भी पडे तो पहले दोनों तरफ की बात सुननी है और फिर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना है. तुलना भी नही करनी कि पडोसी के वर्मा जी का बच्चा कितना अच्छा है या… \

3 बच्चा पढ़ता नही… स्कूल से आया है चलो पढ़.. होमवर्क करो, learn करो.. बच्चे पर दवाब बनाने के ली पढ़ पढ़… बात को समझता है मोबाईल की अच्छी समझ है.. बस पढ़ाई नही करता..

तो आप कारण जानने की कोशिश कीजिए… क्या वजह है.. क्या घर का माहौल सही नही या उसे टेबल नही मिली… उसका टाईम टेबल बनाईए और जब पढ़ाई कर रहा हो आप उसके लिए समय निकालिए.. खुद टीवी या फोन करना बंद कर दीजिए और उसे महसूस करवाईए कि अगर समझ नही आया तो मैं हूं आपके पास.. उसके अंदर आत्मविश्वास पैदा करे। उसको डांटने के बजाए प्यार से समझाए..

किस चीज में ज्यादा इंटर्स्ट है उस बात से जोड कर समझा सकते हैं

प्रैशर से बात नही बनेगी… कि दवाब दे कर पढने बैठा देगें फिर वो दिखावा ही होगा..

बच्चे को आराम से समझाए और पढाई की महत्ता भी समझाएं

तल्खी से टीवी बंद करके खेल बंद करके भी कोई फायदा नही…

टीवी का बहुत शौकीन है या सारा समय mobile करता है

कुछ भी कहने से पहले खुद देखिए कि आप कितना टीवी देखते हैं या मोबाईल करते हैं..

4.  बच्चा खाना नही खाता तो. Poor Eating Habits

जबरदस्ती नही करनी और ठूस ठूस कर नही खिलाना… बच्चे में शौक पैदा करना है कैसे एक डाईट चार्ट मील प्लानबना कर .. और वो किचन में या फ्रिज पर लगा देना है… बच्चों को मार्किट लेकर जाईए उनकी पसंद की सब्जी खरीदिए… जिसमे फल भी हों और पूरा पौष्टिक आहार हो… खेल खेल में और बच्चे को किचन मे ले जाकर वही बैठा दीजिए develop a taste कि देखो कैसे बनता है..  पर जल्दी बनाने के चक्कर में junk food खिलाना मार्किट से आर्डर करना सही नही है…

5. Electronic Gadgets  की addiction

बहुत शौक है सारा दिन मोबाईल करता रहता है या टीवी ही देखता रहता है… वीडियो गेम खेलता रहता है… मना नही करना क्योकि ये चीजे भी आनी जरुरी हैं

पर टाईम फिक्स कर दीजिए.. टाईम टेबल बना दीजिए…

एक नियम बना दीजिए कि खाने के समय नही टीवी नही चलेगा या टीवी देखते हुए मोबाईल नही खेलना…

और इसके साथ साथ ध्यान हटाने के लिए interesting hobbies  और activities करवाईए

6. बच्चा झूठ बहुत बोलता है…

बहुत बार तो पता नही चलता पर जब पता चलता है कि बच्चे ने झूठ बोला तो बहुत गुस्सा आता है तो वही patience रखनी है.. मारना नही … कारण जानने की कोशिश कीजिए कि चोरी किसलिए की… उसे बताईए कि ये सही नही है… कुछ उदाहरण दीजिए कहानी के माध्यम से समझाईए और जब बच्चा लगे की अब झूठ नही बोल रहा तो उसे शाबाशी भी दीजिए..

पेरेंटस रोल मॉडल होते हैं.. उन्हें अच्छा उदाहरण बनना चाहिए… गलती उनकी भी नही है नए नए मम्मी पापा बने होते हैं .. जिंदगी में बहुत रिस्पोसेबिल्टी आ जाती है… पर जरुरत है संयम से काम लेने की… और कारण जानने की और उस पर काम करने की…

Be Smart to Raise Your Kids Smart

February 8, 2018 By Monica Gupta Leave a Comment

Stop Being Tired All The Time – महिलाएं अपना ख्याल रखें – Tiredness and fatigue – how to beat it

Stop Being Tired All The Time

Stop Being Tired All The Time – महिलाएं अपना ख्याल रखें – Tiredness and fatigue – how to beat it – Why it happens – How to overcome दो दिन पहले एक जानकार घर आई हुई थी… बात भी कर रही थी और उबासी भी ले रही थीं… बहुत ज्यादा चीयरफुल भी नही लगी… जब मैंनें पूछा तो उन्होनें बताया कि सारा दिन थका थका सा शरीर रहता है कुछ करने का मन नही करता… drowsiness सुस्ती सी रहती है… इस वजह से घर भी सारा डिस्टर्ब हो रहा है…

Stop Being Tired All The Time – महिलाएं अपना ख्याल रखें – Tiredness and fatigue

मैंने वैसे ही पूछा कि कोई तनाव वाली बात तो नही… वो बोली नही बस तनाव इसी बात का है कि मुझे हो क्या रहा है…

