Monica Gupta

Writer, Author, Cartoonist, Social Worker, Blogger and a renowned YouTuber

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January 6, 2018 By Monica Gupta Leave a Comment

Sakat Chauth Katha – कैसे करें सकट चौथ – Sakat Chauth Vrat Katha – सकट चौथ व्रत की कथा

Sakat Chauth Katha

Sakat Chauth Katha – कैसे करें सकट चौथ – Sakat Chauth Vrat Katha – सकट चौथ व्रत की कथा – सकट चौथ का व्रत माघ माह में कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि के दिन किया जाता है। इसे ‘तिल चौथ’ या ‘माही चौथ’ के नाम से भी जाना जाता है।

Sakat Chauth Katha – कैसे करें सकट चौथ – Sakat Chauth Vrat Katha – सकट चौथ व्रत की कथा

‘सकट’ शब्द संकट से बना है। गणेश जी ने इस दिन देवताओं की मदद करके उनका संकट दूर किया था। तब शिव ने प्रसन्न होकर गणेश को आशीर्वाद देकर कहा कि आज के दिन को लोग संकट मोचन के रूप में मनाएंगे। जो भी इस दिन व्रत करेगा, उसके सब संकट इस व्रत के प्रभाव से दूर हो जाएंगे। ‘वक्रतुण्डी चतुर्थी’, ‘माही चौथ’ अथवा ‘तिलकुटा चौथ’ सकट चौथ के ही अन्य नाम हैं

इस दिन संकट हरण गणेश तथा चंद्रमा का पूजन किया जाता है। यह व्रत संकटों तथा दुखों को दूर करने वाला तथा प्राणीमात्र की सभी इच्छाएं व मनोकामनाएं पूरी करने वाला है।

इस दिन माताएं अपनी संतान की रक्षा और लंबी आयु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। व्रती महिलाएं शाम को गणेश पूजन और चंद्रमा को अर्ध्य देने के बाद ही वह प्रसाद के साथ भोजन ग्रहण करती हैं। माना जाता है कि महाभारत काल में श्रीकृष्ण की सलाह पर पांडु पुत्र धर्मराज युधिष्ठिर ने सबसे पहले इस व्रत को रखा था। तबसे अब तक महिलाएं अपने पुत्र की कुशलता के लिए इस व्रत को रखती हैं।

इस व्रत की अनेक कहानियों में से एक कहानी कुछ इस प्रकार है..

एक बार विपदा मे  पडे देवता भगवान शंकर के पास गए। उस समय भगवान के पास स्वामी कार्तिकेय तथा गणेश भी विराजमान थे। शिव जी ने दोनों बालकों से पूछा- ‘तुम में से कौन ऐसा वीर है जो देवताओं का कष्ट निवारण करे?’ तब कार्तिकेय ने स्वयं को देवताओं का सेनापति प्रमाणित करते हुए खुद को देव रक्षा योग्य सिद्ध किया। यह बात सुनकर शिव ने गणेश की इच्छा जाननी चाही।

तब गणेश ने विनम्रता से कहा- ‘पिताजी! आपकी आज्ञा हो तो मैं बिना सेनापति बने ही सब संकट दूर कर सकता हूं।’ यह सुनकर हंसते हुए शिव ने दोनों लड़कों को पृथ्वी की परिक्रमा करने को कहा तथा यह शर्त रखी- ‘जो सबसे पहले पूरी पृथ्वी की परिक्रमा करके आ जाएगा वही वीर तथा सर्वश्रेष्ठ देवता घोषित किया जाएगा।’ यह सुनते ही कार्तिकेय बड़े गर्व से अपने वाहन मोर पर चढ़कर पृथ्वी की परिक्रमा करने चल दिए। गणेश  ने सोचा कि चूहे के बल पर तो पूरी पृथ्वी का चक्कर लगाना अत्यंत कठिन है, इसलिए उन्होंने एक युक्ति सोची। वे 7 बार अपने माता-पिता की परिक्रमा करके बैठ गए।परिक्रमा करके लौटने पर निर्णय की बारी आई। कार्तिकेय जी गणेश पर कीचड़ उछालने लगे तथा स्वयं को पूरे भूमण्डल का एकमात्र पर्यटक बताया। इस पर गणेश ने शिव से कहा- ‘माता-पिता में ही समस्त तीर्थ निहित हैं, इसलिए मैंने आपकी 7 बार परिक्रमाएं की हैं।’

गणेश की बात सुनकर समस्त देवताओं तथा कार्तिकेय ने सिर झुका लिया। तब शंकर जी ने उन्मुक्त कण्ठ से गणेश की प्रशंसा की और  आशीर्वाद दिया-

‘त्रिलोक में सर्वप्रथम तुम्हारी पूजा होगी।’ तब गणेश ने पिता की आज्ञानुसार जाकर देवताओं का संकट दूर किया।

यह शुभ समाचार जानकर भगवान शंकर ने अपने चंद्रमा को यह बताया कि चौथ के दिन चंद्रमा तुम्हारे मस्तक का (ताज) बनकर पूरे विश्व को शीतलता प्रदान करेगा। जो स्त्री-पुरुष इस तिथि पर तुम्हारा पूजन तथा चंद्र अर्ध्यदान देगा। उसका त्रिविधि ताप यानि  (दैहिक, दैविक, भौतिक) दूर होगा और एश्वर्य, पुत्र, सौभाग्य को प्राप्त करेगा। यह सुनकर देवगण खुश हुए और भगवन को  प्रणाम कर अंतर्धान हो गए।

सकट चौथ का उपवास जो भी भक्त संपूर्ण श्रद्धा व विश्वास के साथ करता है, उसकी बुद्धि और ऋद्धि-सिद्धि की प्राप्ति होने के साथ-साथ जीवन में आने वाली विघ्न बाधाओं का भी नाश होता है।

एक अन्य कथा कुछ इस प्रकार है

पौराणिक मान्यता के अनुसार सतयुग में राजा हरिश्चंद्र के राज्य में एक कुम्हार रहता था। एक बार उसने बर्तन बनाकर आंवा यानि भट्टी लगाई पर आंवा पका ही नहीं और बर्तन कच्चे रह गए। इसी तरह लगातार नुकसान होते देख वह राजा के पास गया। राजा ने राजपंडित को बुलाकर कारण पूछा तो राज पंडित ने कहा की हर बार आंवा लगते समय बच्चे की बलि देने से आंवा पक जाएगा ।

राजा का आदेश हो गया । बलि आरम्भ हुई । जिस परिवार की बारी होती वह परिवार अपने बच्चो में से एक बच्चा बलि के लिए भेज देता ।

इसी तरह कुछ दिनों बाद सकट के दिन एक बूढी अम्मा  के लड़के की बारी आयी । बूढी अम्मा के लिए वही जीवन का सहारा था ।बेटे को भेजे जाने के गम में अम्मा बहुत दुखी हो गई वो भगवान गणेश की भक्त थी जब बेटा जाने लगा तो  अम्मा ने उसे सकट की सुपारी और दूब का बीड़ा देकर कहा “भगवान का नाम लेकर आंवा में बैठ जाना । ” बालक को आंवा में बिठा दिया गया और अम्मा  मन ही मन पूजा करने लगी ।

अगली सुबह कुम्हार ने देखा तो आंवा पका हुआ था और उस बालक के साथ साथ अन्य बालक भी सुरक्षित बाहर खडे हुए थे .. कुम्हार ये सब देखकर हैरान रह गया और उसने ये सारी बात राजा को बताई ….राजा ने बालक की माता को बुलाकर उनका पुत्र सौंपा और इस चमत्कार का कारण पूछा तो अम्मा ने बताया कि वो सकट चौथ के दिन भगवान गणेश का व्रत और पूजन करती थी। इस दिन के बाद से कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकट हारिणी माना जाता है.

सकट चौथ का उपवास जो भी भक्त संपूर्ण श्रद्धा व विश्वास के साथ करता है, उसकी बुद्धि और ऋद्धि-सिद्धि की प्राप्ति होने के साथ-साथ जीवन में आने वाली विघ्न बाधाओं का भी नाश होता है। मान्यता हैं कि विघ्नहर्ता गणेश जी इस व्रत को करने वाली माताओं के संतानों के सभी दुःख दर्द हर लेते हैं और उन्हे सफलता के नये शिखर पर पहुंचाते हैं।

हे विध्नहर्ता गणेश सभी की रक्षा करना और अपना आशीर्वाद सदा बनाए रखना

सकट चौथ व्रत की कथा

January 6, 2018 By Monica Gupta Leave a Comment

Teach Kids to Stay Organized – बच्चों को सिखाएं organized रहना – Parenting Tips – Monica Gupta

Teach Kids to Stay Organized

Teach Kids to Stay Organized – बच्चों को सिखाएं organized रहना – Parenting Tips – Monica Gupta – #MonicaGuptaVideos – #ParentingVideosInHindi – Monica Gupta – Help Your Child Get Organized – Teach Kids to Get Organized – http://https://www.youtube.com/@MonicaGupta/ – Motivational Videos in Hindi – मोनिका गुप्ता –  बच्चों की परवरिश – बच्चों की परवरिश कैसे करें बच्चों को सिखाएं व्यवस्थित रहना

Teach Kids to Stay Organized – बच्चों को सिखाएं organized रहना – Parenting Tips

कैसे रखें बच्चे Organized –  बहुत सारे पेरेंटस की शिकायत रहती है कि बच्चे Organize नही रहते.. कमरा फैला, अलमारी भी बिल्कुल फैली न स्कूल बैग का ख्याल क्या करें कैसे करें.  पेरेंटस किन बातों का ख्याल रखें ??

1.  मदद करनी छोड दीजिए –

अगर हम सही मायनो में चाहते है कि बच्चा Organize  बनें तो उसकी सहायता करना छोड दीजिए… एक बार तो आपको अच्छी नही लगेगी बात पर ये जरुरी है… हर बात मे आपकी हैल्प मिलती जाएगी तो वो कैसे खुद बनेगा Organize. responsible  तभी बनेगा…

2.  सामान कम कीजिए

बच्चे अव्यवस्थित तभी होते हैं जब बहुत सामान होता है  जब सामान की कम होगा तो कमरा कैसे फैलेगा… आप इतने सारे गेम्स हो या खिलौने या गेम्स  ले कर आते है तो बच्चा बहुत जल्दी ऊब जाता है..

तो जो टूट फूट गए हैं उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दीजिए…

जो बहुत अच्छी कंडीशन में है पर बच्चा खेलता नही उसे पैक करके किसी जगह रख दीजिए… कुछ दिनों बाद जब बच्चा उन को देखेगा तो उसे बहुत अच्छा लगेगा

3. One in – one out rule

भी बना सकते है कि नया खिलौना तभी आएगा जब पुराना किसी को दे देंगें… यही बात कपडो के लिए भी कर सकते हैं … डोनेट करने की भावना आएगी

4.  सामान ऐसी जगह रखिए जहां से वो आराम से ले पाएं..

नीचे नीचे के शेल्फ हों जहां खिलौने किताबें रंग, कहानी की किताब के अलग अलग सेक्शन हों और बच्चों को बताए कि जहां से जो निकालें वही वापिस सहेज कर रखे… इससे बार बार पेरेंटस की सरदर्दी भी कम होगी कि ये सामान चाहिए वो चाहिए.. बच्चे को समझाईए कि अगर जहा से समान लिया वहां वापिस नही रखा तो एक एक सामान गुम होता रहेगा.. अगर नही रखा तो एक एक करके चीजे गायब होती जाएगी..

5.  बच्चों का कैलेंडर बना लीजिए…

एक महीने का कैलेंडर calendar बनाईए और उसमे कुछ बातें लिखिए जिसमे सिर्फ उन्हें टिक मार्क ही करना है जैसे

सुबह समय से उठे / ब्रुश किया / टिफिन खाया/ होमवर्क पूरा किया / सोने से पहले ब्रुश किया / पौधे को पानी दिया/ चिडिया के लिए अपनी रखा

आखिर मे आपके रिमार्क्स – फिर आपने महीने में अगर इसमें 90% से ज्यादा टिक मार्क हैं तो प्राईज मिलेगा… वो भी बच्चा अपनी विश की स्लिप कही डाल कर रहेगा और फिर मम्मी पिक करेगीं और उसकी इच्छा पूरी करेगी… इससे क्या होगा कि बोझ नही लगेगा बच्चे को वो ओरेगेनाईज बनेगा …

6.  बच्चे के टेबल या बैड साईड पर अलार्म क्लॉक रखी हो ताकि बच्चा खुद उठने की आदत बना सके…

7.  दिन फिक्स कर दीजिए..

बजाय हर रोज सारा कमरा साफ होना चाहिए आप दिन फिक्स कर मनडे को स्ट्डी टेबल साफ रखनी है.. सनडे को अपनी अलमारी साफ रखनी है… हर रोज धोने वाले कपडे वाशिंग मशीन में या बाल्टी में डालने हैं.. हर संडे स्कूल बैग साफ करना है.. और इसके भी एकस्ट्रा पोईंटस मिलेगें..

8.  Be a Role Model

इसके लिए पेरेंटस को खुद भी ओरगेनाईज रहना होगा.. अगर खुद ही नही होंगें बच्चा सीख ही नही सकता और खुद होगें तो बच्चे के लिए एक उदाहरण बनेंगें

जितना ईजी रखेंगें उतना ही जल्दी बच्चा सीखेगा… जितना सिम्पल रखेंगें बच्चा उतना ही एंज्वाय करेगा…

Punishment, frustration से भी कुछ नही होगा इससे बच्चे कभी भी नही सीखेंगे बल्कि बहुत Patience  से काम लेना होगा Patience रखनी होंगी

ये सब एक रात में ही नही हो जाएगा पर इतना अभी पक्का है कि अगर आप patience रखेगें और बच्चे को मौका देंगें तो सब हो जाएगा…  ओरेगानाईज रखने की आदत बचपन से ही आदत डालनी जरुरी है…

पर ये भी नही है बच्चे अब बडे हो गए तो अब वो ओर्गेनाईज रह ही नही सकेंगें ऐसा नही है…

Teach Kids to Stay Organized – बच्चों को सिखाएं organized रहना – Parenting Tips

January 5, 2018 By Monica Gupta Leave a Comment

How to Improve Relations with Parents – Parents से रिश्ते कैसे बेहतर बनाएं – Monica Gupta

How to Improve Relations with Parents

How to Improve Relations with Parents – Parents से रिश्ते कैसे बेहतर बनाएं – Monica Gupta – Good Relationship Tips In Hindi – Monica Gupta Videos Relationship with Parents as Adults – How to Improve Relationship with Parents – जीवन में माता पिता का महत्व – माता पिता के प्रति कर्तव्य – रिश्तों को बेहतर तरीके से कैसे निभाएं.  एक मेरी सहेली है जब भी सर्दी शुरु होती है हमेशा एक ही शॉल हमेशा लेती है लगभग 5 साल से तो मैं ही देख रही हूं उसकी बिटिया भी गुस्सा करती है कि मम्मी आप शॉल तो दूसरी लो पर वो नही लेती पता है उसका क्या कारण बताती है… वो बताती है कि ये उसकी मम्मी की शॉल है इसे पहन कर खुद ब खुद गर्मी और नर्मी आ जाती है इसलिए कोई दूसरी शॉल लेने का तो सोच ही नही सकती… वैसे ऐसा बहुत बार होता है दादा जी का पैन अगर उनके पोते को मिल जाए तो खुद ब खुद लेखन में सुधार आ जाता है या बडे बुजुर्ग की कुर्सी पर अगर बैठो तो उनकी गरमाई महसूस होती है…

How to Improve Relations with Parents – Parents से रिश्ते कैसे बेहतर बनाएं – Monica Gupta

कुल मिलाकर बहुत अच्छा लगता है इसलिए हमें अपने रिश्ते उनके साथ हमेशा ऐसे ही बनाए रखने चाहिए. पेरेंटस के साथ कई बार तो हमारे रिश्ते सही चलते हैं पर कई बार मन मुटाव भी हो जाता है तो कैसे रखें ख्याल की रिश्ता मजबूत भी रहे और प्यार भी बना रहे…

पहला तो यही कि उनका ख्याल रखिए..