मैंनें उनसे पूछा कि हीमोग्लोबिन कितना है ?? वो बोली कि ये क्या होता है… पता नही… तो मैंनें कहा कि एक बार घर जाते जाते किसी भी लेब से चैक करवा लेना… शाम को उनका फोन आया कि 8 ग्राम है… अब बताईए जब खून ही नही होगा energy ही नही होगी तो शरीर कैसे काम करेगा… ये तो एक कारण था और भी बहुत कारण हो सकते हैं जब हमे थकावट होती है… मनोवैज्ञानिक, शारीरिक , बाहरी कारण भी हो सकते हैं… जिसमे मुख्य हैं तनाव, खून की कमी या ,

मैं बहुत ज्यादा बात की गहराई में नही जाऊंगी… बहुत सारे कारणॉं में कुछ कारण वजह बनते हैं जैसाकि जब हमें तनाव होता है… या खून की कमी होती है  pregnancy, में या  breast-feeding, पूरी नींद जब नही आती  inadequate sleep, या बहुत ज्यादा  exercise.करें…

महिलाओं में बहुत देखने में आती है ये कमी…  thyroid , diabetes, बहुत ज्यादा वजन बढना … सबसे पहले तो कारण है पता लगाना चाहिए…

दिखाईए

खुद के डाक्टर नही बनना चाहिए दिखा लेना चाहिए ताकि कोई वहम न रहे… और फिर उसके हिसाब से इलाज करना चाहिए… जैसा कि खून कम है तो उसे दूर करने के लिए आयरन या अन्य दवाई या फिर अगर तनाव है तो उसे दूर करने की जरुरत होती है…

फिर उठ जाईए…

यानि सोचना छोड दीजिए और काम कीजिए जिसमे शरीर की हलचल हो…कि  physical activity से हमारा  energy level  boost होता है..

डाईट

जरुरत है कसरत करने की और अपने खान पान पर ध्यान देने की… खाया खाया नही खाया कोई बात नही… ऐसा मत करिए .. और खाईए अच्छा संतुलित खाना खाईए… थोडा थोडा करके सारा दिन कुछ न कुछ हैल्दी खाते रहना चाहिए…

वजन कम करना अच्छा होता है पर डाईट भी संतुलित रहनी बहुत जरुरी है…

एक तो नाश्ता मिस नही करना, एकदम से पतला होने के चक्कर में खाना नही छोड देना, crash diet बोलते हैं ना…  आयरन भरपूर मात्रा मे हो…

पानी भी बहुत भूमिका अदा करता है हम शाय्द सोचते नही है पर पानी की भी अहम भूमिका होती है Dehydration से भी alertness कम होने लगती है और  concentration भी नही रहती.. नींद जरुरी ये भी है नींद लीजिए और समय पर लीजिए… एक समय फिक्स होगा तो सही रहेगा…  कम सोना भी इसकी वजह बनता है.. इसलिए पूरी नींद लेनी चाहिए

 

नेगेटिव सोचना बंद कर दीजिए… कुछ क्रिएटिव कीजिए… अपनी उपलब्धियों को याद कीजिए… और खाली समय में उन पर काम कीहिए, बिजी रहेगी तो फालतू बातों में ध्यान नही जाएगा..

 Stop Being Tired All The Time – महिलाएं अपना ख्याल रखें – Tiredness and fatigue – how to beat it – Why it happens

February 6, 2018 By Monica Gupta Leave a Comment

How to Resolve Conflict in Relationships – रिश्तों को बेहतर कैसे बनाएं – लड़ाई झगड़ा से कैसे बचें – Monica Gupta

How to Resolve Conflict in Relationships

How to Resolve Conflict in Relationships – रिश्तों को बेहतर कैसे बनाएं – लड़ाई झगड़ा से कैसे बचें – Monica Gupta  Relationship problem….जब किसी से लड़ाई झगड़ा हो जाए और बहुत गुस्सा आए तो आप क्या करते हैं ??  खासकर हम मैं महिलाओं की बात करुं तो गुस्सा आने पर मुंह फुला लेती है… बात नही करती… काम करते समय पटक पटक कर करती है या बर्तन धो रही हों या कपडे धो रही हो या बच्चो को पढाई करवा रही हो तो सारा गुस्सा बच्चे पर निकालती हैं…

ये सब तो ठीक है पर झगडे को सुलझाने के लिए क्या करती है ?? कोई पहल करती हैं ??

How to Resolve Conflict in Relationships – रिश्तों को बेहतर कैसे बनाएं – Monica Gupta

आपसी लड़ाई झगड़ा शांत करना इसलिए भी जरुरी है कि किसी का भला नही होता.. नुकसान खुद का भी होता है.. तनाव बढ जाता है रक्तचाप बढ जाता है…   और फिर हमारे गुस्से का असर पूरे परिवार पर पडता है जिससे और तनाव बढता है…

 

 

तो हमें खुद भी chill  करना चाहिए और कोशिश सुलह की करनी चाहिए…

बहुत सारी बातें हैं कि हमें करके झगडा खत्म कर देना चाहिए……पर मैं आपको इसी बारे में एक छोटी से कहानी सुनाती हूं जो नेट पर पढी थी..