पास हो या दूर.. हमेशा उनका ख्याल रखिए.. और नेट एक blessing बन कर उभरा है.. दूरदराज बैठे बच्चे भी अपने पेरेंटस से वीडियो कॉल या फोन के माध्यम से जुडे रह सकते हैं…

उन्हें अहसास दिलाईए जैसा कि मेरी सहेली हमेशा उनकी शॉल लेती हैं… ये रिश्ते की गर्मी ही तो है…

उनके साथ समय बिताईए

आजकल की व्यस्त जिंदगी में समय ही नही है पास बैठ कर बात करने का इस वजह से दूरिया बढ जाती हैं तो जब भी मौका मिले उनके साथ समय बिताईए.

जताईए कि उन्हें आपका ख्याल है… मान लीजिए एक पिता है सुबह कसरत नही करते तो सारा दिन उनके शरीर में दर्द रहता है मम्मी को शूगर है पर वो कंट्रोल नही करती.. तो उन्हें अहसास दिलाईए कि आप उन्हें बहुत प्यार करते हैं आपकी तबियत खराब हो तो उन्हें भी अच्छा नही लगता..

उनके अनुभव शेयर करें जब भी उनके पास बैठे उनके अनुभव शेयर करें… कोई पुरानी फोटो निकाल कर ये कब की है… उनसे जानिए … और उनके अनुभव ध्यान से सुनिए… जिस चीज में उनका शौक है मान लीजिए भक्ति में है तो प्रेरक कहानियां सुनिए… राजनीति में है तो राजनीति की बातें सुनिए…

खुद solve कीजिए अपनी प्रोब्लम –

हमारी कोई भी प्रोब्लम है उसे खुद ही निबटाईए.. ये नही कि पैसे की दिक्कत है तो आप अपने पेरेंटस के पास जाकर उन्हें बोल रहे हैं कि बहुत जरुरत है पैसे नही हैं.. बल्कि खुद solve कीजिए.. आप यकीन नही करेंगें पर हमारे रिश्ते मजबूत बनेंगें क्योकि ज्यादातर रिश्ते टूटते ही इस वजह से हैं…

उनकी प्रोबलम solve कीजिए

उस उम्र में उन्हें किस चीज की जरुरत है क्या चैक अप या क्या टेस्ट करवाना है उनसे पूछिए..

For granted भी नही लीजिए इस रिश्ते को…

कई बार क्या होता है कि पति पत्नी दोनो दफ्तर जाते हैं तो बुजुर्ग पेरेंटस को इसलिए बुला लिया कि घर की देखभाल हो जाएगी… चोरियां बहुत बढ गई है…

या बच्चा छोटा है और कोई आया रखने की बजाय माता जी को बुला लेते हैं .. इससे क्या होगा .. रिश्ते अच्छे बनेंगें नही .. खराब होंगें…

सलाह तभी लें जब बहुत ज्यादा जरुरत हो..

मान लीजिए आप किसी रिश्तेदार की शादी में जा रहे हैं और आपका मन है शगुन 1100 ही दें आप वैसे ही अपने पापा से पूछ लेते हैं कि कितना दें और वो कहते हैं कि 2100 तो देना ही चाहिए तो आप क्या करेंगें… आपकी जेब 1100 कहती है अब बात रखी तो आपको दिक्कत नही रखी तो झगडा कि मेरी बात नही मानता..

How to Improve Relations with Parents – Parents से रिश्ते कैसे बेहतर बनाएं – Monica Gupta

January 4, 2018 By Monica Gupta Leave a Comment

You need a Digital Detox – मोबाइल की लत – Digital Detox Benefits – Digital Addiction – Monica Gupta

You need a Digital Detox

You need a Digital Detox – मोबाइल की लत – Digital Detox Benefits – Digital Addiction – Monica Gupta – Get rid of Digital Addiction – अपनाएं स्वस्थ जीवनशैली – बात कल की है मैं पार्क से लौट रही थी तभी देखा एक बहुत छोटा बच्चा कागज का जहाज रहा था और उडा  रहा था. जब उसका जहाज बहुत ऊंचा उंडा तो चिल्लाते हुए खुश होकर पापा को आवाज देने लगा कि  पापा देखो पापा देखो… और पापा लगे हुए थे अपना मोबाइल करने में… इतना महसूस हुआ कि कुछ क्षण इतने कीमती होते हैं हमें उन्हे सहेजने की बजाय उसे बिखेर देते हैं और किसकी वजह से सिर्फ गेजेंट की वजह से…

You need a Digital Detox – मोबाइल की लत – Digital Detox Benefits – Digital Addiction

बहुत जरुरी है दिन में कुछ समय डिजीटल डिटोक्स करना यानि इन से दूरी बनाए रखना..   इसके फायदे भी बहुत है यानि चाहे कम्प्यूटर है या मोबाईल दिन का कुछ समय इनसे दूरी बनाए रखने के ढेर सारे फायदे हैं… चलिए आज उसी बारे में बात करती हों क्योकि वो क्षण उस बच्चे की आखों में मैंने जो चमक देखी शायद उसके पिता कभी महसूस नही कर पाएगें…

बहुत से कीमती पलों को सहेज पाएगें..

बहुत सारे ऐसे पल होते हैं जब हमें हमारे परिवार की जरुरत होती है… हम चहते हैं कि वो हमारी खुशी को महसोस करे पर मिस हो जाती हैं वो मिस न हो उसके लिए इसे बंद कर देना कुछ समय के लिए बहुत अच्छा है…

काम करने की क्षमता बढेगी…

कैसे… जैसे मान लीजिए एक लडकी है वो पढाई कर रही है सोच रही है चलो दो मिनट फेसबुक चैक कर लूं.. एक आदमी है उसने जिम जाना है सोचता है चलो एक बार दस मिनट सोशल मीडिया चैक कर लू. तो हुआ ना उनके काम मे हर्जा… अगर वो लडकी लगातार ही पढती रहती .. सोचलेती कि जब तक ये ऊतर याद नही होगा मैं नेत नही चैक अकरुंगी.. तो अच्छा दे पाती पर बार बार देखने से पढाई पर बहुत फर्क पडा और जो पाठ उसे आधा घंटे में याद होना था वो याद करने में तीन घंटे लग गए और वो भी अच्छे से याद नही हुआ…

अच्छे इंसान बनेंगें…

अच्छे इंसान कैसे बनेंगें चलिए मैं उदाहरण दे कर बताती हूं आप कहीं पिक्चर देखने हॉल में गए हैं. वहा पिकचर के दौरान आपके सामने बैठा आदमी के पास फोन आता है और वो फोन पिक कर बात करने लगता है .. तो गुस्सा आएगा ना.. या कई लोग मैसेज भी करने लगते हैं और उससे हमारा ध्यान बंटता है और हमें बहुत गुस्सा भी आता है.. तो हम कैसे इंसान बनें ?? फोन आया और हमने बस यही बोला कि आपसे बाद में बात करता हूं .. तो मन ही मन बोला कि अच्छा आदमी है… बहुत मींटिग में भी कहा जाता है कि कि भी मोबाईल बंद कर दीजिए और जब हमारे फोन की बैल से हॉल गूंजता है तो सभी की नजरे हमी पर होती हैं…

तनाव कम होगा… depression and anxiety  से बचेग़ें

वो ऐसे की हर समय इससे जुडे रहेंगें तो किसने क्या लिखा किसने किसको कितनी बार कमेट किया.. इसने मुझे लाईक नही किया… उसली सैल्फी बहुत अच्छी कैसे आ गई.. वो धूमने कहा कहा जाते रहते हैं … पढ पढ कर दिमाग पर बोझ सा बन जाएगा.. कुछ समय के लिए बंद कर देगें तो तनाव कम होगा.. और मन शांत होगा..

बच्चों के लिए एक example  बनेंगें  बच्चे बडो से ही सीखते हैं और जब बच्चे ये देखते हैं कि मेरे पेरेंटस भी अक्सर इससे दूर रहते हैं तो उनहे भी सीख मिलेगी कि हमेशा इसी के साथ चिपकू नही रहना..

पैसे भी बचाएगें..

जितना नेट इस्तेमाल करेंगें उतना खर्चा भी तो आएगा.. जितना कम करेंगें उतनी बचत भी तो होगी.. देखिए आज के दौर में हम दूर तो रह नही सकते पर कुछ पल तो दूरी बना ही सकते हैं हमारे लिए हमारी सेहत के लिए…

दुर्धटनाए भी कम होगी…

अगर हम खुद से ये वायदा कर ले कि वाहन चलाते समय मोबाईल नही करना तो बहुत सारी दुर्धटनाओ से बचा जा सकता है.. इसी की वजह से बहुत एक्सीदेंट भी होते हैं और कई बार फाईन भी लग जाता है .. तो है ना नुकसान..

अच्छी नींद लेंगे..

मान लीजिए रात को सोने से पहले नेत बंद कर दिया कि अब सुबह ही देखेना है… तो नींद अच्छी आएगी.. वही रात को हम सो रहे अहिं एक मैसेज की बीप आई और हम उठ कर देखने लगे.. उससे दो बाते होंगी पहली तो हमारी नींद खराब होगी और दूसरा अंधेरे में मोबाईल चैक करेगें तो आखों पर जोर पडता है… digital detox करने से मदद मिलेगी

खाने की तरफ सी हमारा ध्यान जाएगा

नही कुछ भी खा लेते हैं क्योकि ध्यान तो होता ही नही है. कई बार तनाव मे खा लेते हैं या कई बार ओवर ही खा लेते हैं क्योकि ध्यान जो नही होता…  उस तरफ.. मेरी एक सहेली ने अपने डाईनिंग रुम में लिखा हुआ है gadgets फ्री मील्स एरिया.. वहां कोई अपना मोबाईल या लेपटोप लेकर नही जाता …

नशे के जीत लेंगें

ये भी एक तरह का नशा ही है और जब हम इस नशे को जीत लेंगें तो खुद तो अच्छा लगेगा ही … और जब हम दूसरों को इसके बारे में बताएगें तो एक प्रेरणा बनेगें..

रिश्ते मजबूत बनेंगें.. चाहे घर हो या परिवार रिश्ते मजबूत बनेंगें..

अपने आसपास देखने का मौका मिलेगा… कि हो क्या रहा है.. नही तो सारा समय हमारी गर्दन झुकी ही रहती है और अपने आसपास वालों  से पूरी तरह से कट जाते हैं तो अब रिश्ते मजबूत बनेंगें.. केयर करेंगे हाल चाल पूछेगें ..

तो तैयार हैं आप डिजीटल डोटोक्स करने के लिए

एक स्वस्थ्य जिंदगी का सबसे बड़ा राज यह है कि अपने शरीर से विषैले तत्वों को निकाला जाए इसलिए अब तक आप अपने शरीर के साथ जो बुरा करते आए हैं सुधार लें…

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January 3, 2018 By Monica Gupta 3 Comments

How to become a Good Wife – एक अच्छी पत्नी कैसे बने – Husband Wife Relationship Tips

How to become a Good Wife

How to become a Good Wife – एक अच्छी पत्नी कैसे बने – Husband Wife Relationship Tips   #GoodRelationshipTipsInHindi – Monica GuptaQualities needed to be a Good Wife – Husband Wife Relationship Tips In Hindi – Monica Gupta Videos – हर माता पिता का सपना होता है कि बेटी की शादी अच्छे घर में हो और वो खुश रहे… वही शादी के बाद लडकी भी ढेर सारे सपने लेकर नए घर जाती है कई बार सब अच्छा होता है पर कई बार …

How to become a Good Wife – एक अच्छी पत्नी कैसे बने – Husband Wife Relationship Tips

कुछ अनबन भी हो जाती है… तो क्या करना चाहिए एक अच्छी पत्नी बनने के लिए किन बातों का ख्याल रखना चाहिए.. तो चलिए आज इसी बारे में बात करते हैं..

सबसे पहले तो खुश रहिए…

जहां मूड खराब हुआ.. माथे पर बल आए.. वही काम खराब !! कोशिश कीजिए कि आप खुद को खुश रखें और ये पता है कब होगा.. ये तभी होगा जब आप अपनी सेहत का ख्याल रखेंगीं यानि अपने स्वास्थय का ख्याल रखेगी.

How to become a Good Wife – एक अच्छी पत्नी कैसे बने – Husband Wife Relationship Tips

खुद हाय हाय करेगी तो परिवार का ख्याल नही रख पाएगी… तो खुश रहने के लिई जरुरी है अपनी सेहत और सही खान पान…  बात बात पर रोना बंद कीजिए TAKE CARE OF YOURSELF

अपनी PRIORITIES प्राथमिकता निश्चित कर लेनी चाहिए…

अपने घर पर मम्मी या भाभी से बात करना ज्यादा जरुरी है या जब पति घर आए तो उनसे बात करना…बहुत बार होता है फोन पर घंटो बात करने की बहुत आदत होती है या किटी पार्टी में जाने की.. पति घर पर हैं तबियत ठीक नही और आप पार्टी में जा रही हैं…

सही समय पर सही बात करना…

इसका मतलब ये है कि मान जीजिए आपके पति आफिस से थके हारे आए हैं और आप बिन उनका हाल चाल पूछे पूछे सीधा सुना रही हैं नता नही रहीं सुना रहीं हैं कि पडोस के वर्मा जी ने नई कार खरीद ली.. हम कब तक स्कूटर पर धक्के खाएगें.. कब खरीदेंगें कार… पहले पता होता तो दहेज में कार ही ले आती… सोच लीजिए अगर कोई ईमानदारी से घर खर्च चला रहा है तो उन्हें एप्रीशीएट करना चाहिए ना कि ताने मारना चाहिए.. ऐसी बाते बहुत चुभती हैं… आत्मसम्मान को चोट कभी नही पहुचानी चाहिए.. सोच समझ कर ही बोलना चाहिए कि मेरी बात की क्या प्रतिक्रिया हो सकती

पति से बात करना… पति के बारे में बात नही करना …

कोई भी बात या समस्या हो तो सीधा पति से ही बात करनी चाहिए ना कि अपने अडोस पडोस और किटी पार्टी की सहेलियों से… एक बार बात घर की चार दीवारी से बाहर निकल गई फिर आप हमेशा मजाक का कारण बन जाएगी.. तो मौका ही नही देना चाहिए…

understanding नेचर होनी चाहिए..

पति को अचानक दफ्तर में काम आ गया और बाहर धूमने नही जा सकते तो हल्ला नही करना कोई बात नही अगले महीने चलेंगें… अचानक परिवार में किसी की तबियत खराब हो गई और वो आपके घर कुछ दिन रहने आ रहे हैं तो कोई बात नही… ये उनका भी  अभी घर है… ये नही कि कोई पति की तरफ से मेहमान आए तो आपका मुंह बन जाए और अपनी साईड से कोई मेहमान आए तो खूब खातिर दारी करें… दोनो परिवार दोनो माता पिता को एक जैसा सम्मान देना … उस बात की समझ!!

विश्वास रखना…

इस रिश्ते में विश्वास रखना बहुत जरुरी है… इसलिए जरुरी है कि कभी भी कुछ न छिपाएं और जो काम करें बता कर करे… और कभी समझ नही आ रहा तो राय मांग लीजिए… ताक झांक या जासूसी नही..