एक संयुक्त परिवार था जिसमें सब लोग मिलकर रहते थे. सास ससुर, ननद, देवरानी जेठानी, बच्चे… हलकी फुल्की खटपट तो होती ही रहती थी जैसा कि हर घर में होती है…

एक बार देवरानी और जेठानी में किसी बात पर जोरदार बहस हो गई और बात इतनी बढ़ गई कि दोनों ने एक दूसरे का मुँह तक न देखने की कसम खा ली और अपने-अपने कमरे में जा कर दरवाजा पटक कर बंद कर लिया।

पर थोड़ी देर बाद जेठानी के कमरे के दरवाजे पर खट-खट हुई… जेठानी ऊँची आवाज में बोली कौन है, बाहर से आवाज आई दीदी मैं… जेठानी ने जोर से दरवाजा खोला और बोली अभी तो बड़ी कसमें खा कर गई थी!!  अब यहाँ क्यों आई हो ?

देवरानी ने कहा दीदी सोच कर तो वही गई थी, परंतु माँ की कही एक बात याद आ गई कि जब कभी किसी से कुछ कहा सुनी हो जाए तो उसकी अच्छाइयों को याद करो और मैंने भी वही किया और मुझे आपका दिया हुआ प्यार ही प्यार याद आया और मैं आपके लिए चाय ले कर आ गई

बस फिर क्या था दोनों रोते रोते, एक दूसरे के गले लग गईं और साथ बैठ कर चाय पीने लगीं…

Healthy Relationship रहे उसके लिए इनका निबटारा कर देना चाहिए खुद दिमाग ठंडा रखना चाहिए…

Be patient और चुप हो जाना चाहिए..

start with a pause….  Try to stay silent for at least a couple of seconds सामने वाला बोलेगा तो कितनी देर बोलेगा…

फिर वजह जानने की कोशिश करनी चाहिए कि बात कहा से शुरु हुई कैसे शुरु हुई…

और अगर उसमे हमें हमारी गलती भी दिखाई दे तो सुधारना चाहिए

और अगर गलती सामने वाले की ही है तो सही समय देख कर उनसे बात करनी चाहिए.. पर ये मानकर चलना चाहिए कि लडाई झगडे में कुछ नही रखा…

जबकि झुकने में हमारा बडप्पन ही होता है… जीवन मे क्रोध को क्रोध से नहीं जीता जा सकता, बोध से जीता जा सकता है… आग को आग से नहीं बुझाया जाता पानी से आग बुझती है…  समझदार व्यक्ति बड़ी से बड़ी बिगड़ती स्थितियों को दो शब्द प्रेम के बोलकर संभाल लेते हैं। हर स्थिति में संयम और बड़ा दिल रखना ही श्रेष्ठ है…

जो झुक सकता है वो पूरी दुनिया को झुका भी सकता है…

How to Resolve Conflict in Relationships – रिश्तों को बेहतर कैसे बनाएं – लड़ाई झगड़ा से कैसे बचें – Monica Gupta

February 5, 2018 By Monica Gupta Leave a Comment

Healthy Diet during Exams – Diet Plan for Students during Exams – परीक्षा के कठिन दिन और बच्चे – Diet Tips for Exams

Healthy Diet during Exams

Healthy Diet during Exams – Diet Plan for Students during Exams – परीक्षा के कठिन दिन और बच्चे – Diet Tips for Exams  –  Diet while Studying – What to Eat before Exam – What to Eat during Exams – जब Exams की बात होती है तो हमारे जहन में दो चीजे तो जरुर आती हैं एक तो मंदिर जाना, बहुत बच्चे भगवान जी का आशीर्वाद लेने जाते हैं और दूसरा होता है बच्चे को दही खिला कर भेजना… बच्चे पेपर देने जाते हैं तो उन्हें दही खिलाई जाती है कुछ का मानना होता है कि इसे खिलाना शुभ माना गया है और दूसरा इसे खाने से रोग प्रतिकारक शक्ति Immune system बढ़ जाती है और इसी वजह से आपके बच्चे को इंफेक्शन लगने का खतरा कम होता है…

Healthy Diet during Exams – Diet Plan for Students during Exams – Diet Tips for Exams

ये तो बात है जिस दिन बच्चा पेपर देने जाता है पर जब बच्चा परीक्षा की तैयारी कर रहा हो तब कैसा भोजन होना चाहिए.. क्या हम इस बात का भी ख्याल रखते हैं.. रखना चाहिए इन दिनो शरीर को अच्छे पौष्टिक खाने की बहुत जरुरत होती है,,

एक तो परीक्षा का तनाव होता है और कई बार  unhealthy  खाना भी तनाव का कारण बनता है… तो क्या क्या खाना चाहिए…

 

सुबह की शुरुआत करनी चाहिए भीगे हुए बादाम से… हर रोज का रुटीन बना लेना चाहिए कि चार या पांच बादाम  खाली पेट बादाम खिलाने है… यह याद्दाश्‍त को बढ़ने में मदद के लिए जाना जाता है। बादाम जरुरी विटामिन और मिनरल, जिंक, कैल्शियम, मैग्नीशियम और ओमेगा-3 फैटी एसिड से omega-3 fatty acids भरपूर होता है।

Breakfast जरुर और healthy होना चाहिए .. Oats, Muesli, Upma या ब्रेड,  अंडा, दूध , दही,  calcium, fibre प्रोटीन से बनी चीजे लेना बहुत अच्छा रहता है.

जहां तक बात है सारा दिन खाने की तो हल्का और सुपाच्य होना चाहिए… कोशिश करनी चाहिए low fat हो और हरी पत्तेदार ज्यादा हो.. बहुत ज्यादा मिर्च मसालेदार न हो..  जरुरत इस बात की भी है ज्यादा तला भुना न हो धीरे धीरे खाए, चबा कर खाएं… ये नही है कि लंच ही करेंगे अभी पढाई कर रहे हैं या मम्मी ने आलू पूरी बनाई है तो एक ही टाईम खूब खा लिया उससे सुस्ती भी आती है और पढाई का मन भी नही करता……

गेप ज्यादा नही होना चाहिए..

बीच बीच में थोडा थोडा कुछ कुछ लेते रहना चाहिए .. एक बार में ही खूब सारा खा लेना सही नही थोडा थोडा बीच बीच में कुछ न कुछ लेते रहना चाहिए शरीर अलर्ट रहता है चाहे फल हो सलाद हो या अंकुरित हो, डाईट नमकीन हो, हल्के स्नैक्स लेते रहने चाहिए.

पानी पीना बहुत अच्छा रहता है..

पानी की बोतल तो टेबल पर रखी ही होनी चाहिए… बहुत बच्चे तो हॉल में भी पानी ले जाते हैं… अगर उन्हें पानी ज्यादा पसंद नही तो जूस, buttermilk , छाछ , नींबू पानी , नारियल पानी भी दे सकते हैं… चाय का तो बच्चों को ज्यादा नही होता पर कॉफी बहुत पीते हैं कई बच्चे, नुकसान करती है  acidity भी हो जाती है… इसलिए बेशक, कम मात्रा में कैफीन लेने में कोई बुराई नहीं है, लेकिन इसका बहुत ज्‍यादा सेवन सेहत के लिए नुकसानदेह हो सकता हे  Avoid too much caffeine

सबसे पहली बात तो ये बाहर का खाना खाने से बचना चाहिए…

Avoid eating outside food during exams कोशिश करनी चाहिए कि ना खाएं क्योकि बाहर का खाना खाने से infection होने का खतरा होता है… मन तो बहुत करता है तो ऐसी जगह जहां से आप हमेशा मंगवाते रहे हों यानि एक आधी बार जब बहुत मन कर रहा हो और जब अगले दिन पेपर न हो… बहुत ज्यादा मसालेदार न हो… जंक खाना नही खाए तो बहुत अच्छा है

रात को सोने से 3 या 4 घंटे पहले खाना खा लेना चाहिए और अगर हैवी खाना खा लेगें तो नींद सही से नही आएगी tea, coffee, cola जैसी चीजे भी नही लें तो अच्छा है हल्का गर्म दूध पी कर सोना फायदेमंद रहता है..

balanced diet  से बच्चे का फोकस बना रहेगा.. न ज्यादा प्रोटीन न कार्बोहाईड्रेट… सब एक दम संतुलित होना चाहिए.. skip meals  की कोशिश भी नही करनी चाहिए…

 

 

 

Healthy Diet during Exams – Diet Tips for Exams – Diet Plan for Students during Exams – Monica Gupta –

February 3, 2018 By Monica Gupta Leave a Comment

Make Relationship Healthy this Valentine – Unique Valentine Idea – Love wars – Monica Gupta

Make Relationship Healthy this Valentine -

Make Relationship Healthy this Valentine – Unique Valentine Idea – Love wars – Monica Gupta –

कल एक Friend घर आई हुई थी… बहुत ज्यादा खुश और excited इस बात को लेकर थी कि वेलेंटाईन आ रहा है और वो इसे खूब जबरदस्त तरीके से सेलीब्रेट करने वाली है… अब मुझे समझ नही आया कि इसे मनाने के लिए जबरदस्त तरीका क्या..

ये तो बहुत सिम्पल है एक दिन रोज डे होता है चाकलेट डे होता है टेडी टे होता है ऐसे सात दिन होते हैं ज्यादा से ज्यादा कभी डिनर पर चले जाओ या धूमने चले जाओ या शापिंग कर लो इससे ज्यादा क्या ?? gift दो या लो बस… !!