सॉरी बहुत प्यारा शब्द है इसका इस्तेमाल करते रहिए – गलती मान लेना.. गलती हो भी जाती है तो उसे मान लेना..

लेकिन खुद को बहुत ज्यादा बडा दिखा कर या धमंड दिखाना कि मेरे पापा ने इतने पैसे लगाए शादी में.. मैं क्यू झुकू… ऐसा भी नही होना चाहिए…

बातें तो और भी हैं पर अब मैं आपसे पूछती हूं कि आप बताई कि एक अच्छी पत्नी बनने के लिए किस किस बात का ख्याल रखना चाहिए…

दुनिया का सबसे बेहतरीन रिश्ता वही होता है, जहां एक हल्की मुस्कुराहट और छोटी सी माफी से जिंदगी पहले जैसी हो जाए…

How to become a Good Wife – एक अच्छी पत्नी कैसे बने – Husband Wife Relationship Tips

January 2, 2018 By Monica Gupta Leave a Comment

 How to Stick to New Year Resolutions – नए साल के संकल्प कैसे पूरे करें – Monica Gupta

How to Stick to New Year Resolutions

 How to Stick to New Year Resolutions – नए साल के संकल्प कैसे पूरे करें – Monica Gupta – How to Keep a New Year Resolution –  नए साल की शुरुआत कैसे करें – Start New Year for a Better Life –  Motivational Videos on Self Help in Hindi – #PersonalDevelopmentVideosInHindi – Monica Gupta – How to Keep Your New Year Resolutions

 How to Stick to New Year Resolutions – नए साल के संकल्प कैसे पूरे करें

कल मार्किट मे मेरी सहेली मिली और देखते ही मैंने उसे हैप्पी न्यू ईयर बोला पर जिस खुशी से मैंनें बोला वैसा जवाब नही मिला तो लगा कि पता नही क्या बात है सब ठीक तो है… तो मैंनें पूछ ही लिया कि सब ठीक है हां वो बोली हां ठीक है … तो क्या हुआ.. ??

वो बोली कि आ गया नया साल … तो ?? हर बार टरकाती आ रही थी कि नए साल पर डाईटिंग शुरु करुंगी आ गया नया साल … अब कैसे करुं.. और दुखी होते होते आगे बढ गई… मैं भी घर लौट आई और यही सोच रही थी हम अपने लिए हुए संकल्प का इतना हौव्वा क्यों बना लेते हैं…

क्यों नही छोड पाते … ऐसा क्या नशा है खाने में कि… और बात खाने की नही है कोई भी सकंल्प हो … नही पूरा कर पाते … 6 – 7 दिन बीतते हैं और तनाव सा होने लगता है … और वही सकंल्प जिसे इतने लोगो के सामने ठोक कर लिया होता है चैलेंज करके लिया होता है वो बोझ बन जाता है… तो क्या करना चाहिए कि हम अपने इस सकंल्प पर डटे रहें…

सबसे पहले तो ये कि संकल्प लिया कैसे है

दिल से या धक्के से

दिल से-

Motivation दो तरह का होता है एक तो वो जो सीधा दिल की गहराईयों से होता है … जब हम खुद कुछ करना चाहे यानि खुद अपने मन से  

 धक्के से –

एक होता है दिखावा जिसे हम उपरी मन से करते हैं अक्सर तो किसी के कहने पर

अब सोचना इस बात का है आप किस केटेगिरी में आते हैं अगर दिल से वाले में आते हैं तो आप कर भी सकते हैं और अगर नही धक्के से है तो एक बार सोचना होगा… और इसे दिल तक बनाना होगा

तो जरुरत इस बात की है कि खुद को तैयार करना होगा दिल से… कम्फर्ट जोन से बाहर निकलना होगा…

 मन डगमगा रहा है तो टारगेट थोडा छोटा कर लीजिए…

जैसे मान लीजिए आपने सोचा है कि मीठा बंद तो बंद और मीठा देख देख कर आपका मन ललचा रहा है… ऐसे का भी क्या फायदा… आप ये सोचिए बंद नही करना .. एक चमच की बजाय आधा चम्मच चीनी लूंगी और अगर दिन में तीन बार चाय पीती हूं तो दो बार पीऊंगी… हो गया न सेट गोल…

एक किलोमीटर नही सिर पार्क का एक चक्कर लगना है आपका बिस्तर छोड कर बाहर निकलना ही बहुत बडी बात है … और फिर जब अपने जैसे लोगो को वहा देखेंगें तो मोटिवेशन मिलेगी कि वो लोग भी आते हैं…

जैसा मान लीजिए अगर आपने बाहर सैर का संकल्प लिया है और आप बाहर गए हैं और दस मिनट चलें हैं फिर आप थक गए तो ये भी बहुत बडी उपलब्धि है… अगले दिन देखिए कि आप उससे भी दस कदम आगे चलें… सिर्फ दस कदम… और ऐसे ही बढाते जाईए… आप देख लीजिए कि एक महीने में कितनी चलना शुरु हो गया…

लिख लीजिए… आप एक डायरी बना सकते हैं और हर रोज हर रोज पर लिखिए… आप ये सोच लीजिए कि जब तक मैने अपना लिया संकल्प आज पूरा नही किया तो मैं कोई काम ही नही करुंगी…

“why” से “why not पर आ जाईए…

कई बार मन मे आता है सब ठीक तो चल ही रहा है किसलिए करुं किसलिए सुबह जल्दी उठकर पढाई करुं  किसलिए एक चपाती खाऊं. तो अपने आप से बात कीजिए कि “why” की बजाय why not कहना है कि किसलिए नही… मुझे अपना कुछ बन कर दिखाना ही दिखाना है

 जरुरत है अपने आप से ईमानदार रहने की…

हमें अगर अपनी बात पर कायम रहना है तो हमें अपने साथ ईमानदार रहना बहुत जरुरी है… जैसाकि मान लीजिए मैंनें सोचा है कि एक ही चपाती खानी है और फिर देख इधर उधर कि कोई नही देख रहा तो उसे खा लिया… या सैर करने गए.. सोचा है कि सिग्रेट छोड दूंगा… बाहर गए और स्मोक करके आ गए… घर वालो की नजर में आप छोड चुके हैं.. इसका कोई फायदा है … अगर नही है तो अपने प्रति ईमानदार रहिए…

अपनी जवाबदेही के लिए तैयार रहिए…

ये आपका सकंल्प था तो आपको अपने आप को इसका जवाब भी देना ही पडेगा… आसान नही होता पर अगर मन पक्का कर लेगें तो मुश्किल भी नही…

अपने दोस्त सकारात्मक सोच के रखिए…

ऐसे दोस्त हों जो मोटिवेट करें न कि मजाक बनाएं मान लीजिए एक लडके का ग्रुप है और वो शराब नही लेता बोलता है कि मैने छोड दी है…  तो उसके दोस्त मजाक बना रहे है अल्ले बेटे ने शराब छोड दी… दूधु लाओ बच्चे के लिए बच्चा दूध पीएगा… ऐसे दोस्तों का साथ एकदम से छोड दीजिए…

खुद को मोटिवेट कीजिए...

मैं एक उदाहरण बनने जा रहा हूं ऐसी सोच हर एक की नही होती.. man of principles.. मैं बन कर दिखाऊंगा… प्रेरणा बनूंगा कि जो कहा वो किया… मन  ये सोचिए कि हर किसी में इतनी हिम्मत नही होती.. मैं करके दिखाऊंगा !!

सर्च कीजिए…

ऐसे लोगो को सर्च कीजिए जो अपना लक्ष्य पा पाए हैं या ऐसा कुछ मोटिवेशनल पढिए कि जिन्होनें सोचा और वैसा ही किया ऐसे लोगो से मोटिवेशन मिलती है और मन में आता है कि जब वो कर सकते हैं तो मैं क्यू नही…

मन को मजबूत करना ही होगा … अपना इरादा पक्का बनाना ही होगा…

ख्वाहिशों से नही गिरते फूल,  झोली में, वक्त की डाल को हिलाना होगा

कुछ नही होगा अंधेरो को बुरा कहने से,  अपने हिस्से का “दिया” खुद ही जलाना होगा.