Make Relationship Healthy this Valentine – Unique Valentine Idea – Love wars

पर जब उसने मुझे जो बताया वो मुझे भी बहुत ज्यादा excited लगा इसीलिए मैं आपसे शेयर कर रही हूं…

उसने मुझे बताया कि एक उसने Valentine’s वीक का यानि 7 दिन का On line Game चैलेंज accept किया है…

 

ये गेम कपल गेम है.. और इसमें WhatsApp पर  7th से  14th फरवरी तक यानि  सात दिन अलग अलग “Love Wars” game , Challenges,  easy fitness activities ,yummy-healthy treats और भी न जाने क्या क्या होगा…

सबसे पहले तो वो इसके लिए enroll करेंगें.. फिर WhatsApp पर उसका और उसके हब्बी का ग्रुप बनाया जाएगा.. जिसमें अगर वो चाहें तो अपने दोस्तों को भी cheer अप करने के लिए बुला सकते हैं..

हर रोज अलग अलग tasks मिलेगें और उनकी energy, creativity के हिसाब से  results मिलेगें.

इसमें अगर कपल साथ नही रहते यानि अलग अलग जगह पर हैं तो भी वो इस गेम चैलेंज को ले सकते हैं

एक दिन में 15 से 30 मिनट का समय होगा… समय जिसे जैसा सूट करे वैसा रख सकते हैं और उनकी खुद की मर्जी पर है..

जिसका रिजल्ट कम होगा यानि जो हार जाएगा वो वैलेंटाईन विश पूरी करेगा…

एक बात उससे मैंनें जरुर पूछी जोकि मेरे मन में शुरु से थी वो ये कि कितना खर्च आएगा इस कपल गेम में 7 दिन का… तो उसने बताया कि कपल का 700 रुपये..

मैंने भी सोचा कि अगर केक भी खरीदना हो या बुके भी लेना हो तो हजार रुपये तो वैसे ही खर्च हो जाते हैं और इस चैलेंज में सारे गेमस फिटनेस से जुडे होगें और healthy treats होंगी तो अच्छा ही है…

मुझे भी लगा कि ये तो बहुत अच्छा है entertainment तो होगा ही साथ ही साथ हैल्थ और फिटनेस के बारे में भी जागरुक होंगे..

इस क्रिएटिव कंसेप्ट को design किया है FITology.in ने… FITology हैल्थ और wellness  पर ही काम कर रही है और जब भी इस तरह के कोई खास दिन या festivel आते हैं वो नए नए concept ले कर आती है ताकि fun के साथ साथ  healthy habits के बारे में भी लोग जागरुक हों…

वैसे कॉन्सेप्ट तो वाकई बहुत नया लगा … और वैसे भी हम फिटनेस को लेकर बहुत अवेयर रहते हैं तो ये अच्छा है…

वैसे अगर आप ज्यादा जानकारी लेना चाह्ते हैं तो नीचे लिंक दिया हुआ है…

Make Relationship Healthy this Valentine -

https://cherishx.com/experience/471/delhi-ncr/love-wars?tag_source=valentines

Love Wars

This Valentines, with “Love Wars”, compete against your loved one in a 7 day fun and exciting online – offline couple game! Each day you wake-up to a new task – win points & create memories. Option to customise the daily tasks to your health & mindfulness level. The partner who does not win has to fulfill the valentine wish of the winner! (Read “Haar ke jeetney waale ko baazigar kehte hain”)

Unique Valentine Idea – Love wars – Make Relationship Healthy this Valentine – Unique Gift Idea for Valentines Day –  Valentines Day Ideas – DIY Valentine’s Day Gifts – Valentine’s Day Gift Ideas This Valentines, with “Love Wars”, compete against your loved one in a 7 day fun and exciting online – offline couple game! Each day you wake-up to a new task – win points & create memories. Option to customise the daily tasks to your health & mindfulness level.

Make Relationship Healthy this Valentine – Unique Valentine Idea – Love wars – Monica Gupta

February 2, 2018 By Monica Gupta Leave a Comment

How to Deal with Aggressive Children – Aggressive Children – आक्रामक बच्चे – Monica Gupta

How to Deal with Aggressive Children

How to Deal with Aggressive Children – Aggressive Children – आक्रामक बच्चे – Monica Gupta – #ParentingVideosInHindi – Monica Gupta – Aggression in Children – How to Deal with Aggression in Children – http://https://www.youtube.com/@MonicaGupta/ – Motivational Videos in Hindi –  Aggression क्यों है आज बच्चों में….  इतने आक्रमक किसलिए हो गए है बच्चे…  एक वीडियों में कारण पता लगाने की कोशिश की थी कि क्या क्या वजह हो सकती है कि बच्चे आक्रमक हो.. आज इस बारे में बात करती हूं कि इस Aggression  को दूर कैसे किया जा सकता है…बात कल शाम की है जब मैं चाय बना रही थी… मन में चल रहा था कि बच्चों इतने आक्रमक हो गए हैं उन्हें कैसे समझाए.. कैसे aggressive  हिंसक आक्रमक न हों.. चाय मे उबाल आ रहा था और मैं बार बार फूंक मार कर उसे शांत कर रही थी सोचे जा रही थी और उसे शांत कर रही थे. ऐसा लगा मानो चाय एक aggressive बच्चा है और मैं एक parents उसे शांत कर रही हूं तो सबसे पहली बात तो ये कि इन सब के लिए parents का शांति से काम लेना बहुत जरुरी है…

Aggressive Children – आक्रामक बच्चे – How to Deal with Aggressive Children

तो सबसे पहली बात कि माता पिता का शांत रहना बहुत जरुरी है..