How to Stick to New Year Resolutions – नए साल के संकल्प कैसे पूरे करें –

January 1, 2018 By Monica Gupta Leave a Comment

How to Start the New Year right – ऐसे करें नए साल की शुरुआत – नए साल के दिन क्या करें  – Monica Gupta –

How to Start the New Year right

How to Start the New Year right – ऐसे करें नए साल की शुरुआत – नए साल के दिन क्या करें  – Monica Gupta – दिन की शुरुआत भगवान का नाम लेकर की जाए तो दिन अच्छा बीतता है.. वैसे भगवान रहते कहां हैं.. इस बारे में बहुत धारणाए हैं… एक कहानी इसी बारे में मैंने  पढी थी…

How to Start the New Year right – ऐसे करें नए साल की शुरुआत – नए साल के दिन क्या करें  – Monica Gupta

जब भगवान जी ने दुनिया बनाई तो बहुत खुश हुए पर हुआ क्या कि जब भी किसी मनुष्य को मुसीबत आती तो वो भागा भागा भगवान के पास आ जाता… तब भगवान जी परेशान होकर एक मीटिंग बुलाते हैं सभी देवी देवता आते हैं भगवान जी कहते हैं कि जब देखो मनुष्य अपनी मुसीबत  लेकर आते रहते हैं न मैं तप कर सकता हूं न शांति से रह सकता हूं क्या करु कहां जाऊ तो

 

आप लोग मुझे कृपया ऐसा स्थान बताएं जहां मनुष्य नाम का प्राणी न पहुंच सके।

सभी देवी देवताओं ने अपने-अपने विचार प्रकट किए कोई बोले ‘आप हिमालय पर्वत की चोटी पर चले जाएंपर भगवन ने कहा कि वहां भी सब पहुंच जाते हैं

किसी ने कहा कि समुद्र मे चले जाईए तो वहा6 भी पहुंच जाते ‘यह स्थान तो मनुष्य की पहुंच में है। उसे वहां पहुंचने में अधिक समय नहीं लगेगा।

  ब्रह्माजी निराश होने लगे थे। वह मन ही मन सोचने लगे, ‘क्या मेरे लिए कोई भी ऐसा गुप्त स्थान नहीं है, जहां मैं शांतिपूर्वक रह सकूं’

अंत में सूर्य देव बोले, ‘आप ऐसा करें कि मनुष्य के हृदय में बैठ जाएं। मनुष्य इस स्थान पर आपको ढूंढने में सदा उलझा रहेगा’

ब्रह्माजी को सूर्य देव की बात पसंद आ गई। उन्होंने ऐसा ही किया। वह मनुष्य के हृदय में जाकर बैठ गए। उस दिन से मनुष्य अपना दुख व्यक्त करने के लिए ब्रह्माजीको ऊपर ,नीचे, दाएं, बाएं, आकाश, पाताल में ढूंढ रहा है पर वह मिल नहीं रहे। मनुष्य अपने भीतर बैठे हुए देवता को नहीं देख पा रहा है

नियत अच्छी हो तो, भक्ति भी सच्ची होती हैं,
भगवान हर हृदय में हैं, घरो में रखने की जरूरत नही होती हैं.

सत्यम-शिवम-सुन्दरम,
हर हृदय में हर-हर हैं,

प्यार में ताकत हैं दुनिया को झुकाने की,
वरना क्या जरूरत थी राम को झूठे बैर खाने की.

How to Start the New Year right – ऐसे करें नए साल की शुरुआत – नए साल के दिन क्या करें  – Monica Gupta –

December 31, 2017 By Monica Gupta Leave a Comment

Love Yourself and Be Happy – खुश कैसे रहें – अपने आप से प्यार करें – अपना ख्याल रखें – Monica Gupta

Love Yourself and Be Happy

Love Yourself and Be Happy – खुश कैसे रहें – अपने आप से प्यार करें – अपना ख्याल रखें – Monica Gupta – #PersonalDevelopmentVideosInHindi – Monica Gupta – खुश रहने के लिए क्या करें – How to be Happy – http://https://www.youtube.com/@MonicaGupta/ – Motivational Videos in Hindi – मोनिका गुप्ता

क्या आप किसी को पसंद करते हैं… बहुत ज्यादा पसंद ?? तो क्या करते हैं उनके लिए !! उनका ख्याल रखते हैं उनके लिए फिक्र मंद होते हैं भगवान से यही कामना करते हैं कि इनके ऊपर कभी कोई दिक्कत न आए… यही सब ना .. !!

Love Yourself and Be Happy – खुश कैसे रहें – अपने आप से प्यार करें – अपना ख्याल रखें

चलिए भगवान ने आपको ये गुण तो दिया है… कि आप बहुत केयरिंग हैं बहुत प्यार करने वाला दिल है आपके पास.. लविंग नेचर है आपकी

तो चलिए आज एक काम करते हैं … आज अपने आप से प्यार करते हैं…देखिए जब हम किसी को प्यार करते हैं पसंद करते हैं तो क्या करते हैं.. उनका ख्याल रखते हैं कभी नही चाह्ते उनकी तबियत खराब हो…

कभी नही चाह्ते कि उनके ऊपर कोई दिक्कत आए… और अगर हम खुद से प्यार करना शुरु कर देंगें तो यही बात अगर हम अपने ऊपर अपनाएगें तो देख लीजिए कितना फर्क पड जाएगा… फिर टाल मटोल करने की आदत भी खत्म हो जाएगी… फिर शुरु होगा हमारे जीवन का नया अध्याय…

आज जिंदगी में हमें सब कुछ चाहिए अच्छा परिवार अच्छी नौकरी अच्छा घर… ये सब कब मिलेगा… ये सब तब मिलेगा जब हम काम करेंगें और काम तभी करेंगें जब हमारी सेहत अच्छी होगी… सेहत अच्छी कब होगी जब हम अपना ख्याल रखेंगें और ख्याल कब रखेंगें .. ख्याल तभी रखेंगें जब हम अपने आप से प्यार करेंगें अपनी केयर करेंगें…

वैसे खुद को प्यार करने के बहुत सारे फायदे हैं …

सबसे पहला तो यही कि हम स्वस्थ रहेंगें अपनी सेहत का ख्याल रखेंगें…

हम अच्छा सोचेगें… जब अपनी केयर करेंगें तो यकीनन अच्छा ही सोचेगें जो चीजे हमे नुकसान देती हैं उनसे दूर रहेंगें… जैसा कि नशा नशा से दूर रहेंगें

फिर हम नेगेटिव नही होंगें यानि सोच पोजीटिव रहेगी… खुद को appreciate करेगें …  खुद को कोसेगे नही

अपना एक बहुत प्यारा दोस्त मिल जाएगा.. जो हमेशा आपके साथ रहेगा…

जब आप खुद की केयर करनी शुरु कर देंगें तो  healthier decisions लेगें… चाहे हमारी सेहत की बात हो या अन्य कुछ भी .. हम तुरंत न कहने वाले बन जाएगे..

टाल मटोल खत्म हो जाएगी कि चल आज खा लेते हैं क्या फर्क पडता है

खुद की छवि अच्छी बनती है जब दूसरे देखते है तो कह उठते है कि वाह … !! प्रेरणा बन सकते हैं

हम अपने आप को younger महसूस करते हैं …

जब तनाव ही नही होगा तो झुरिया भी नही आएगी चेहरे पर

जब हम खुश होगें तो हम दूसरो का भी करना चाहेंगें .. मान लीजिए एक महिला है हमेशा बीमार रहती है… उसका मन करेगा किसी की सेवा करे..

और इससे आता है confidence  कोई किसी को एप्रीशीएट नही करता .. ह्म किसी की इंतजार नही करनी होगी . खुद की पीठ थपथपाएगें

तो चलिए एक नई शुरुआत करते हैं… खुद से नाराज होईए खुद को गुस्सा कीजिए और तो और खुद को रिश्वत भी दीजिए…

हर दिन अपनी जिंदगी को नया ख्वाब दो

चाहे पूरा न हो पर एक आवाज दो

एक दिन पूरे हो जाएगें ख्वाब सारे, सिर्फ एक शुरुआत तो दो…

       ख्वाहिशों से नही गिरते ‘फूल,  झोली में, वक्त की डाल को हिलाना होगा

कुछ नही होगा अंधेरो को बुरा कहने से,  अपने हिस्से का ” दीया ‘ खुद ही जलाना होगा.

Love Yourself and Be Happy – खुश कैसे रहें – अपने आप से प्यार करें – अपना ख्याल रखें – Monica Gupta

December 30, 2017 By Monica Gupta Leave a Comment

Teach Kids to Accept Failures – बच्चों को सिखाएं – विफलता को स्वीकार करें – Monica Gupta

Teach Kids to Accept Failures

Teach Kids to Accept Failures – बच्चों को सिखाएं – विफलता को स्वीकार करें – Monica Gupta – Parenting Tips in Hindi – पेरेंटिंग टिप्स – बच्चों को कैसे समझाएं बच्चों की परवरिश – बच्चों की परवरिश कैसे करें – परवरिश के तरीके – बच्चों को हम पेरेंट्स क्या क्या सीखाते हैं.. लिखना, पढ़ना  खेलना, हंसना बोलना…  पर क्या हम बच्चों को फेल होने पर, असफल हो जाने पर उसे स्वीकार कर लेना चाहिए सीखाते हैं ?? नही ..

Teach Kids to Accept Failures – बच्चों को सिखाएं – विफलता को स्वीकार करें

ज्यादातर पेरेंट्स नही सीखाते क्योंकि पेरेंट्स  का बस एक ही लक्ष्य होता है कि बच्चा हर चीज में फर्स्ट रहे… उससे इतनी उम्मीदे रख लेते हैं अगर बच्चा किसी काम में रह गया तो नाराज हो जाते हैं, बहुत प्रेशर डालते हैं… टीवी खाना बंद कर देते हैं वहीं बच्चा भी सफलता न मिलने पर वो उसे पचा नही पाता और टूट जाता है… जबकि हमें बच्चों को सीखाना चाहिए जीवन मे सफलता और असफलता दोनो होती रहती हैं और हमें दोनो को स्वीकार करना आना चाहिए..

ऐसा नही करना चाहिए कि बच्चे के नम्बर सबसे ज्यादा आए तो टेस्ट में चीटिंग भी करवा रहे हैं या प्रैक्टिकल है और जो examiner आए हैं उन्हें पैसे खिला कर या सिफारिश से बच्चे के नम्बर लगवा रहे हैं..

ऐसे में बच्चा हमेशा सफलता ही चाहेगा और जब उसे नही मिलेगी तो वो टूट जाएगा.. ऐसी स्थिति से बचने के लिए हमे उसे ये सीखाना होगा कि हार जाना भी आना चाहिए… सफल न होने पर मायूस नही होना… अगर सफलता चाहते हैं तो असफलता का स्वाद भी चखना पडेगा..

पेरेंट्स खुद मॉडल बनें..

मॉडल तब बनेंग़ें जब अपनी उम्मीदें कम रखेंगें…

इसका बहुत प्रेशर बच्चे पर पडता है.. बहुत ज्यादा उम्मीद रखते हैं और किसी वजह से अच्छा नही कर पाया तो बुरा बर्ताव करते हैं… कुछ दिन पहले मैंने एक रिएलिटी शो में देखा कि एक बच्चे की आवाज बहुत अच्छी थी पर उसके सुर बिखर रहे थे.. गाने के बाद उसने बताया कि पापा का बहुत प्रेशर था कि अगर इसमे सेलेक्ट नही हुआ तो तेरा गाना बंद… इसलिए वो बहुत तनाव में गा रहा था… वही एक बच्चा जिसके सुर इतने अच्छे नही थे पर वो पूरी मस्ती में गा रहा था.. क्योकि उसके मम्मी पापा ने कहा था कि तुम चाहे सेलेक्ट हो या न हो हमारे लिए तो तुम हीरो हो… और वो खूब मस्ती में गा रहा था… और वो सिलेक्ट भी हो गया… ये होता है जब बहुत प्रेशर होता है… इसलिए प्रेरेंट्स को यह बात सीखनी चाहिए कि प्रेशर न डाले.

बच्चे से empathy यानि सहानूभूति रखनी चाहिए…

आमतौर पर बच्चे के असफल होने पर हम बोल देते हैं कि ठीक है अगली बार अच्छा करना… इसका मतलब हो ये हुआ ना कि बच्चे ने इस बार अच्छा नही किया … जबकि कहना चाहिए कि आप बहुत ज्यादा उदास हो … मुझे पता है आप इससे बेहतर करना चाहते थे कोई बात नहीं.. यानि उसे मोटिवेट करना है न कि डिमोटिवेट..

कई बार फेल होना एक सबक होता है..

कितनी बार जब बच्चे के कम नम्बर आते हैं तो पेरेंटस ये कहते हैं कि अच्छा हुआ.. अब सबक मिलेगा अब मेहनत करेगा… एक बात तो मैं ही बताती हूं कि दो दोस्त थे.. 9 क्लास में..  एक की english अच्छी थी दूसरे का maths दोनो ने स्कीम बना ली कि एक दूसरे को दिखाएगें… english वाले ने तो अपना पेपर दिखा दिया पर दूसरे ने अपना maths का पेपर  नही दिखाया उसने चीटिंग कर ली… वो बच्चा फेल हो गया पर अब उसमे एक नया आत्मविश्वास था कि खुद अपनी maths अच्छी करेगा.. और अगले साल वो मेहनत करके क्लास में फर्स्ट आया  इसलिए सीखाना चाहिए कि

इसे दिल और दिमाग पर हावी नही होने देना… .

ये जिंदगी का बहुत महत्वपूर्ण सबक है…  और अगर ये पेरेंटस ने बच्चे को सीखा दिया तो वो जिंदगी का सामना सहजता से करेगा और जल्दी ही उससे बाहर भी आ जाएगा..

बच्चों को उदाहरण भी दीजिए..

अगर हम गूगल सर्च करेंगें या नेट पर सर्च करेंगें बहुत सारी ऐसी प्रेरक कहानियां हैं जिनसे हम सबक ले सकते हैं कि इन्होनें भी इतनी दुख, तकलीफ उठाई पर आज देखो उससे निकल कर आ गए और सफल भी है…

एक प्रसंग कुछ ऐसे हैं कि एक बार एक व्यक्ति मंदिर से बाहर आ रहा होता है और बहुत सारे बंदर उसके पीछे पड जाते हैं तो वो आदमी डर कर भागने लगता है वही एक पंडित देख रहे होते हैं वो बोलते हैं भागो मत सामना करो…  वो वही रुक गए और सामना किया और अब बंदरों के डर कर भागने की बारी थी… हमारे सामने दो situation आती हैं पहली भाग लो या भाग लो… या तो भाग लो या सामना करो उस चैलेंज का…

असफलता ही सफलता की सीढ़ी है

ये समझाना चाहिए कि असफलता हमें सबक सीखाती है… बहुत बार ऐसा होता है कि हम अपनी हार को एक चैलेंज की तरह ले लेते हैं और फिर दुगुने उत्साह के साथ सामना करते हैं

दूसरे शब्दों में, हमारी असफलता, हमारी हार, एक opportunity ले कर आती है.. जो हमें महसूस कराती है.  हम सीखते हैं और आगे बढते हैं..