ये Aggression  एक दिन में आता नही इसलिए ये सोचना कि एक दिन में चला जाएगा ऐसा नही है… समय लगता है और बच्चे को भी समय दीजिए पर जरुरी है

माता पिता खुद पर कंट्रोल रखे..

अपने गुस्से पर काबू रखें शब्दों का प्रयोग करें न कि हाथों का यानि खुद  सभ्य civilised और शांत …  calm बने रहिए.. बहुत माता पिता आपा खो देते हैं और बच्चे को मारने लगते हैं.. बच्चे बडो से ही सीखते हैं जैसाकि मान लीजिए एक पिता फोन पर बात कर रहे हैं किसी से.. तू समझता क्या है तुझे तो देख लूंगा… और फोन रखने के बाद भी दस 12 गालियां उसी की बात करते हुए बोले जा रहे हैं कि सामने मिल जाए तो उसका खून कर दूंगा.. समझता क्या है… तो बच्चा क्या सीखेगा क्या उम्मीद रखते हैं Manage your own anger

कारण जानने की कोशिश कीजिए

किस बात पर ज्यादा आक्रमक हो जाता है… कारण बहुत सारे हो सकते हैं  सही नींद न आना, किसी का तंग करना, तनाव, पढाई का, टीवी पर बहुत हिंसक देखना, या शरीर में विटामिन की कमी.. अस्वस्थ होना… Attention Deficit Hyperactivity Disorder (ADHD)

फिर कदम उठाने चाहिए.. मान लीजिए कोई बच्चे को तंग कर रहा है… तो उस दिशा मे सही कदम उठाना होगा… समझदारी के साथ… या बच्चा बहुत ज्यादा हिंसक फिल्में देखता है उसमे ज्यादा रुचि रखता है तो बच्चे को उस तरह से समझाना होगा..

बात करनी होगी… समझाना होगा

समय देना होगा और समय ऐसे भी नही कि हा बता क्या हुआ था… जल्दी बता उसे छोडूगा नही.. ऐसे नही.. आराम से बात सुनकर और फिर उसका निष्कर्ष निकालना होगा…

Discipline में रखना होगा और Consistent रहना होगा…

disciplining बच्चे को अनुशासन में रखने के लिए Consistent रहना होगा… ये नही की कोई बात हुई तब आपने कोई नियम बना दिया.. अगर कोई चीज गलत है तो हमेशा ही गलत है… बचपन से ही इस आदत को डेवलेप करना होगा… कभी डांट दिया कभी कुछ नही कहा कि चलो कोई बात नही… मान लीजिए एक बच्चा हमेशा दूसरों की पिटाई करके घर आता है तब कुछ नही कहते पर एक बार गम्भीर चोट उसके मारने की वजह से लग जाती है तब आप हरकत में आते हैं.. ऐसा नही होना चाहिए… मारना हमेशा ही गलत है… और हमेशा ही अपनी बात पर अडिग रहना चाहिए. बच्चे को समझाने के लिए नियम बनाने होगें और वो सभी पर लागू होंगे.. कि अगर गुस्सा आए तो कोई तोड फोड या मार पिटाई नही होनी चाहिए

कई बार पेरेंटस ही कारण बनते हैं.. बच्चा किसी की पिटाई करके आया… वाह देख मेरा बेटा है… आखिर बेटा किसका है… ऐसे शय मिलती है और बच्चे ज्यादा आक्रमक होते जाते हैं..

Consequences – परिणाम क्या हो सकते हैं

कभी कुछ ऐसे बात हो जाए कि बच्चे को बहुत गुस्सा आ रहा है तो आराम से बच्चे को बैठा कर बात कीजिए कि इसका परिणाम क्या होगा… अगर आपने इसे मारा और इसे खून निकला और पुलिस आ गई तो… इसलिए ऐसा काम ही नही करते… हम भावना पर गुस्से पर कंट्रोल करते है… ताकि ऐसी कोई बात हो ही नही…

समय समय पर गुस्से पर कंट्रोल करना भी सीखना चाहिए.. कि अपनी भावनाओं पर खासतौर पर जब गुस्सा आए तो किस तरह से रिएक्ट करना है

बच्चों को सीखाए कि दूसरो की Feelings को समझे Empathy भी बोलते हैं इसे…

ये बहुत जरुरी है कि बच्चों की सीखाना कि वो दूसरे की भावनाओं को समझे.. और वो क्या महसूस कर रहा है इसे समझना… मान लीजिए एक बच्चा बहुत शाररती है दूसरे बच्चे को किताब फाड दी… अब दूसरा बच्चा कैसे रिएक्ट करेगा… अगर बच्चे को ये पता होगा कि वो वापिस से मेरी किताब भी फाड देगा या टीचर से शिकायत कर देगा या सजा भी मिल सकती है  तो वो ऐसा नही करेगा.. या उसने मेरी भी किताब फाड दी तो मैं कैसे रिएक्ट कर रहा हूं ऐसे ही वो करेगा…  समानुभूति का मतलब है, दूसरा जैसा महसूस कर रहा है, वैसा ही महसूस करना… इसके लिए स्वयं को दूसरे के स्थान पर रखकर सोचना…