नई Field Explore होती हैं …

एक अच्छे बात ये भी होती है हम नई नई चीजे सीख जाते हैं.. कई बार हम एक ही चीज के पीछे लग जाते हैं दूसरी चीज को ट्राई ही नही देते जबकि इसी बहाने हम दूसरी चीज पर अपना ध्यान लगाते हैं और पता चलता है अरे ये तो बहुत अच्छी थी… तो एक तरह से असफलता वरदान बन कर आई.. जैसे एक बच्चा बहुत प्रैक्टिस करता है वेट लेफ्टिंग की.. पर बार बार असफल हो जाता है फिर एक बार उसे मौका मिलता है कि वो रंनिग करे और उसमे उसे गोल्ड मैडल मिल जाता है…

असफल होने पर बहुत बार ये भी देखा गया है

खुद पर विश्वास ज्यादा हो जाता है मन मजबूत कर के हम खुद को ही चैलेंज कर देते हैं..

“मैं” से बाहर निकलते हैं..  Sportsmanship बढती है..

कि मैं ही जीतूंगा मैं ही फर्स्ट आऊंगा.. इससे बाहर निकल कर दूसरों को जीतते हुए देखते हैं तो sportsmanship बढती है..

कुल मिलाकर बच्चों को असफलता का, हार का सामना करना सीखाना चाहिए.. ठोकर खाकर ही सीखते हैं हम कई बार !!

मील का पत्थर बन कर आता है ये हमारे सामने…

तो क्या सोचा.. ??

Teach Kids to Accept Failures – बच्चों को सिखाएं – विफलता को स्वीकार करें – Monica Gupta

December 29, 2017 By Monica Gupta Leave a Comment

Signs of Negative People – नकारात्मक लोगों की पहचान – Identify Negative People – Monica Gupta

Identify Negative People

Signs of Negative People – नकारात्मक लोगों की पहचान – Identify Negative People – Monica Gupta – नकारात्मक लोगों की पहचान – कैसे करें नकारात्मक लोगों की पहचान – मान लीजिए आपके सामने एक गिलास है जिसमे थोडा पानी है.. तो हम क्या बोलेगें कि आधा भरा है या आधा खाली है… कुछ लोग इसी बात से अंदाजा लगा लेते हैं कि हमारा नजरिया कैसा है…

Signs of Negative People – नकारात्मक लोगों की पहचान – Identify Negative People –

हमारी सोच कैसी है नेगेटिव या पॉजिटिव.. अगर आधा भरा हुआ कहते हैं तो हम आशावादी हैं और अगर कहते हैं कि आधा खाली है तो हम इस बात को नकारात्मक ढंग से ही ले रहे हैं कि आधा खाली है..दुख, उदासी, निराशा, चिंता मिलाकर एक  cocktail बन जाती है जिसे नेगेटिवी कहा जाता है..

वैसे और भी बहुत सारी ऐसी बाते हैं जिसे पता चलता है कि हम नेगेटिव हैं या पॉजीटिव

चिंता करते हैं

चिंता करना या tension रखना उन्हें बहुत प्रिय होता है वो हमेशा चिंता ही करते रहते है.. ये हुआ तो क्यों हुआ ये नही हुआ तो किसलिए नही हुआ.. सर्दी के मौसम में अगर सर्दी पड गई तो सर्दी क्यो पड रही हैं अगर धूप निकल गई तो अब की बार तो सर्दी रही ही नही… क्यो हो गई. बरसात है तो बरसात क्यो हुई और अगर बरसात नही हुई तो बरसात क्यों नही हुई..

जो होना है वो तो होकर ही रहेगा फिर चिंता करें

अगर,  मगर या पर but जैसे शब्दों से उन्हें बहुत लगाव होता है..

काम तो अच्छा है पर इसे ऐसा करते तो ज्यादा अच्छा होता…

या

सब्जी तो अच्छी बनी है पर अगर थोडा ज्यादा होता और सब्जी को और भूना जाता तो और भी ज्यादा स्वादिष्ट बनती..

पूरी तरह निराशावादी होते हैं..

अपने आप को पूरी तरह से नकारा समझते हैं और सबके सामने कहते भी हैं कि मैं तो बिल्कुल ही बेवकूफ हूं, मुझे तो जरा भी समझ और अकल नही… जब मुसीबत आती है, तो वह बजाय हल खोजने के वह खुद को कसूरवार ठहराते है… यह मान बैठते है कि उस मुसीबत का कोई हल नहीं.. जो हुआ उन्हीं की वजह से हुआ इसी वजह से सब हुआ और, और हालात के सामने घुटने टेक देते हैं ..

Sensitive होते हैं – कोई कुछ कह कर तो देखे

हर बात में negativity ही दिखती है इसलिए compliments को भी गलत तरीके से ले जाते हैं… मान लीजिए कोई बुजुर्ग है और उन्हें मैं बोलती हूं कि आप अच्छे लग रहे हो.. तो बोलेगें कि हा भई उडा लो मेरा मजाक… बूढा हो गया हूं ना…

जैसे मान लीजिए एक महिला हैं और उन्होनें अच्छी सी साडी पहन रखी है और अगर मैंनें उन्हें बोला आज आप बहुत अच्छी लग रही हैं तो बोलेगी… हां हा उडा ले मेरा मजाक.. आज मैं ही मिली हूं क्या…

कोई अच्छी खबर सुनेगें तो उसमे भी नेगेटिव बात खोज ही लेगें…

कुछ लोग ऐसे होते हैं जो बुराई में भी अच्छाई खोज लेते हैं और कुछ लोग अच्छाई में भी बुराई …

जैसे मान लीजिए अगर आप अपने किसी जानकर की शादी की खबर सुनेगें तो क्या रिएक्शन होगा.. अरे वाह !! बहुत बहुत बधाई !! और नेगेटिव लोगो का क्या कहना होगा… बात तो खुशी की है पर अगर जल्दी शादी हो जाती तो तेरे चाचा भी शादी देख लेते.. देर से लिया शादी का डीसीजन.. तेरी उम्र में तो मेरे दो बच्चे भी हो गए थे…

वो कभी comfort zone से बाहर आना ही नही चाहते..

उनमे हमेशा हार का डर बना रहता है… ना उनमे कोई आत्मविश्वास होता है ना कोई मजबूत इरादा.. ना कोई नया अनुभव लेना चाहते न ही नया कुछ नया करने का ट्राई करते इसलिए कुछ करने से सामना करने से डरते हैं ना.. और इसलिए पीछे ही रह जाते हैं..

जिंदगी में कुछ achieve नही कर पाते.. असफल होने के बहुत से कारण हो सकते हैं पर नेगेटिव होना भी एक बहुत बडा कारण है.. ऐसे लोग  सोचते हैं कि हम तो स्मार्ट नही, अच्छे नहीं इसलिए जिंदगी में कुछ हासिल हो ही नही सकता… इतना ही नही खुद तो पीछे रह ही जाते हैं और दूसरो को भी कुछ नया करन से मना करते हैं कि भाई तू भी रहने दे तुझसे नही हो पाएगा… मैंने भी किया था.. मुझे भी बहुत दिक्कतें आई थीं…

हमेशा Past  के बारे में सोचते रहते हैं

Past में अच्छा नही हुआ तो रोना रोएगें कि future में भी अच्छा नही होगा और अगर पास्ट में कुछ अच्छा हुआ हो तो यही कहेंगें कि past तो निकल गया पता नही भविष्य में ऐसा होगा या नही..  खुश रहना, स्माईल करना तो उनके शब्दकोष में होता ही नही है…

फोकस हमेशा प्रोब्लम पर होता है उसके सोल्यूशन पर नही…

हमेशा डर, भय असुरक्षा में ही जीते हैं..

दूसरो को तो नसीहत देते रहेंगें कि ये ऐसे करो ये वैसा करना चाहिए पर खुद अपने लिए कभी भी श्योर नही होते… कभी भी excited नही होते इसलिए जिंदगी में बहुत कुछ मिस कर देते हैं…

नेगेटिव लोगो का चेहरा .. कुछ ऐसा हो जाता है माथे पर बल, स्माईल गायब.. बातों से गुस्सा निकलना..

Signs of Negative People – नकारात्मक लोगों की पहचान – Identify Negative People – Monica Gupta

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