बच्चे का ध्यान बढाने की कोशिश कीजिए या माहौल बदलने की कोशिश कीजिए

चलो आज आपके पसंद का केक बनाते हैं या चलो बाजार से पैटीज लेकर आते हैं फिर कार्टून देखेंगे मिलकर… तनाव हटाने के लिए कुछ ऐसा करना चाहिए कि चेहरे पर स्माईल आ जाए या हंसाने की कोशिश से भी तनाव दूर हो सकता है.. एक बार तो बच्चा बोलेगा.. क्या है… पर फिर नॉर्मल होने लगेगा…

उदाहरण दीजिए…

ऐसे में कुछ उदाहरण जोकि वाकई में प्रेरणा है वो दीजिए या फिर कोई कहानी बना लीजिए कि एक बार मुझे भी बहुत गुस्सा आया था फिर तुम्हारे दादा जी ने मुझे किस तरह से समझाया… या किसी बचपन के दोस्त का उदाहरण जोकि उसे सच भी लगे…

Reawrd भी देना है बच्चे को..

आपने एक बार समझाया और बच्चे ने वैसा रिएक्ट नही किया यानि कहना माना तो शाबाशी देनी भी जरुरी है ताकि उसे मोटिवेशन मिले…

Enhance Your Parenting Skills बच्चों से सम्बंध बेहतर बनाएं…

बहुत लंबा gap न हो… बात करते रह्रे.. ताकि अगर कोई भावना उसके अंदर घर कर रही है… वो अंदर आने से पहले ही दूर कर दें.

 

 How to Deal with Aggressive Children – Aggressive Children – आक्रामक बच्चे – Monica Gupta

January 31, 2018 By Monica Gupta Leave a Comment

Why Being A Housewife – Why be a Housewife – क्यों बनें housewife – Benefits of being a Housewife – Monica Gupta

I am Proud to be an Indian

Why Being A Housewife – Why be a Housewife – क्यों बनें housewife – Benefits of being a Housewife – Monica Gupta – गृहणी बनने के फायदे  – हाऊस वाईफ का नाम जहन में आते ही मन में तस्वीर उभरती है… सारा दिन काम काम और काम, 24 घंटे काम, न आराम, न छुट्टी न कोई सोचता है उनके बारे में तो.. thankless job है पर ये भूमिका बहुत ही अच्छी है…  बहुत अहम है और आज  के समय में तो ये किसी blessings से कम नही…

Why Being A Housewife – Why be a Housewife – क्यों बनें housewife – Benefits of being a Housewife –

बेशक,  एक समय ऐसा था जब हाऊस वाईफ सुन कर मुंह बिचकाया जाता था पर अहमियत तब भी थी और आज भी है… मैं बताती हूं कि

क्या और कितने benefits है housewife की.. तो सबसे पहले तो इस नेगेटिविटी, कॉम्प्लेक्स को निकाल फेंकिए कि आप एक हाऊस वाईफ हैं कुछ नही करती…

घर घर लगता है..

घर सारा समय चहकता और महकता रहता है… बहुत घर मैं भी ऐसे देखती हूं जिनमे बस ताला ही लटका मिलता है… सारा दिन घर मे हलचल रहती है.. शोर शराबा रहता है… खाने की महक, लडाई झगडा… सब गूंजता रहता है.. आंर जाने वालो से भी घर हरा भरा रहता है

 बच्चों के लिए पूरा समय होता है

उनकी हर छोटी बडी जरुरत में आप उनके साथ खडी होती है… चाहे होमवर्क करवाना है चाहे पार्क में खेलने जाना है चाहे घ पर दोस्त आते हैं उनके लिए कुछ खाने को बनाना है, कहानी सुनानी है…

मैं आपको बतात्ती हूं एक मेरी जानकार हैं 40 हजार महीना की नौकरी उन्होने छोड दी अब घर पर अपनी बच्ची डेढ साल की बच्ची की देखभाल करती हैं उनका कहना है कि नौकरी तो कभी भी कर लूंगी पर ये पल दुबारा नही आएगा… अभी पूरा फोकस बच्ची की परवरिश पर लगा रही है…

स्ट्रेस लेवल थोडा कम होता है क्योकि भागदौड नही होती

कम इसलिए होता है कि आपको सारा दिन घर पर ही रहना है और टाईम मैंनेज करके चलती हैं तो भागदौड नही रहती… सुबह अगर बच्चे को स्टॉप पर छोडना है तो ये हबडा तबडी नही रहती कि खुद भी आफिस जाना है तैयार होना है काम वाली आई नही.. नही आई तो क्या होगा.. बच्चे को समय न दे पाने का स्ट्रेस भी कम नही होता.. कल घर पर एक सहेली आई हुई थी… जल्दी जल्दी चाय पीकर बस भागने की कर रही थी बोली सीधा आफिस से आ रही हूं फिर मार्किट काम करना है और फिर घर का समेटना है.. पूरी तरह से स्ट्रेस में थी…

अपने लिए समय निकाल पाती हैं

जो हाउस वाईव्स पूरे दिन घर पर रहती है उनकी एक Routine  सेट हो जाती है.. उन्हें पता है किस समय क्या काम करना है किस समय आराम करना है.. और वो अपने लिए समय दे पाती है अपनी हैल्थ का ख्याल रख पाती हैं…

नई skills सीख सकती है.. अपना समय सेट करके नई नई चीजे सीख सकती हैं चाहे कुकिंग है मार्डनिंग है.. बच्चों को कुछ समझाना है तो उसकी वीडियो देख कर बच्चों को समझा सकती है… क्राफ्ट का कुह्ह सीख सकती है… लिखने का शौक है तो ब्ळोग लिख सकती है … समय का पूरा सद्य्पयोग कर सकती है…

freedom होती है कुछ भी करने की पूरी आजादी होती है.. कभी काम करने काम मन नही किया तो कोई बात नही… टीवी देख रहे हैं किसी को फोन कर रहें हैं कभी मार्किट में चले गए… पूरी स्वतंत्रता होती है..

पति पत्नी के रिश्तों में मजबूती आती है… कल्पना कीजिए कि आप नौकरी करती है… पति अलग बिजी आप अलग बिजी… पति अपने बिजनेस टूर पर, आप आफिस मीटिंग, प्रोजेक्टस… आपस में न मिलना हो पाता, न समय दे पाते.. वही बहुत कपल्स तो ऐसे हैं जो नौकरी के चक्कर में एक साथ रह ही नही पाते.. अलग अलग रहते है… वहीं एक हाऊस वाईफ न सिर्फ पति के लिए हमेशा खडी है बल्कि छोटे ,मोटे कामों में उनकी मदद भी करवाती हैं.

सम्बंध मजबूत बनते हैं..

सिर्फ पति पत्नी का ही नही बल्कि दूसरों के साथ भी रिश्तों में मजबूती आती है… कुछ दिन सास ससुर भी रहने आ सकते हैं दूर दराज के मेहमान भी आ सकते हैं नही तो कोई नही आता क्योकि कोई रहता ही नही घर पर तो क्या करेंगें आकर…

अब बात आती है जिसके लिए हाऊस वाईव्स में कॉम्प्लेक्स होता है कि वो कुछ कमाती नही.. आज घर बैठे दस काम कर सकती है… अपने खाली समय का उपयोग करके कुछ न कुछ काम करके आय का जरिया बना सकती है… तो किसलिए ये सोचना कि हम कुछ नही करते किसी काम के नही… बल्कि अपने आप को ऐसा बनाईए कि दूसरे भी आपको देख कर आपकी तरह बनना चाहें

Why Being A Housewife – Why be a Housewife – क्यों बनें housewife – Benefits of being a Housewife – Monica Gupta – गृहणी बनने के फायदे

  • « Previous Page
  • 1
  • …
  • 25
  • 26
  • 27
  • 28
  • 29
  • …
  • 235
  • Next Page »

Stay Connected

  • Facebook
  • Instagram
  • Pinterest
  • Twitter
  • YouTube

Categories

छोटे बच्चों की सारी जिद मान लेना सही नही

Blogging Tips in Hindi

Blogging Tips in Hindi Blogging यानि आज के समय में अपनी feeling अपने experience, अपने thoughts को शेयर करने के साथ साथ Source of Income का सबसे सशक्त माध्यम है  जिसे आज लोग अपना करियर बनाने में गर्व का अनुभव करने लगे हैं कि मैं हूं ब्लागर. बहुत लोग ऐसे हैं जो लम्बें समय से […]

GST बोले तो

GST बोले तो

GST बोले तो –  चाहे मीडिया हो या समाचार पत्र जीएसटी की खबरे ही खबरें सुनाई देती हैं पर हर कोई कंफ्यूज है कि आखिर होगा क्या  ?  क्या ये सही कदम है या  देशवासी दुखी ही रहें …  GST बोले तो Goods and Service Tax.  The full form of GST is Goods and Services Tax. […]

डर के आगे ही जीत है - डर दूर करने के तरीका ये भी

सोशल नेटवर्किंग साइट्स और ब्लॉग लेखन

सोशल नेटवर्किंग साइट्स और ब्लॉग लेखन – Social Networking Sites aur Blog Writing –  Blog kya hai .कहां लिखें और अपना लिखा publish कैसे करे ? आप जानना चाहते हैं कि लिखने का शौक है लिखतें हैं पर पता नही उसे कहां पब्लिश करें … तो जहां तक पब्लिश करने की बात है तो सोशल मीडिया जिंदाबाद […]

  • Home
  • Blog
  • Articles
  • Cartoons
  • Audios
  • Videos
  • Poems
  • Stories
  • Kids n Teens
  • Contact
  • Privacy Policy
  • Terms of Use
  • Disclaimer
  • Anti Spam Policy
  • Copyright Act Notice

© Copyright 2024-25 · Monica gupta · All Rights Reserved